मध्य प्रदेश में शराबबंदी: उज्जैन सहित 19 धार्मिक क्षेत्रों में नई आबकारी नीति लागू
मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत उज्जैन, अमरकंटक सहित 19 धार्मिक क्षेत्रों में शराबबंदी शुरू। जानें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस ऐतिहासिक फैसले का असर और जनता की प्रतिक्रिया।

मध्य प्रदेश में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई आबकारी नीति के तहत 19 धार्मिक क्षेत्रों में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले का पालन 31 मार्च 2025 से शुरू हो चुका है, जिसमें उज्जैन की पवित्र नगरी भी शामिल है। खास बात यह है कि बाबा महाकाल के सेनापति काल भैरव मंदिर के सामने सालों से चल रही शराब की दुकानों पर भी ताले लग गए हैं। अब मंदिर में मदिरा भोग की व्यवस्था मंदिर प्रबंध समिति संभालेगी। इस कदम को नशा मुक्ति की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है, जिसकी जनता ने भी दिल से सराहना की है।
24 जनवरी 2025 को लिया गया था यह ऐतिहासिक निर्णय
यह सब शुरू हुआ 24 जनवरी 2025 को, जब महेश्वर में आयोजित एक कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 19 धार्मिक क्षेत्रों में शराबबंदी की घोषणा की थी। इस फैसले के पीछे उनका मकसद साफ था- मध्य प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाना। इस नीति के तहत उज्जैन, अमरकंटक, महेश्वर, ओरछा, ओंकारेश्वर, मंडला, मुलताई, दतिया, चित्रकूट, सलकनपुर जैसे धार्मिक स्थलों सहित कई अन्य क्षेत्रों में शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई है। इन इलाकों में हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं, और अब इन पवित्र स्थानों पर शराब का नामोनिशान नहीं रहेगा।
धार्मिक क्षेत्रों में शराबबंदी का क्या है मकसद?
मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम धार्मिक और सामाजिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री का मानना है कि ये क्षेत्र आस्था के केंद्र हैं, जहां शराब जैसे नशे की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उज्जैन में बाबा महाकाल की नगरी हो या मां नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक, ये सभी स्थान अपनी पवित्रता के लिए जाने जाते हैं। इसी तरह ओरछा, ओंकारेश्वर, मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र, और चित्रकूट जैसे स्थानों पर भी यह नियम लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम न सिर्फ धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है, बल्कि समाज में नशे की लत को कम करने में भी मदद करेगा।
शराब खरीदना और बेचना दोनों गैरकानूनी
उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने साफ किया है कि इन 19 धार्मिक क्षेत्रों में शराब की बिक्री और खरीद दोनों अब पूरी तरह से गैरकानूनी हैं। अगर कोई इस नियम को तोड़ता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और प्रशासन इस नीति को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उज्जैन में काल भैरव मंदिर के सामने बनी शराब दुकानों को बंद कर दिया गया है, जो इस बात का सबूत है कि सरकार अपने फैसले को लेकर कितनी गंभीर है।
गुजरात और बिहार की राह पर मध्य प्रदेश
देश में गुजरात और बिहार पहले से ही पूर्ण शराबबंदी लागू कर चुके हैं। अब मध्य प्रदेश भी इस दिशा में धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहा है। हालांकि, अभी यह प्रतिबंध सिर्फ 19 धार्मिक क्षेत्रों तक सीमित है, लेकिन इसे भविष्य में और विस्तार देने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस फैसले से सरकार को शराब बिक्री से होने वाले राजस्व में नुकसान जरूर होगा, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समाज की भलाई को प्राथमिकता दी है। जनता ने भी इसे खूब सराहा है और कई जगहों पर धन्यवाद यात्राएं निकाली गई हैं।
काल भैरव मंदिर में बदली व्यवस्था
उज्जैन में काल भैरव मंदिर के लिए यह फैसला खास मायने रखता है। यहां बाबा काल भैरव को परंपरागत रूप से मदिरा का भोग लगाया जाता है। नई नीति के तहत अब यह जिम्मेदारी मंदिर प्रबंध समिति को सौंपी गई है। पहले मंदिर के सामने दो शराब काउंटर हुआ करते थे, जहां से भक्त madira खरीदकर भोग के लिए लाते थे। लेकिन अब इन दुकानों को बंद कर दिया गया है, और मंदिर समिति खुद इस व्यवस्था को संभालेगी। यह बदलाव न सिर्फ शराबबंदी को लागू करने में मदद करेगा, बल्कि मंदिर की पवित्रता को भी बनाए रखेगा।
जनता और प्रशासन का क्या है रुख?
इस नीति के लागू होने के बाद जनता में इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि इससे इन जगहों की शांति और पवित्रता बनी रहेगी। वहीं, प्रशासन भी इसे सख्ती से लागू करने में जुटा है। नगर निगम उज्जैन के साथ-साथ नगर पालिका मेहर, दतिया, पन्ना, मंडला, मुलताई, मंदसौर और अन्य क्षेत्रों में भी यह नियम प्रभावी हो चुका है।
शराबबंदी से क्या होगा असर?
शराबबंदी का यह कदम कई मायनों में बदलाव ला सकता है। सबसे पहले, यह नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए एक राहत की बात होगी। दूसरा, धार्मिक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को एक बेहतर माहौल मिलेगा। हालांकि, सरकार को राजस्व का नुकसान होगा, लेकिन लंबे समय में यह सामाजिक और स्वास्थ्य लाभ के रूप में वापस लौट सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी शराबबंदी का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
नशा मुक्ति की दिशा में एक बड़ा कदम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले को नशा मुक्ति की दिशा में एक मजबूत कदम बताया है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों से शुरूआत करके सरकार पूरे प्रदेश में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना चाहती है। यह कदम न सिर्फ मध्य प्रदेश के लोगों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकता है।