BJP प्रवक्ता नाजिया इलाही खान ने रमजान में किए महाकाल के दर्शन, कहा - "रमजान में पहले राम का नाम आता है"
रमजान के पवित्र महीने में भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता नाजिया इलाही खान ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। यहां उन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रमजान में भी पहले राम का नाम आता है।

मध्य प्रदेश के उज्जैन की पावन नगरी में हर दिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने आते हैं। लेकिन मंगलवार को एक विशेष मुलाकात ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा, जब भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नाजिया इलाही खान रमजान के पवित्र महीने में बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचीं।
पूरी श्रद्धा से किए दर्शन
नाजिया इलाही खान ने चांदी द्वार से प्रवेश कर पूरी विधि-विधान से बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना की। पंडित आकाश गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने महाकाल को पुष्पहार और प्रसादी अर्पित की। इस दौरान वे महाकाल की भक्ति में पूरी तरह लीन दिखाई दीं। उन्होंने अपने माथे पर तिलक लगवाया और "जय श्री महाकाल" का उद्घोष भी किया।
महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया, "नाजिया इलाही खान ने पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए। उन्होंने नंदी जी का भी आशीर्वाद लिया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान महाकाल से आशीर्वाद मांगा।"
"रमजान में पहले राम का नाम आता है"
दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में नाजिया इलाही खान ने कहा, "भारत में गंगा-जमुनी तहजीब की बात की जाती है, लेकिन आज भी कुछ लोग इसे समझने को तैयार नहीं हैं। मैं ऐसे लोगों को समझाना चाहूंगी कि रमजान में पहले भगवान राम आते हैं, और उसके बाद अजान के शब्द में जान आता है।"
उन्होंने आगे कहा, "आज का समय पहले की तरह नहीं है। अब हिंदुस्तान औरंगजेब की मानसिकता रखने वालों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। अब तो उन्हें ही सम्मान मिलेगा जो उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जैसे विचार रखते हैं, और जो डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसी सोच रखते हैं, जो अपने भाषणों में भगवद गीता के श्लोक उद्धृत करते थे।"
हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता
नाजिया ने हाल ही में कर्नाटक में आयोजित आरएसएस की सभा का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी। उन्होंने कहा, "इस चर्चा को रुकना नहीं चाहिए, बल्कि और व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है।"
उन्होंने बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा, "वर्तमान में संभल, बहराइच, बेंगलुरु, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं। मुझे लगता है कि आरएसएस द्वारा उठाए गए इन मुद्दों पर और गहनता से विचार करने की आवश्यकता है।"
न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की मांग
नाजिया इलाही खान ने न्याय व्यवस्था पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, "अगर हम संभल और नागपुर में हिंदुओं की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो फिर हमारी न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है।"
भारत की सामाजिक एकता का संदेश
नाजिया इलाही खान का महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करना और वह भी रमजान के दौरान, भारत की सामाजिक एकता और धार्मिक सद्भाव का एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। उनके इस कदम से यह संदेश जाता है कि धर्म व्यक्तिगत आस्था का विषय है और व्यक्ति किसी भी धर्म का अनुयायी हो, उसे सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
नाजिया इलाही खान के महाकाल दर्शन और उनके बयानों पर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भाजपा की 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' की नीति का प्रतिबिंब है, जबकि विपक्षी दल इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा बता रहे हैं।
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, "नाजिया इलाही खान का महाकाल मंदिर जाना और रमजान के दौरान पूजा-अर्चना करना, भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है जिसमें वह अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर मुस्लिम महिलाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।"
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने नाजिया इलाही खान के दर्शन पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दीं। कुछ श्रद्धालुओं ने इसे धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण बताया, जबकि कुछ अन्य ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया।
एक श्रद्धालु ने कहा, "यह अच्छी बात है कि लोग धर्म से ऊपर उठकर एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों का सम्मान करते हैं। इससे समाज में एकता बढ़ेगी।"
वहीं, एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, "ध्यान आकर्षित करने के लिए नेता कुछ भी कर सकते हैं। खासकर चुनावी मौसम में ऐसी घटनाएँ आम होती हैं।"
महाकालेश्वर मंदिर का महत्व
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और पूरे विश्व में विख्यात है। हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। विशेष अवसरों पर, जैसे महाशिवरात्रि, मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं और लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मंदिर प्रशासन हर धर्म और जाति के लोगों का स्वागत करता है, और यहां कई प्रसिद्ध हस्तियां, राजनेता और धार्मिक नेता नियमित रूप से दर्शन के लिए आते हैं।
भारत की गंगा-जमुनी तहजीब
नाजिया इलाही खान के बयानों ने एक बार फिर भारत की गंगा-जमुनी तहजीब पर ध्यान आकर्षित किया है। यह संस्कृति हिंदू और मुस्लिम परंपराओं के सामंजस्य को दर्शाती है, जो विशेष रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है।
इतिहासकार के अनुसार, "गंगा-जमुनी तहजीब भारत की बहुलतावादी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का सह-अस्तित्व और परस्पर सम्मान शामिल है।"
भारतीय एकता का संदेश
भाजपा प्रवक्ता नाजिया इलाही खान का रमजान के दौरान महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन और उनके बयान भारतीय समाज में धार्मिक सहिष्णुता और एकता के महत्व को रेखांकित करते हैं। हालांकि इस घटना के राजनीतिक निहितार्थ भी हो सकते हैं, लेकिन यह धार्मिक सद्भाव और सामाजिक एकता का एक सकारात्मक संदेश भी देती है।
भारत की विविधता में एकता की भावना को मजबूत करने के लिए ऐसे कदम महत्वपूर्ण हैं, जिससे समाज में सभी धर्मों और संप्रदायों के बीच आपसी समझ और सम्मान बढ़ सके।