उज्जैन: कलेक्टर और एसपी ने बुलेट पर तय किया 120 किमी, पंचक्रोशी यात्रा की तैयारियों का जायजा

उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने बुलेट पर 120 किमी का सफर तय कर पंचक्रोशी यात्रा की तैयारियों का निरीक्षण किया। जानें यात्रa का महत्व और प्रशासन के निर्देश।

उज्जैन: कलेक्टर और एसपी ने बुलेट पर तय किया 120 किमी, पंचक्रोशी यात्रा की तैयारियों का जायजा
उज्जैन कलेक्टर और एसपी ने बुलेट पर तय किया 120 किमी का सफर

उज्जैन में तपती गर्मी के बीच एक अनोखा नजारा देखने को मिला जब कलेक्टर नीरज कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा बुलेट पर सवार होकर पंचक्रोशी यात्रा मार्ग का निरीक्षण करने निकले। दोनों अधिकारियों ने लगभग 120 किलोमीटर का रास्ता बुलेट पर तय किया और आगामी पंचक्रोशी यात्रा की तैयारियों का जायजा लिया। आमतौर पर चार पहिया वाहनों में निरीक्षण करने वाले इन अधिकारियों को बुलेट पर देखकर लोग हैरान रह गए। यह यात्रा हर साल वैशाख मास में आयोजित होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु पैदल चलकर इस धार्मिक यात्रा को पूरा करते हैं। इस बार यात्रा 23 अप्रैल 2025 से शुरू होने वाली है, और इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

बुलेट पर निरीक्षण का अनोखा अंदाज

गर्मी की दोपहर में कलेक्टर नीरज कुमार सिंह बुलेट के पीछे बैठे, जबकि एसपी प्रदीप शर्मा ने बुलेट को दौड़ाया। दोनों अधिकारियों ने नागचंद्रेश्वर मंदिर से निरीक्षण शुरू किया और पिंगलेश्वर, शनि मंदिर त्रिवेणी, करोहन, नलवा पड़ाव होते हुए अंबोदिया बिलेश्वर धाम तक का सफर तय किया। उनके पीछे अन्य अधिकारियों का काफिला भी गाड़ियों में मौजूद था। इस दौरान अधिकारियों ने यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाओं को परखा ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। लोगों के लिए यह दृश्य बेहद चौंकाने वाला था, क्योंकि आमतौर पर बड़े अधिकारी गाड़ियों में ही निरीक्षण करते हैं।

पंचक्रोशी यात्रा: धार्मिक महत्व और तैयारियां

पंचक्रोशी यात्रा उज्जैन की एक प्रमुख धार्मिक परंपरा है, जो हर साल वैशाख मास में पांच दिनों तक चलती है। इस यात्रा में न सिर्फ उज्जैन बल्कि पूरे मध्य प्रदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। 120 किलोमीटर की यह यात्रा पैदल पूरी की जाती है, जिसमें श्रद्धालु हर पांच कोस (लगभग 20 किमी) पर विश्राम करते हैं। स्कंदपुराण के अनुसार, वैशाख मास में महाकाल वन में पांच दिन रहने से काशी में जीवनभर रहने जितना पुण्य मिलता है। बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के कारण यह यात्रा अब 120 किमी तक फैल गई है।

इस बार यात्रा की तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर और एसपी ने खुद मैदान में उतरकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए।

कलेक्टर के निर्देश: श्रद्धालुओं की सुविधा पहली प्राथमिकता

निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर पर डॉक्टरों की टीम तैनात करने, बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाने, छाया के लिए टेंट और रोशनी की व्यवस्था करने के आदेश दिए। इसके अलावा, हर पड़ाव पर दो-दो फायर ब्रिगेड की तैनाती का निर्देश भी दिया गया। पिंगलेश्वर पड़ाव पर पेयजल, अस्थाई शौचालय और मधुमक्खी के छत्तों को हटाने की व्यवस्था करने को कहा गया। त्रिवेणी शनि मंदिर पर रात में विश्राम के लिए टेंट, पेयजल और छांव की व्यवस्था के साथ ही करोहन पड़ाव पर टैंकर और बिजली की सुचारू व्यवस्था के लिए मध्य प्रदेश बिजली बोर्ड (एमपीईबी) को निर्देश दिए गए।

पिंगलेश्वर महादेव का पूजन

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर और एसपी पिंगलेश्वर पड़ाव पहुंचे, जहां उन्होंने कुछ देर रुककर पिंगलेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन भी किया। यह कदम न सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था को भी उजागर करता है।

क्यों खास है पंचक्रोशी यात्रा?

पंचक्रोशी यात्रा का उल्लेख स्कंदपुराण में मिलता है। यह यात्रा इसलिए पंचकोशी कहलाती है, क्योंकि श्रद्धालुओं को हर पांच कोस पर विश्राम करना पड़ता है। एक कोस को चार किलोमीटर माना जाता है, यानी रोजाना 20 किमी की पैदल यात्रा होती है। गर्मी के मौसम में होने वाली इस यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन हर साल विशेष इंतजाम करता है। इस बार कलेक्टर और एसपी का बुलेट पर निरीक्षण इसकी तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में एक अनोखा कदम है।

प्रशासन की अनोखी पहल

उज्जैन के कलेक्टर और एसपी का यह बुलेट सफर न सिर्फ प्रशासनिक सक्रियता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अधिकारी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं। 23 अप्रैल से शुरू होने वाली पंचक्रोशी यात्रा के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत न हो। यह अनोखा निरीक्षण निश्चित रूप से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा।