अनंत अंबानी की 140 किमी पैदल यात्रा: 250 मुर्गियों को बचाया, जानें पूरी कहानी

अनंत अंबानी की जामनगर से द्वारका तक 140 किमी की पैदल यात्रा चर्चा में है। यात्रा के दौरान 250 मुर्गियों को बचाने से लेकर आध्यात्मिक संदेश तक, पढ़ें पूरी खबर।

अनंत अंबानी की 140 किमी पैदल यात्रा: 250 मुर्गियों को बचाया, जानें पूरी कहानी
अनंत अंबानी ने 250 मुर्गियों को बचाया

देश के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी इन दिनों सुर्खियों में छाए हुए हैं। वजह है उनकी जामनगर से द्वारका तक 140 किलोमीटर की पैदल यात्रा, जो न सिर्फ उनके आध्यात्मिक लगाव को दिखाती है, बल्कि उनकी संवेदनशीलता और जीव-दया की भावना को भी सामने लाती है। इस यात्रा के दौरान अनंत ने कुछ ऐसा किया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। उन्होंने 250 मुर्गियों को बूचड़खाने जाने से बचाया और उन्हें दोगुनी कीमत देकर खरीद लिया। आइए, इस दिलचस्प घटना और उनकी यात्रा की पूरी कहानी को करीब से जानते हैं।

मुर्गियों को बचाने की अनोखी पहल

अनंत अंबानी ने अपनी पैदल यात्रा शुरू की थी 28 मार्च को, जामनगर के मोती खावड़ी से। यात्रा के दौरान एक दिन उन्हें सड़क पर एक ट्रक दिखा, जिसमें 250 मुर्गियां बूचड़खाने की ओर ले जाई जा रही थीं। यह देखकर अनंत का दिल पसीज गया। उन्होंने तुरंत ट्रक को रुकवाया और ड्राइवर से बात की। फिर क्या, अनंत ने सभी मुर्गियों को बाजार से दोगुनी कीमत पर खरीद लिया। इसके बाद उन्होंने कहा, "अब हम इन्हें पालेंगे।" एक मुर्गी को हाथ में लेकर वे आगे बढ़े और "जय द्वारकाधीश" का नारा लगाते हुए अपनी यात्रा जारी रखी। यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों ने अनंत की इस दरियादिली की जमकर तारीफ की।

यात्रा का आध्यात्मिक पहलू

अनंत की यह यात्रा सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी है। पांचवें दिन वे वडत्रा गांव के पास विश्वनाथ वेद संस्कृत पाठशाला पहुंचे। वहां उन्होंने संस्थापक मगनभाई राज्यगुरु के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद खंभालिया के फुललीया हनुमान मंदिर में भरतदास बापू ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। बापू ने अनंत को शॉल ओढ़ाई और भगवान द्वारकाधीश की तस्वीर भेंट की, जिसे उन्होंने बड़े सम्मान के साथ स्वीकार किया। अनंत ने इस यात्रा को अपने 30वें जन्मदिन के लिए खास बताया, जो वे 10 अप्रैल को द्वारका में मनाने वाले हैं।

रात में यात्रा क्यों?

अनंत की यह पैदल यात्रा खास इसलिए भी है, क्योंकि वे इसे रात के समय कर रहे हैं। इसका कारण है लोगों को परेशानी से बचाना। दिन में सड़कों पर भीड़ और ट्रैफिक होता है, इसलिए उन्होंने रात का समय चुना ताकि आम जनजीवन प्रभावित न हो। यह उनकी संवेदनशीलता और दूसरों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

भगवान पर अटूट विश्वास

मीडिया से बात करते हुए अनंत ने अपनी यात्रा का मकसद साफ किया। उन्होंने कहा, "मैं कोई भी काम शुरू करने से पहले भगवान द्वारकाधीश को याद करता हूं। मेरी युवाओं से अपील है कि वे भगवान पर भरोसा रखें। जहां भगवान हैं, वहां चिंता की कोई बात नहीं।" अनंत का यह संदेश न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि उनकी आस्था की गहराई को भी दिखाता है।

वनतारा: वन्यजीवों के लिए समर्पण

अनंत अंबानी सिर्फ आध्यात्मिक यात्राओं के लिए ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के लिए भी जाने जाते हैं। उनके प्रोजेक्ट "वनतारा" ने अब तक 2000 से ज्यादा प्रजातियों के 1.5 लाख जानवरों को बचाया है। यह प्रोजेक्ट जामनगर में स्थित है और देश का सबसे बड़ा वन्यजीव पुनर्वास केंद्र माना जाता है। हाल ही में केंद्र सरकार ने उन्हें पशु कल्याण के लिए "प्राणी मित्र राष्ट्रीय पुरस्कार" से सम्मानित किया। मुर्गियों को बचाने की घटना भी उनके इसी जुनून का हिस्सा है।

लोगों की प्रतिक्रिया

अनंत की इस यात्रा और मुर्गियों को बचाने की कहानी ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। कोई उनकी जीव-दया की तारीफ कर रहा है, तो कोई उनके आध्यात्मिक पक्ष को सराह रहा है। एक यूजर ने लिखा, "अनंत अंबानी ने दिखा दिया कि पैसा और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकते हैं।" वहीं, कुछ लोग इसे पब्लिसिटी स्टंट भी बता रहे हैं, लेकिन ज्यादातर लोग उनकी इस पहल से प्रभावित हैं।

यात्रा का मकसद और भविष्य

यह यात्रा अनंत के लिए एक व्यक्तिगत और आध्यात्मिक अनुभव है। वे इसे अपने जन्मदिन के मौके पर भगवान द्वारकाधीश को समर्पित करना चाहते हैं। साथ ही, वे युवाओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि आस्था और मेहनत से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। उनकी यह यात्रा 140 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद द्वारका में खत्म होगी, जहां वे अपने 30वें जन्मदिन का जश्न मनाएंगे।

अनंत की प्रेरणादायक यात्रा

अनंत अंबानी की यह पैदल यात्रा कई मायनों में खास है। यह न सिर्फ उनकी आस्था और संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि उनके व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को भी सामने लाती है। चाहे 250 मुर्गियों को बचाना हो या वनतारा के जरिए वन्यजीव संरक्षण, अनंत ने साबित किया है कि वे सिर्फ एक बिजनेस टाइकून के बेटे नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान भी हैं। उनकी यह कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा बन सकती है।