विक्रमोत्सव: एक ऐतिहासिक उत्सव जिसकी शुरुआत 114 रियासतों के राजा-महाराजाओं के साथ हुई

विक्रमोत्सव, जिसे 1942 में शुरू किया गया था, भारतीय समाज को अपने महानायक और गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाने का एक महा आयोजन है। इस उत्सव की धूम उज्जैन से लेकर मुंबई तक फैल गई थी। जानिए इस उत्सव के इतिहास और वर्तमान आयोजन के बारे में।

विक्रमोत्सव: एक ऐतिहासिक उत्सव जिसकी शुरुआत 114 रियासतों के राजा-महाराजाओं के साथ हुई
विक्रमोत्सव एक ऐतिहासिक उत्सव

उज्जैन: भारत की संस्कृति और इतिहास में कई ऐसे ऐतिहासिक आयोजन हैं जिन्होंने भारतीय समाज को अपनी महान परंपराओं और नायकों से अवगत कराया है, और विक्रमोत्सव इन आयोजनों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। विक्रमोत्सव का आयोजन भारतीय समाज को अपने महानायक और गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाने के उद्देश्य से किया गया था। यह उत्सव पहली बार 1942 में शुरू हुआ और उसकी धूम उज्जैन से लेकर मुंबई तक सुनाई दी। आज भी यह उत्सव अपनी प्रसिद्धि और महत्व को बनाए हुए है, और इसकी धूम पूरे भारत में फैली हुई है।

विक्रमोत्सव की शुरुआत और उद्देश्य

विक्रमोत्सव की शुरुआत वर्ष 1942 में हुई थी, और इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज को उनके महान नायकों, विशेष रूप से राजा विक्रमादित्य, और उनके गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाना था। इस उत्सव का आयोजन पंडित सूर्य नारायण व्यास ने किया था, जो 114 रियासतों के राज ज्योतिषी थे। इस उत्सव की शुरुआत के साथ ही 114 रियासतों के राजा-महाराजाओं का एकत्रीकरण हुआ, जिन्होंने इस उत्सव को धूमधाम से मनाना शुरू किया।

इस उत्सव की शुरुआत में ही यह इतना लोकप्रिय हुआ कि इसकी धूम उज्जैन से लेकर मुंबई तक सुनाई देने लगी थी। इसका आयोजन न केवल हिंदू राजा-महाराजाओं के एकत्रीकरण का प्रतीक था, बल्कि इसने भारतीय संस्कृति और इतिहास को भी समाज में पुनः स्थापित करने का काम किया था।

विक्रमोत्सव का विस्तार और वर्तमान आयोजन

वर्तमान समय में विक्रमोत्सव केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि इसे 125 दिनों तक मनाए जाने की परंपरा शुरू हो चुकी है। इस वर्ष महाशिवरात्रि, 26 फरवरी से विक्रमोत्सव की शुरुआत हो चुकी है, जो आगामी 30 जून 2025 तक सतत जारी रहेगा। इस उत्सव के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आयोजन किए जाएंगे, जिनमें अनादी देव, शिव की कलाओं का शिवार्चन, विक्रम व्यापार मेला, शिल्प वस्त्र उद्योग, हथकरघा उपकरणों की प्रदर्शनी, विक्रमादित्य वैदिक घड़ी एप्प का लोकार्पण, उज्जैनी नाटक और नृत्य समारोह, शोध संगोष्ठी, विक्रमादित्य का न्याय वैचारिक समागम, आदि शामिल हैं।

इन आयोजनों का आयोजन उज्जैन के साथ-साथ इंदौर, भोपाल और दिल्ली तक किया जाएगा, जो इस उत्सव को और भी व्यापक और लोकप्रिय बना रहा है।

पंडित सूर्य नारायण व्यास और विक्रमोत्सव की शुरुआत

पंडित सूर्य नारायण व्यास ने विक्रमोत्सव की शुरुआत की थी। वह 114 रियासतों के राज ज्योतिषी थे, और उन्होंने वर्ष 1940 में मासिक पत्रिका "विक्रम" का प्रकाशन किया था। इस पत्रिका का उद्देश्य राजा विक्रमादित्य के इतिहास और उनके योगदान को लोगों तक पहुंचाना था। विक्रम महोत्सव की शुरुआत इसी पत्रिका के माध्यम से हुई थी, और इसके साथ ही विक्रमोत्सव ने एक बड़ा ऐतिहासिक रूप लिया।

पंडित व्यास ने विक्रमोत्सव के माध्यम से भारतीय समाज को अपने इतिहास से जोड़ने का प्रयास किया। यह उत्सव राजा विक्रमादित्य के न्याय, वीरता और उनके योगदान को याद करने का एक अवसर था।

विक्रमादित्य फिल्म का योगदान

पंडित सूर्य नारायण व्यास ने विक्रमादित्य के जीवन और उनकी कथाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए सुपरस्टार पृथ्वीराज कपूर को हीरो बनाकर "विक्रमादित्य" फिल्म का निर्माण किया था। इस फिल्म ने भारतीय समाज में राजा विक्रमादित्य के योगदान और उनके शासनकाल के बारे में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म ने भारतीय समाज को राजा विक्रमादित्य के महान कार्यों और न्यायप्रियता के बारे में जागरूक किया, जिससे विक्रमोत्सव से जुड़ने वाले लोगों की संख्या में काफी इजाफा हुआ।

विक्रम महोत्सव का महत्व और अंग्रेजों से संघर्ष

विक्रमोत्सव के आयोजन ने अंग्रेजों को परेशान कर दिया था, क्योंकि इस आयोजन में हिंदू राजा-महाराजाओं का एकत्रीकरण हो रहा था, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। यही कारण था कि अंग्रेजों ने इस आयोजन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की थी। हालांकि, विक्रमोत्सव ने अंग्रेजों के प्रयासों को नाकाम कर दिया, और इसके साथ ही हिंदी, मराठी और अंग्रेजी में विक्रम स्मृति ग्रंथ का प्रकाशन हुआ, जिससे राजा विक्रमादित्य के अस्तित्व को प्रमाणित किया गया।

यह ग्रंथ लगभग 2000 पेज का था, जिसमें विक्रमादित्य और कालिदास पर विद्वानों द्वारा शोधपूर्ण लेख लिखवाए गए थे। इस ग्रंथ के माध्यम से यह साबित किया गया कि राजा विक्रमादित्य एक ऐतिहासिक व्यक्ति थे और उन्होंने उज्जैन पर शासन किया था।

विक्रमोत्सव का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

विक्रमोत्सव न केवल भारतीय समाज के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं को भी जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। पंडित सूर्य नारायण व्यास द्वारा शुरू किया गया यह आयोजन आज भी लोगों को अपने महान नायकों और उनके योगदान से अवगत कराता है। विक्रमोत्सव का आयोजन अब उज्जैन से लेकर अन्य प्रमुख शहरों में किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि यह उत्सव कितनी महत्वपूर्ण और प्रभावशाली परंपरा बन चुका है।