इंदौर लोकायुक्त ट्रैप ऑपरेशन: 13000/- रुपए रिश्वत में रंगे हाथों पकड़ा आरोपी
इंदौर लोकायुक्त इकाई ने महानिदेशक श्री योगेश देशमुख के निर्देशानुसार भ्रष्टाचार के खिलाफ ट्रैप ऑपरेशन अंजाम दिया। जानिए कैसे एक अधिकारी ने 13000/- रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।

इंदौर – लोकायुक्त कार्यालय इंदौर ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का संकेत देते हुए एक ट्रैप ऑपरेशन अंजाम दिया है। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देशानुसार इस ऑपरेशन में भ्रष्टाचार के निशाने पर लगे एक अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ा गया। यह मामला शिक्षा विभाग में मान्यता संबंधी प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें एक स्कूल के मान्यता आवेदन के दौरान रिश्वत की मांग की गई थी।
घटना का विवरण
आवेदक आशुतोष सैनी, जो कि रामकृष्ण परमहंस विद्यालय, तिलक नगर, इंदौर के संचालक हैं, ने लोकायुक्त कार्यालय में स्वयं जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। आशुतोष सैनी ने बताया कि उन्होंने स्कूल की मान्यता में तीन वर्ष की समय वृद्धि हेतु आवेदन किया था। लेकिन, जब उन्हें इस प्रक्रिया के दौरान शारीरिक सत्यापन रिपोर्ट प्रदान करने के लिए बुलाया गया, तो BRC ने 20,000/- रुपए रिश्वत की मांग कर दी।
शिकायत दर्ज होते ही श्री राजेश सहाय, पुलिस अधीक्षक, विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय इंदौर के पास मामला दर्ज किया गया। सत्यापन प्रक्रिया में आरोपी, माता प्रसाद गौड, विकास खंड श्रोत समन्वयक, इंदौर अर्बन –2 के तहत काम करने वाले, ने प्रारंभ में 18,000/- रुपए की मांग की और बाद में 5,000/- रुपए भी अपने पास रख लिए। इस प्रकार कुल 13,000/- रुपए की रिश्वत प्राप्त होने के बाद आरोपी रंगे हाथों पकड़ा गया।
ट्रैप ऑपरेशन की रूपरेखा
आलोचनात्मक और निर्णायक कदम के तहत आज, दिनांक 25.03.2025 को लोकायुक्त कार्यालय ने ट्रैप दल का गठन किया। ट्रैप ऑपरेशन के दौरान, लोकायुक्त इकाई के अधिकारियों ने आरोपी के साथ गुप्त रूप से संपर्क स्थापित किया और रिश्वत लेन-देन की स्थिति को प्रमाणित किया।
ट्रैप दल में प्रमुख अधिकारी डीएसपी श्री सुनील तालान के नेतृत्व में निरीक्षक श्रीमती रेनू अग्रवाल, प्रधान आरक्षक प्रमोद यादव, आरक्षक विजय कुमार, आरक्षक अनिल परमार, आरक्षक चेतन परिहार, आरक्षक शिव पाराशर के साथ कृष्णा एवं आदित्य भदौरिया भी शामिल थे। इस टीम ने सभी आवश्यक सबूत एकत्र कर, आरोपी के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए काम किया।
ब्यूरोक्रेटिक प्रणाली में भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश
इस घटना ने न केवल शिक्षा विभाग में बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। उनके निर्देशानुसार, लोकायुक्त इकाई ने बिना किसी छूट के ट्रैप ऑपरेशन अंजाम दिया और आरोपियों को कानून के कठोर प्रावधानों के तहत लाने का वचन दिया।
आरोपी पर भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 के अंतर्गत कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। इस अधिनियम के तहत, ऐसे मामलों में जहां रिश्वत लेने की पुष्टि होती है, आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है।
शैक्षिक संस्थानों में पारदर्शिता की आवश्यकता
रामकृष्ण परमहंस विद्यालय के संचालक आशुतोष सैनी की शिकायत इस बात की गवाही देती है कि शैक्षिक संस्थानों में पारदर्शिता और नैतिकता का होना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा विभाग के ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार की स्थिति में न केवल संस्था की प्रतिष्ठा पर असर पड़ता है बल्कि विद्यार्थियों और अभिभावकों के विश्वास पर भी गहरा आघात लगता है।
इसलिए, लोकायुक्त कार्यालय द्वारा ऐसे ट्रैप ऑपरेशन्स एक संकेत है कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। आशुतोष सैनी के द्वारा समय रहते की गई शिकायत ने इस मामले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रभाव और आगे की दिशा
इस ट्रैप ऑपरेशन से यह स्पष्ट हो गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सरकारी तंत्र में ईमानदारी की पुनर्स्थापना के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। ट्रैप ऑपरेशन में जुटी पूरी टीम ने यह साबित कर दिया कि भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था में उच्च स्तर की समर्पण और तत्परता है।
अगले चरण में, आरोपी के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ाई जाएगी। न्यायपालिका द्वारा मामले की गहन जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त दंड सुनाया जाएगा। इससे न केवल इस घटना का न्याय मिलेगा बल्कि अन्य संभावित भ्रष्टाचारियों के लिए भी एक चेतावनी संदेश जाएगा।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया और उम्मीद
इस मामले पर आम जनता में उत्साह और समर्थन की लहर देखने को मिल रही है। लोग इस बात से संतुष्ट हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और प्रशासन में ईमानदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। कई नागरिक और शिक्षाविद भी इस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि ऐसे कदम से शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
लोकायुक्त कार्यालय का यह कदम सरकारी विभागों में भरोसे की पुनर्स्थापना का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह न केवल वर्तमान में बल्कि भविष्य में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश देने वाला है। प्रशासनिक तंत्र में सुधार की इस पहल से अन्य विभाग भी प्रेरित होकर अपने-अपने क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तत्पर होंगे।
निष्कर्ष: ईमानदारी का संदेश
इंदौर लोकायुक्त इकाई द्वारा ट्रैप ऑपरेशन में सफलतापूर्वक एक रिश्वत लेने वाले अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ना भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख के निर्देशों पर चलकर यह कार्रवाई न केवल शिक्षा विभाग में बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है। आशुतोष सैनी जैसे नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और ट्रैप दल की तत्परता ने इस मामले में न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भविष्य में भी इस प्रकार के प्रयास जारी रहेंगे ताकि देश में पारदर्शिता, ईमानदारी और न्याय सुनिश्चित हो सके।