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Kashmir Cold Wave: कश्मीर में कड़ाके की ठंड: 17 साल में सबसे कम तापमान, श्रीनगर में -3.1°C

जम्मू-कश्मीर में Kashmir Cold Wave का प्रकोप। नवंबर में 17 वर्षों का सबसे कम तापमान रिकॉर्ड। श्रीनगर में माइनस 3.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज।

Edited By: Sameer Mahajan
Updated at: Fri, 05 Dec 2025, 11:59 PM (IST)
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Source: PB SHABD
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में इन दिनों ठंड का सितम अपने चरम पर है। वादियों में इस बार ऐसी सर्दी पड़ रही है कि लोगों की हालत खराब हो गई है। Kashmir Cold Wave ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस साल नवंबर महीने में पिछले 17 वर्षों का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा मौसम विभाग ने जारी किया है, जो बता रहा है कि कश्मीर में ठंड कितनी भयंकर है।

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श्रीनगर में माइनस में पहुंचा पारा

राजधानी श्रीनगर में आज सुबह का न्यूनतम तापमान माइनस 3.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा सुनकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों को कितनी ठंड का सामना करना पड़ रहा होगा। तापमान में इस गिरावट के कारण मशहूर डल झील के ऊपर कोहरे की मोटी चादर छा गई है। सुबह के वक्त डल झील का नजारा देखने लायक है, लेकिन साथ ही ठंड भी कंपकंपा देने वाली है।

मौसम विभाग ने क्या कहा?

मौसम विभाग के मुताबिक Kashmir Cold Wave की वजह से कश्मीर घाटी के लगभग सभी इलाकों में रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से 1 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम चल रहा है। यह कोई छोटी-मोटी गिरावट नहीं है। जब तापमान इतना नीचे चला जाता है, तो रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है। लोगों को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह ठंड काफी परेशानी का सबब बनती है।

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जम्मू संभाग में भी ठंड का असर

सिर्फ कश्मीर घाटी ही नहीं, बल्कि जम्मू संभाग के कई इलाकों में भी औसत से कम तापमान दर्ज किया गया है। हालांकि जम्मू में ठंड उतनी भयंकर नहीं है जितनी कश्मीर में, लेकिन वहां भी सर्दी का अहसास लोगों को हो रहा है। पहाड़ी इलाकों में तो हालात और भी गंभीर हैं।

17 साल का रिकॉर्ड टूटा

इस साल नवंबर में Kashmir Cold Wave ने जो असर दिखाया है, वह पिछले 17 वर्षों में नहीं देखा गया था। मौसम विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2008 के बाद पहली बार नवंबर महीने में इतना कम तापमान दर्ज किया गया है। यह एक चिंताजनक संकेत भी है क्योंकि अभी तो दिसंबर और जनवरी बाकी हैं, जो कि साल के सबसे ठंडे महीने माने जाते हैं।

स्थानीय लोगों की परेशानी

कश्मीर के स्थानीय लोग इस भयंकर ठंड से जूझ रहे हैं। कई इलाकों में पानी की पाइपलाइनें जम गई हैं। सुबह के वक्त गाड़ियों के शीशों पर बर्फ की परत जम जाती है। लोगों को कपड़ों की कई परतें पहननी पड़ती हैं। बाजारों में गर्म कपड़ों की बिक्री तेजी से बढ़ गई है।

स्कूलों के समय में भी बदलाव किया गया है ताकि बच्चों को सुबह की कड़ाके की ठंड में स्कूल न जाना पड़े। कई जगहों पर अलाव जलाकर लोग ठंड से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं।

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पर्यटन पर असर

Kashmir Cold Wave का असर पर्यटन उद्योग पर भी पड़ रहा है। हालांकि कुछ पर्यटकों को यह मौसम पसंद आता है और वे बर्फबारी का आनंद लेने के लिए आते हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड की वजह से कई लोग अपनी यात्रा योजनाओं को स्थगित कर रहे हैं। गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों पर भी ठंड का प्रभाव साफ देखा जा रहा है।

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आने वाले दिनों का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक Kashmir Cold Wave का असर बना रहेगा। तापमान में कोई खास सुधार की उम्मीद नहीं है। दिसंबर के आते-आते हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे ठंड से बचाव के उपाय करें और खासकर बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें।

स्वास्थ्य विभाग ने भी अलर्ट जारी किया है। ठंड की वजह से सांस की बीमारियां और दिल के मरीजों को दिक्कत हो सकती है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे गर्म कपड़े पहनें, गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें और जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें।

कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में इस बार की सर्दी ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और Kashmir Cold Wave का असर अभी लंबे समय तक रहने वाला है।

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