ग्वालियर में स्मार्ट सिटी मेटरनिटी हॉस्पिटल पर छापा, अवैध गर्भपात का खुलासा
ग्वालियर के स्मार्ट सिटी मेटरनिटी हॉस्पिटल में अवैध गर्भपात का मामला सामने आया। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस जांच में जुटी, कर्मचारी भ्रूण लेकर फरार। पूरी खबर पढ़ें।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के गुडागुढी का नाका इलाके में स्थित स्मार्ट सिटी मेटरनिटी हॉस्पिटल पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी की, जहां अवैध गर्भपात का रैकेट चलने की बात सामने आई है। यह कार्रवाई तब हुई जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को सूचना मिली कि अस्पताल में एक महिला का गर्भपात कराया जा रहा है। लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही अस्पताल का एक कर्मचारी भ्रूण को लेकर फरार हो गया। अब स्वास्थ्य विभाग और पुलिस इस मामले की गहन जांच में जुट गए हैं।
क्या हुआ घटनाक्रम?
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सामाजिक कार्यकर्ता मीना शर्मा को जानकारी मिली कि स्मार्ट सिटी मेटरनिटी हॉस्पिटल में अवैध रूप से गर्भपात का काम चल रहा है। मीना को पता चला कि 25 मार्च 2025 की रात को गोल पहिया इलाके की एक महिला का गर्भपात कराने की योजना है। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना ग्वालियर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को दी। इसके बाद CMHO डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने अपनी टीम को तैयार किया और 26 मार्च 2025 की सुबह 6 बजे अस्पताल पर छापा मारा।
लेकिन जब टीम अस्पताल पहुंची, तब तक गर्भपात की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। जांच के दौरान पता चला कि एक युवक भ्रूण को पन्नी में लपेटकर अस्पताल से भाग गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें यह युवक भ्रूण लेकर जाते हुए साफ दिखाई दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
अस्पताल का रजिस्ट्रेशन भी था खत्म
CMHO डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने बताया कि यह अस्पताल सुदीप नागौरी के नाम से संचालित हो रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि इसका रजिस्ट्रेशन पिछले साल ही खत्म हो चुका था, और अस्पताल प्रबंधन ने इसे रिन्यू नहीं कराया। इसके बावजूद यहां अवैध गतिविधियां चल रही थीं। डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, "हमें सूचना मिली थी कि यहां गर्भपात का काम हो रहा है। हमारी टीम ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन कर्मचारी भ्रूण लेकर भाग निकला। हम इस मामले की पूरी जांच कर रहे हैं।"
महिला के पास पहले से दो बेटियां, लिंग जांच का शक
जांच में यह भी सामने आया कि जिस महिला का गर्भपात कराया गया, उसके पहले से दो बेटियां हैं। इस वजह से शक जताया जा रहा है कि गर्भ में पल रहा बच्चा अगर लड़की था, तो लिंग के आधार पर गर्भपात कराया गया हो सकता है। हालांकि, यह अभी सिर्फ एक अनुमान है। भ्रूण मिलने और उसकी जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि बच्चा लड़का था या लड़की। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें इस पहलू पर भी गौर कर रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका
सामाजिक कार्यकर्ता मीना शर्मा ने इस मामले को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया, "हमें पहले से शक था कि इस अस्पताल में अवैध गर्भपात का धंधा चल रहा है। कल रात सूचना मिली कि एक महिला का गर्भपात होने वाला है। हमने तुरंत पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया।" मीना ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग और ग्वालियर पुलिस संयुक्त रूप से इस मामले की जांच कर रही है। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लिया गया है और फरार कर्मचारी की तलाश जारी है। साथ ही, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अस्पताल में कितने समय से अवैध गर्भपात का काम चल रहा था। पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है।
अवैध गर्भपात: एक गंभीर समस्या
भारत में लिंग जांच और गर्भपात के खिलाफ सख्त कानून हैं। प्री-कॉन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) एक्ट के तहत लिंग जांच और लिंग के आधार पर गर्भपात पूरी तरह प्रतिबंधित है। फिर भी, कई जगहों पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो समाज में जागरूकता की कमी और कानून के उल्लंघन को दर्शाते हैं। ग्वालियर का यह मामला भी इसी ओर इशारा करता है।
आगे क्या?
इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसे अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के कैसे चल रहे हैं? स्वास्थ्य विभाग अब शहर के अन्य निजी अस्पतालों की भी जांच करने की योजना बना रहा है। साथ ही, इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है। भ्रूण के मिलने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि गर्भपात का कारण लिंग था या कोई और वजह।
ग्वालियर में यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि समाज में लड़कियों के प्रति सोच को भी सामने लाती है। इस मामले की जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन तब तक यह खबर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहेगी।