शिवपुरी हादसा: 5 साल की बच्ची के साथ क्रूरता, किशोर आरोपी पर कानूनी कार्रवाई की चुनौती

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में 17 साल के किशोर ने 5 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की हदें पार कीं। पीड़िता की जान बचाने वाले ऑपरेशन, पुलिस कार्रवाई और किशोर न्याय अधिनियम के तहत चुनौतियों की पूरी कहानी।

शिवपुरी हादसा: 5 साल की बच्ची के साथ क्रूरता, किशोर आरोपी पर कानूनी कार्रवाई की चुनौती
शिवपुरी में 5 साल की मासूम के साथ दरिंदगी

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के दिनारा गांव में एक ऐसी घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है, जहां 5 साल की एक मासूम बच्ची को 17 साल के किशोर ने शराब के नशे में बेरहमी से प्रताड़ित, और दुष्कर्म किया। यह घटना न सिर्फ मानवता के लिए कलंक है, बल्कि किशोर न्याय प्रणाली, बाल सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। 

घटना की कालक्रम: जानलेवा हिंसा का सिलसिला

22 फरवरी: वह दोपहर जब इंसानियत शर्मसार हुई

दिनारा गांव के एक सुनसान खंडहर में आरोपी किशोर ने बच्ची को फुसलाकर ले जाया। नशे की हालत में उसने जो कुछ किया, वह सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं:

  1. यौन हिंसा और शारीरिक प्रताड़ना: बच्ची की पिटाई करने के बाद आरोपी ने उसके निजी अंगों को दांतों से काट दिया।
  2. हत्या की कोशिश: अपराध छिपाने के लिए उसने बच्ची का सिर दीवार से कई बार टकराया, जिससे वह बेहोश हो गई।
  3. फरार होने की कोशिश: आरोपी ने बच्ची को मरा समझकर भागने का प्रयास किया।

मौत को मात देती मासूम

कुछ घंटों बाद जब बच्ची को होश आया, तो उसकी चीखें सुनकर ग्रामीण इकट्ठे हुए। उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोटों (जननांगों और मलद्वार में गहरे घाव) के कारण ग्वालियर के कमला राजा अस्पताल में रेफर किया गया।

चिकित्सकों की जंग: मासूम को जिंदगी देना

2 घंटे का ऑपरेशन और 28 टांके

डॉक्टरों की टीम ने जटिल सर्जरी कर बच्ची की जान बचाई:  

  • कृत्रिम मलद्वार (कोलोस्टोमी): मलद्वार के गंभीर नुकसान के कारण पेट पर अस्थायी स्टोमा बनाया गया।
  • घावों की मरम्मत: आंतरिक अंगों और त्वचा को सही करने के लिए 28 टांके लगे।
  • भविष्य की योजना: स्वस्थ होने पर स्टोमा हटाने की तैयारी।

मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची अब स्थिर है, लेकिन शारीरिक और मानसिक पुनर्वास लंबा चलेगा।

पुलिस की कार्रवाई: आरोपी गिरफ्तार, पर उम्र बनी चुनौती

नाबालिग या वयस्क? कानूनी उलझन

  • तत्काल गिरफ्तारी: घटना के 24 घंटे के अंदर पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया।
  • आयु विवाद: अंकसूची के अनुसार आरोपी की उम्र 17 साल 10 महीने है, जो उसे "किशोर" की श्रेणी में लाती है।
  • POCSO एक्ट के तहत केस: गंभीर प्रकृति को देखते हुए विशेष अदालत में सुनवाई की मांग।

पुलिस अधिकारियों का कहना है, "आरोपी ने बच्ची को मारने की नीयत से सिर फोड़ा था। हम जांच पूरी कर चुके हैं और कोर्ट से वयस्कों वाली सजा की मांग करेंगे।"

समाज पर सवाल: बच्चों की सुरक्षा कहाँ है?

गांव में सदमा, महिलाएं डरी हुईं

घटना के बाद दिनारा गांव में डर का माहौल है। बच्चियों को अकेले नहीं छोड़ा जा रहा। स्थानीय निवासी सवाल कर रहे हैं: "नशे में धुत किशोरों को कौन रोके? गांव में पुलिस चौकी नहीं, सुरक्षा का कोई इंतजाम क्यों नहीं?"

कानूनी लड़ाई की राह

  • किशोर न्याय बोर्ड की भूमिका: आरोपी की उम्र के आधार पर केस की सुनवाई तय होगी।
  • सजा की संभावनाएं: POCSO एक्ट के तहत अधिकतम सजा मौत या उम्रकैद हो सकती है, लेकिन नाबालिग होने पर 3 साल तक ही सुधार गृह में रखा जाएगा।
  • जन दबाव: सोशल मीडिया और एनजीओ की ओर से आरोपी को वयस्क मानने की मांग तेज।

निष्कर्ष: सुधार की जरूरत  

यह घटना न सिर्फ शिवपुरी, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। बाल यौन शोषण के मामलों में कड़े कानूनी प्रावधानों के बावजूद, नाबालिग आरोपियों को मिलने वाली रियायत पर पुनर्विचार जरूरी है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में पुलिस व्यवस्था मजबूत करने और नशाखोरी रोकने के उपायों पर तेजी से काम होना चाहिए।

पीड़िता की जिंदगी बचाने वाले डॉक्टरों और ग्रामीणों की सराहना करते हुए, समाज को यह संकल्प लेना होगा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। एक मासूम की आंखों में छिपे डर को मिटाने के लिए हम सभी को जागना होगा।