बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व: बाघ के हमले से महिला की मौत, मानव-वन्यजीव संघर्ष फिर चर्चा में
मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ ने महुआ बीनने गई महिला पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ गुस्सा, जानें पूरी खबर।

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह बेहद दुखद है। महुआ बीनने गई एक महिला पर बाघ ने हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना न केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए दर्दनाक है, बल्कि यह बाघ और मानव के बीच बढ़ते संघर्ष को भी उजागर करती है। इस घटना ने इलाके में वन विभाग के खिलाफ लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं।
क्या हुआ उस सुबह?
यह दुखद घटना 2 अप्रैल 2025 की सुबह करीब 9 बजे की है। उमरिया जिले के ग्राम कोठिया की रहने वाली 27 वर्षीय रानी सिंह अपने पति प्रकाश सिंह के साथ रोज की तरह जीविकोपार्जन के लिए निकली थीं। वह घर से कुछ ही दूरी पर महुहार क्षेत्र में महुआ बीनने गई थीं। इसी दौरान बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में कक्ष क्रमांक आर एफ 438 में एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया। हमला इतना तेज और घातक था कि रानी की मौके पर ही मौत हो गई।
स्थानीय ग्रामीण अनुज पटेल ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। बीती रात भी एक बाघ उनके गांव में घुस आया था और एक बैल को मार डाला। सुबह जब रानी महुआ बीनने गईं, तब बाघ ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। इस घटना से गांव में डर और गुस्से का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग इस समस्या को रोकने में नाकाम रहा है।
वन विभाग का पक्ष
पनपथा रेंजर रंजन सिंह परिहार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच रही है। इंदवार पुलिस को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। उन्होंने कहा, "रानी सिंह सुबह महुआ बीनने के लिए कोर क्षेत्र में गई थीं, जहां बाघ ने उन पर हमला किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा और उसके बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा।"
रेंजर ने यह भी बताया कि शासन के नियमों के अनुसार मृतका के परिवार को 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने ऐसी घटनाओं में 25 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल 8 लाख रुपये ही दिए जाएंगे।
बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बाघों की बढ़ती संख्या के लिए जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ समय से यह इलाका मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की वजह से भी सुर्खियों में है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ अब जंगल से निकलकर गांवों तक पहुंच रहे हैं। इससे न केवल उनकी जान को खतरा बढ़ गया है, बल्कि उनकी आजीविका भी प्रभावित हो रही है। महुआ बीनना इस क्षेत्र के लोगों के लिए आय का एक प्रमुख स्रोत है, लेकिन अब यह काम जानलेवा साबित हो रहा है।
ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग पर इसलिए भी है, क्योंकि उन्हें लगता है कि जंगल और गांव की सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। एक ग्रामीण ने कहा, "हमारी जान की कीमत क्या यही 8 लाख रुपये हैं? हमें सुरक्षा चाहिए, मुआवजा नहीं।"
क्या है समाधान?
इस समस्या को हल करने के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि सघन पेट्रोलिंग और जागरूकता अभियान जरूरी हैं। वन विभाग को बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे कि कैमरा ट्रैप और ड्रोन। साथ ही, ग्रामीणों को उन क्षेत्रों में जाने से रोकने के लिए सख्त नियम और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए, जहां बाघों का मूवमेंट ज्यादा है।
इसके अलावा, ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक आजीविका के साधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि उन्हें जंगल पर निर्भरता कम करनी पड़े। यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं, तो ग्रामीणों और पार्क प्रबंधन के बीच तनाव और बढ़ सकता है, जो किसी बड़ी अप्रिय स्थिति को जन्म दे सकता है।
संतुलन की चुनौती
रानी सिंह की मौत एक दुखद घटना है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्रकृति और इंसान के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। बांधवगढ़ जैसे संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय लोगों की जान और आजीविका की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सरकार और वन विभाग को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।