मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू, मंत्रिपरिषद के बड़े फैसले
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में सुगम परिवहन सेवा शुरू करने का फैसला। जानें बस सेवाओं, IT प्लेटफॉर्म और शासकीय भत्तों के नए नियमों के बारे में।

मंगलवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के विकास और जन सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। इनमें सबसे बड़ा कदम है "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा" की शुरुआत, जिसका मकसद प्रदेश में सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्री परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही शासकीय कर्मचारियों के भत्तों में बढ़ोतरी और छतरपुर के एक धार्मिक स्थल को पवित्र क्षेत्र घोषित करने जैसे निर्णय भी चर्चा में रहे। आइए, इन फैसलों को करीब से समझते हैं।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा: क्या है खास?
मध्यप्रदेश सरकार ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा" शुरू करने का ऐलान किया है। इस योजना के तहत ग्रामीण और साधारण मार्गों पर ट्रैफिक सर्वे और बसों की फ्रीक्वेंसी तय की जाएगी। एक व्यवस्थित प्लानिंग के साथ निजी क्षेत्र की मदद से बस सेवाएं चलाई जाएंगी। इसके लिए सरकार ने 101 करोड़ 20 लाख रुपये की अंशपूंजी को मंजूरी दी है।
इस योजना का लक्ष्य है कि मध्यप्रदेश के हर कोने में लोग आसानी से यात्रा कर सकें। खास बात यह है कि बस सेवाओं को निजी ऑपरेटर्स के साथ मिलकर चलाया जाएगा, लेकिन इसे पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाएगा। एक हाई-टेक IT प्लेटफॉर्म के जरिए बसों की निगरानी होगी, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले और ऑपरेटर्स का काम भी आसान हो।
20 शहरों में बस सेवाओं का कायाकल्प
मध्यप्रदेश के 20 शहरों में पहले से ही सार्वजनिक परिवहन के लिए SPVs (स्पेशल परपज व्हीकल्स) बनाए गए हैं, जिनमें से 16 काम कर रहे हैं। अब इनका विलय करके 7 संभागीय कंपनियां बनाई जाएंगी। इन सभी को नियंत्रित करने के लिए राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी का गठन होगा, जो कंपनीज एक्ट 2013 के तहत काम करेगी। यह होल्डिंग कंपनी बस सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ बस टर्मिनल, बस स्टॉप और दूसरी सुविधाओं को अपग्रेड करने का काम भी करेगी।
PPP मॉडल से होगा बस परिवहन का विकास
इस योजना में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल का इस्तेमाल होगा। इसके तहत बस ऑपरेटर्स को एक पारदर्शी प्रक्रिया से चुना जाएगा और उन्हें IT प्लेटफॉर्म के जरिए मॉनिटर किया जाएगा। बसों के संचालन से लेकर रखरखाव तक सब कुछ तकनीक आधारित होगा। सर्विस लेवल अग्रीमेंट (SLA) और की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स (KPI) के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यात्री सेवाएं सुरक्षित और सुविधाजनक रहें।
IT तकनीक से लैस होगी बस सेवा
इस योजना में IT का बड़ा रोल होगा। एक कंट्रोल एंड कमांड सेंटर बनाया जाएगा, जो बसों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगा। यात्रियों के लिए मोबाइल ऐप और ई-टिकटिंग की सुविधा होगी, जिससे वे बसों की लोकेशन, ऑक्यूपेंसी और ट्रैवल प्लानिंग आसानी से कर सकेंगे। कैशलेस पेमेंट और टैप-ऑन, टैप-ऑफ जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी। ऑपरेटर्स के लिए भी ऑपरेटर ऐप, वीडियो ऑडिट सॉफ्टवेयर और फील्ड ऑडिट ऐप जैसी सुविधाएं होंगी।
लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर जोर
यात्रियों की सुविधा के लिए लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू होगा, जिसमें बस, ऑटो, टैक्सी, ई-स्कूटर और मेट्रो जैसी सेवाएं एक साथ जोड़ी जाएंगी। एक ट्रैवल ऐप बनाया जाएगा, जिसमें ये सारी सुविधाएं एक जगह मिलेंगी।
ग्रामीण इलाकों में भी बस सेवाएं
इस योजना में ग्रामीण इलाकों को प्राथमिकता दी गई है। ओरिजिन एंड डेस्टिनेशन (O-D) सर्वे के आधार पर बस मार्ग तय किए जाएंगे। ऐसे मार्गों का चयन होगा जो ऑपरेटर्स के लिए फाइनेंशियली फीजिबल हों। साथ ही, जो मार्ग लाभकारी न हों, उनके लिए भी अलग से योजना बनाई जाएगी। मोटरयान अधिनियम के तहत संभागवार स्कीम तैयार होगी और ऑपरेटर्स को परमिट दिए जाएंगे।
पर्यावरण के लिए भी कदम
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ई-बसों और इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों को बढ़ावा दिया जाएगा। ग्रीन फंडिंग और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर बस सेवाओं को मजबूत किया जाएगा।
शासकीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी
मंत्रिपरिषद ने शासकीय कर्मचारियों के भत्तों में बढ़ोतरी को भी मंजूरी दी। इसके तहत गृह भाड़ा भत्ता (HRA) को सातवें वेतनमान के आधार पर बढ़ाया जाएगा। A श्रेणी के शहरों में 10%, B श्रेणी में 7%, और C व D श्रेणी के शहरों में 5% HRA मिलेगा। दैनिक भत्ता, वाहन भत्ता, मील भत्ता और स्थानांतरण से जुड़े खर्चों में भी बढ़ोतरी होगी। इससे राज्य सरकार पर सालाना 1500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
इसके अलावा, शासकीय कर्मचारियों की मृत्यु पर परिवार को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 2.57 गुना बढ़ाकर अधिकतम 1.25 लाख रुपये तक किया गया है। मंत्रालय में काम करने वाले कर्मचारियों को भी विशेष भत्ता मिलेगा।
धार्मिक स्थल को पवित्र क्षेत्र का दर्जा
मंत्रिपरिषद ने छतरपुर जिले के लवकुशनगर में माता बम्बरबैनी मंदिर को पवित्र क्षेत्र घोषित करने का फैसला लिया। यह प्राचीन स्थल खसरा नंबर 2157 और 2158 पर स्थित है, जिसका क्षेत्रफल क्रमशः 0.012 हेक्टेयर और 30.375 हेक्टेयर है।
एक नई शुरुआत की ओर
मध्यप्रदेश सरकार के ये फैसले न सिर्फ परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाएंगे, बल्कि शासकीय कर्मचारियों और आम लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाएंगे। "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा" एक ऐसा कदम है, जो तकनीक और जन सुविधा को जोड़कर राज्य को नई दिशा दे सकता है। क्या आप भी इस योजना से उत्साहित हैं? अपनी राय हमें जरूर बताएं!