मध्य प्रदेश के गौरव: पत्रकार विष्णुकांत तिवारी को दूसरी बार मिला प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार

मध्य प्रदेश के रीवा के पत्रकार विष्णुकांत तिवारी ने झारखंड में डायन प्रथा पर रिपोर्टिंग के लिए दूसरा रामनाथ गोयनका पुरस्कार जीता। पिछले वर्ष बस्तर पर रिपोर्टिंग के लिए मिला था पहला पुरस्कार। जानें उनके संघर्ष और सफलता की कहानी।

मध्य प्रदेश के गौरव: पत्रकार विष्णुकांत तिवारी को दूसरी बार मिला प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार
पत्रकार विष्णुकांत तिवारी को रामनाथ गोयनका पुरस्कार

मध्य प्रदेश के रीवा के रहने वाले पत्रकार विष्णुकांत तिवारी ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड में महिलाओं को डायन कहकर हत्या किए जाने के मुद्दे पर उनकी श्रृंखलाबद्ध रिपोर्टिंग के लिए उन्हें प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित किया है। यह द क्विंट के लिए की गई उनकी त्रिखंडीय श्रृंखला की रिपोर्ट पर मिला है।

यह उनका लगातार दूसरा रामनाथ गोयनका पुरस्कार है, जिससे वे मध्य प्रदेश के पहले ऐसे पत्रकार बन गए हैं, जिन्हें इस सम्मान से दो बार नवाजा गया है। पिछले वर्ष उन्हें बस्तर में स्थानीय लोगों द्वारा सुरक्षा बलों का विरोध किए जाने के कारणों पर प्रकाशित श्रृंखला के लिए यह पुरस्कार मिला था।

ग्रामीण भारत की आवाज बने विष्णुकांत तिवारी

विष्णुकांत तिवारी, जिन्होंने अपनी पत्रकारिता से देश के सुदूर और हाशिए पर पड़े समुदायों की आवाज बनने का काम किया है, आज भारतीय पत्रकारिता जगत में एक प्रेरणास्रोत हैं। उनकी यात्रा बेहद रोचक रही है, जिसमें संघर्ष और सफलता दोनों का समावेश है।

सैनिक परिवार से पत्रकारिता तक का सफर

विष्णुकांत तिवारी का जन्म और पालन-पोषण एक सैनिक परिवार में हुआ। उनके पिता भारतीय सेना में सेवारत थे, जिसके कारण उनकी शिक्षा विभिन्न राज्यों में हुई। उन्होंने विशाखापट्टनम से दसवीं, रायपुर (छत्तीसगढ़) से बारहवीं और फिर भोपाल स्थित प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की।

अपनी शिक्षा के दौरान ही उन्होंने फ्रीलांस पत्रकारिता शुरू कर दी थी। द क्विंट, न्यूज़ क्लिक और TRT वर्ल्ड जैसे प्रतिष्ठित भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए लेखन कार्य किया। उनकी पत्रकारिता का फोकस हमेशा से ही ग्रामीण भारत और हाशिए पर पड़े समुदायों की समस्याओं पर रहा है।

बस्तर से झारखंड तक: सच्चाई की खोज

विष्णुकांत की पत्रकारिता यात्रा में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब द क्विंट ने उन्हें बस्तर से एक विशेष रिपोर्ट तैयार करने का अवसर दिया। उनका कार्य था बस्तर में स्थानीय आदिवासी समुदायों द्वारा सुरक्षा बलों का विरोध किए जाने के कारणों की पड़ताल करना। इस अत्यंत संवेदनशील और जटिल मुद्दे पर उनकी गहन शोध और संतुलित रिपोर्टिंग ने पाठकों को इस क्षेत्र की वास्तविकताओं से अवगत कराया। इसी रिपोर्ट के लिए उन्हें 2023-24 में पहली बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार मिला था।

इसके बाद उन्होंने झारखंड में महिलाओं को 'डायन' कहकर हत्या किए जाने के मुद्दे पर एक तीन भागों की श्रृंखला तैयार की। उनकी रिपोर्ट में इस सामाजिक कुरीति के पीछे छिपे कारणों, पीड़ित परिवारों की पीड़ा और न्याय की तलाश का मार्मिक चित्रण किया गया। इस अत्यंत महत्वपूर्ण काम के लिए उन्हें वर्ष 2024-25 में दूसरी बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रभावशाली करियर और वर्तमान भूमिका

विष्णुकांत तिवारी अपने करियर में विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने द क्विंट में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ब्यूरो की जिम्मेदारी संभाली, फिर विस्तार न्यूज़ में काम किया और वर्तमान में वे बीबीसी में सेंट्रल इंडिया के लिए रिपोर्टिंग करते हैं।

उनकी विशेषज्ञता आदिवासी मुद्दों, मानवाधिकार, ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में है। उनकी रिपोर्टिंग में हमेशा तथ्यात्मकता, संतुलन और मानवीय पहलू दिखाई देता है, जो उन्हें एक जिम्मेदार पत्रकार बनाता है।

पुरस्कार और स्वागत

जब विष्णुकांत तिवारी अपना दूसरा रामनाथ गोयनका पुरस्कार प्राप्त करने के बाद भोपाल एयरपोर्ट पर पहुंचे, तो उनके साथी पत्रकारों और शुभचिंतकों ने उनका भव्य स्वागत किया। मध्य प्रदेश के मीडिया जगत में उनकी इस उपलब्धि को राज्य के लिए गौरव का क्षण माना जा रहा है।

उनके सहकर्मी और कहते हैं, "विष्णुकांत ने साबित कर दिया है कि छोटे शहरों से आने वाले पत्रकार भी अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं। उनकी कहानियों में जो मानवीय संवेदना है, वह उन्हें अलग पहचान देती है।"

प्रेरणा और प्रभाव

विष्णुकांत तिवारी की सफलता युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। वे अक्सर अपने अनुभव पत्रकारिता के छात्रों के साथ साझा करते हैं और उन्हें ग्रामीण भारत की कहानियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

उनकी रिपोर्टिंग के प्रभाव स्पष्ट दिखाई देते हैं। झारखंड में डायन प्रथा पर उनकी रिपोर्टिंग के बाद, राज्य सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए। इसी प्रकार, बस्तर क्षेत्र पर उनकी रिपोर्टिंग ने वहां के सामाजिक-राजनीतिक संदर्भों को समझने में मदद की।

भविष्य की राह

दो बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार जीतने के बाद भी, विष्णुकांत तिवारी वहीं नहीं रुकना चाहते। वे अभी भी उन कहानियों की तलाश में हैं, जिन्हें सुनने की जरूरत है। उनका मानना है कि देश के विकास में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है और पत्रकारों का दायित्व है कि वे वंचित वर्गों के मुद्दों को उठाएं।

मध्य प्रदेश के इस होनहार पत्रकार के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर उनके मित्र और वरिष्ठ कहते हैं, "विष्णुकांत में असाधारण प्रतिभा है और वे निश्चित रूप से भारतीय पत्रकारिता में अपना एक विशिष्ट स्थान बनाएंगे।"

फैक्ट फाइंडिंग न्यू एज डिजिटल मीडिया भी विष्णुकांत तिवारी के उज्जवल भविष्य की कामना करता है और उम्मीद करता है कि वे आने वाले समय में भी ऐसे ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी कलम चलाते रहेंगे।

विष्णुकांत तिवारी की कहानी साबित करती है कि समर्पण, ईमानदारी और कड़ी मेहनत से कोई भी अपने सपनों को साकार कर सकता है। मध्य प्रदेश के इस गौरव ने यह साबित किया है कि भारतीय पत्रकारिता में गुणवत्ता और प्रतिबद्धता को सम्मान दिया जाता है।