बुरहानपुर अस्पताल विवाद: कुर्सी पर बैठने से भड़के डॉक्टर, BJP पार्षद पति से हुई तीखी बहस का वीडियो वायरल
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला अस्पताल में डॉ. अलतमश और भाजपा पार्षद के पति के बीच कुर्सी विवाद ने तूल पकड़ा। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टर से मांगा जवाब, मरीज-डॉक्टर संबंधों पर उठे सवाल। पढ़ें पूरी खबर।

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला अस्पताल में एक छोटी सी घटना ने तूल पकड़ लिया जब एक महिला पार्षद और उनके पति का डॉक्टर के साथ विवाद हो गया। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लिया है।
क्या था मामला?
बुरहानपुर जिला अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉ. अलतमश और भाजपा की वार्ड नंबर 12 गांधी चौक की महिला पार्षद के परिवार के बीच तनातनी का मामला सामने आया है। दरअसल, महिला पार्षद को उनकी पालतू बिल्ली ने काट लिया था, जिसके चलते एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने वह अपने पति के साथ अस्पताल पहुंची थीं।
जब वे डॉक्टर के कक्ष में गए, तो महिला पार्षद के पति गलती से डॉक्टर की कुर्सी पर बैठ गए। इसी बात को लेकर डॉ. अलतमश ने आपत्ति जताई, जिससे विवाद शुरू हो गया। डॉक्टर के व्यवहार से नाराज होकर पार्षद और उनके पति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया।
बुरहानपुर जिला अस्पताल में छोटी सी बात ने लिया विकराल रूप! डॉक्टर की कुर्सी पर बैठना BJP पार्षद पति को पड़ा भारी, डॉ. ने दी धमकी। विवाद का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन सख्त, सिविल सर्जन ने जारी किया नोटिस।#BJPCouncilor #DoctorPatientDispute #MadhyaPradeshNews #ViralVideo pic.twitter.com/jqi408bfnI — Fact Finding (@factfindingmp) March 22, 2025
प्रशासन से की शिकायत
विवाद के बाद पार्षद दंपति सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और एडीएम वीर सिंह चौहान को मामले की शिकायत की। एडीएम ने इस पूरे प्रकरण की जांच जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से कराने का आश्वासन दिया।
वीडियो में दिख रहा है कि डॉक्टर अलतमश मरीज के पति को "शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने" की धमकी दे रहे हैं और उन्हें "अराजक तत्व" भी कह रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
सिविल सर्जन ने लिया संज्ञान
जब मीडिया ने इस मामले की जानकारी जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोसेस को दी, तो उन्होंने वीडियो को देखकर तुरंत कार्रवाई की। सिविल सर्जन ने डॉक्टर अलतमश को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।
साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए, प्रशिक्षण पर आने वाले डॉक्टरों को मरीजों और उनके परिजनों से कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसकी विशेष ट्रेनिंग देने की भी बात कही है।
चिकित्सकीय नैतिकता पर उठे सवाल
धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों से लोग हमेशा सम्मानजनक व्यवहार की उम्मीद करते हैं। लेकिन इस घटना ने समाज में चिकित्सकीय नैतिकता पर भी सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ जहां डॉक्टरों को अपने व्यवसायिक अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर मरीज और उनके परिजनों के साथ व्यवहार में संयम बरतना भी आवश्यक है।
मरीज-डॉक्टर संबंध
इस घटना से स्पष्ट होता है कि डॉक्टर और मरीज के बीच का संबंध कितना नाजुक है। एक छोटी सी गलतफहमी बड़े विवाद का रूप ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों को रोकने के लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे के प्रति सम्मान और समझ विकसित करनी चाहिए।
क्या कहता है मेडिकल एथिक्स?
भारतीय चिकित्सा परिषद की आचार संहिता के अनुसार, डॉक्टरों को हर समय मरीजों और उनके परिजनों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। चिकित्सा एक सेवा भाव से जुड़ा पेशा है, जिसमें मरीज का हित सर्वोपरि होता है।
वहीं, मरीजों और उनके परिजनों की भी जिम्मेदारी है कि वे अस्पताल के नियमों और प्रक्रियाओं का सम्मान करें और डॉक्टरों के साथ सहयोग करें।
आगे की कार्रवाई
जिला प्रशासन द्वारा इस मामले की जांच जारी है। सिविल सर्जन ने आश्वासन दिया है कि पूरी जांच के बाद ही किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना कितना महत्वपूर्ण है, जहां मरीज पहले से ही तनाव और पीड़ा में होते हैं।