बाबा महाकाल के आंगन में होली का दहन, प्रशासन ने जारी की गाइडलाइंस

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष होली पर विशेष गाइडलाइंस जारी की गई हैं, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। जानिए इस साल की होली पर क्या होगा खास।

बाबा महाकाल के आंगन में होली का दहन, प्रशासन ने जारी की गाइडलाइंस
महाकाल के मंदिर में होली 2025

उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर में होली का त्योहार हर साल धूमधाम से मनाया जाता है, और इस बार भी यह उत्सव खास होने वाला है। बाबा महाकाल के आंगन में पहले होलिका दहन होगा, इसके बाद उत्सव की शुरुआत होगी। लेकिन इस बार कुछ महत्वपूर्ण बदलाव और गाइडलाइंस जारी की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पिछले वर्ष होली के दिन गर्भग्रह में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कठोर कदम उठाए हैं।

होलिका दहन से शुरू होगा होली का उत्सव

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को बाबा महाकाल के मंदिर में होलिका दहन किया जाएगा। यह एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का अवसर है। इस दिन मंदिर के पुजारी विधिपूर्वक होलिका का पूजन करेंगे और पूरे मंदिर परिसर में होली का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके बाद 14 मार्च को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर बाबा महाकाल की भस्म आरती होगी। इस दिन बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा, लेकिन इस बार गुलाल का उपयोग सीमित और प्राकृतिक उत्पादों से ही किया जाएगा।

पिछले वर्ष का हादसा और इस साल की गाइडलाइंस

पिछले वर्ष होली के दौरान महाकालेश्वर मंदिर के गर्भग्रह में आग लगने के कारण कई पुजारी झुलस गए थे, और एक की मौत भी हो गई थी। यह हादसा मंदिर में श्रद्धालुओं और पुजारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर गया। इसे ध्यान में रखते हुए इस वर्ष प्रशासन ने कुछ गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होगा।

श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के अध्यक्ष व कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अनुसार, इस साल भस्म आरती में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित कर दी जाएगी। इसके अलावा, गुलाल का उपयोग बहुत कम किया जाएगा और यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गुलाल प्राकृतिक उत्पादों से बने हों। यह गुलाल केवल श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के माध्यम से पुजारियों तक पहुंचेगा।

भस्म आरती में बदलाव और प्रवेश की गाइडलाइंस

इस साल होली के दौरान महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में कुछ बदलाव किए गए हैं। सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में श्रद्धालुओं का प्रवेश सीमित होगा, ताकि एक ओर सुरक्षा की दृष्टि से कोई जोखिम न हो, वहीं दूसरी ओर यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालु केवल प्राकृतिक गुलाल का ही उपयोग करें। मंदिर के कर्मचारी इस बात का ध्यान रखेंगे कि गुलाल का उपयोग कम से कम हो।

इसके अलावा, मंदिर प्रशासन ने इस वर्ष गुलाल का उपयोग खासकर हर्बल और प्राकृतिक उत्पादों तक ही सीमित रखने का निर्देश दिया है। यह कदम न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए है, बल्कि श्रद्धालुओं और पुजारियों की सेहत को भी ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

गर्मी के मौसम में महाकाल का ठंडे जल से स्नान

महाकालेश्वर मंदिर में यह परंपरा रही है कि चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रथमा तिथि से बाबा महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाता है। इस परंपरा का पालन किया जाएगा और 15 मार्च से बाबा महाकाल को ठंडे जल से स्नान करवाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही मंदिर में प्रतिदिन होने वाली आरतियों के समय में भी बदलाव होगा।

आरतियों के समय में बदलाव

महाकाल मंदिर में आरतियों का समय अब कुछ बदल जाएगा। अभी तक भस्म आरती सुबह 4 बजे होती थी, लेकिन अब उसका समय यथावत रहेगा। लेकिन उसके बाद होने वाली अन्य आरतियों के समय में बदलाव किया जाएगा।

  • बाल भोग आरती: अब यह सुबह 7:30 बजे के स्थान पर सुबह 7:00 बजे होगी।
  • भोग आरती: यह सुबह 10:30 बजे के स्थान पर अब सुबह 10:00 बजे होगी।
  • संध्या पूजन: संध्या पूजन का समय अब शाम 5:00 बजे होगा।
  • संध्या आरती: अब यह शाम 7:00 बजे होगी।
  • शयन आरती: शयन आरती का समय अब रात 10:30 बजे होगा।

होली और महाकाल की आरतियों का महत्व

महाकालेश्वर मंदिर में होली का उत्सव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समय बाबा महाकाल के दर्शन और आरतियों के लिए एक नया अध्याय खोलता है। हर साल होली के दिन बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाता है, और इस दिन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत ज्यादा होता है। श्रद्धालु इस अवसर पर बाबा महाकाल की कृपा प्राप्त करने के लिए मंदिर आते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।

प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था

उज्जैन पुलिस और मंदिर प्रशासन ने होली के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े कदम उठाए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंदिर में सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ा दी गई है और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी की जा रही है। इसके अलावा, प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि होली के दौरान कोई भी अप्रिय घटना न घटे, जिसके लिए विशेष सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

इस प्रकार, बाबा महाकाल के आंगन में होली का दहन इस बार न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर में होने वाली आरतियों के समय में बदलाव को लेकर भी यह विशेष रूप से चर्चा का विषय रहेगा।

उम्मीद है कि इस साल के होली उत्सव में श्रद्धालु बाबा महाकाल की आशीर्वाद प्राप्त करेंगे और प्रशासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस के पालन से उत्सव और भी शांतिपूर्ण रहेगा।

यह लेख आपको महाकालेश्वर मंदिर के होली उत्सव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है और सुनिश्चित करता है कि आप इस बार के आयोजन में पूरी जानकारी से जुड़ें।