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उत्तराखंड: आखिरकार पकड़ा गया खूंखार गुलदार, चंपावत के मंगोली गांव में लौटी शांति

उत्तराखंड के चंपावत जिले में 12 दिनों से दहशत फैलाने वाला गुलदार आखिरकार पकड़ा गया। जानिए कैसे वन विभाग ने इस नरभक्षी को पिंजरे में कैद किया और ग्रामीणों को मिली राहत।

Edited By: Sameer Mahajan
Updated at: Mon, 24 Nov 2025, 10:04 AM (IST)
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उत्तराखंड के चंपावत जिले के मंगोली गांव में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। पिछले 12 दिनों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बनाए रखने वाला खूंखार गुलदार आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में फंस गया। रविवार की सुबह करीब 5 बजे यह leopard captured uttarakhand वन विभाग की टीम के प्रयासों से संभव हो पाया।

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12 दिनों की दहशत का अंत

मंगोली गांव के लोग पिछले लगभग दो हफ्ते से डर के साये में जी रहे थे। इस नरभक्षी गुलदार के डर से गांव के बच्चों ने स्कूल जाना तक बंद कर दिया था। महिलाएं जो रोजाना चारा और पत्ती लाने के लिए जंगल जाती थीं, वे भी अपने घरों में कैद होकर रह गई थीं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह गुलदार सिर्फ मंगोली तक ही सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के कई गांवों में भी घूमता देखा गया था। इससे पूरे इलाके में खौफ का माहौल बन गया था। लोग शाम होते ही अपने घरों में दुबक जाते थे और सुबह भी बाहर निकलने से डरते थे।

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वन विभाग की मुहिम

स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों और मांग के बाद वन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया। लोहाघाट के रेंजर एन. डी. पांडेय के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।

वन विभाग ने इस leopard captured uttarakhand को पकड़ने के लिए पूरी रणनीति बनाई। घटनास्थल के आसपास चार अलग-अलग जगहों पर पिंजरे लगाए गए। साथ ही, गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक दर्जन से ज्यादा ट्रैप कैमरे भी जगह-जगह लगाए गए थे।

वन विभाग की टीम ने दिन-रात मेहनत की। लगातार गश्त लगाई गई और गुलदार के हर मूवमेंट पर नजर रखी गई। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और रविवार की सुबह यह खूंखार जानवर पिंजरे में फंस गया।

कैसे फंसा गुलदार?

रेंजर एन. डी. पांडेय ने बताया कि रविवार की सुबह तकरीबन 5 बजे यह गुलदार उस पिंजरे में फंस गया जो घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर लगाया गया था। पिंजरे में चारे के रूप में बकरी रखी गई थी जिसकी तरफ आकर्षित होकर यह जानवर अंदर चला गया।

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जैसे ही गुलदार पिंजरे में घुसा, दरवाजा बंद हो गया और वन विभाग की टीम को तुरंत सूचना दे दी गई। इस खबर से पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।

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ग्रामीणों की खुशी

मंगोली के ग्राम प्रधान रमेश राम ने इस सफल अभियान के लिए वन विभाग की पूरी टीम को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 दिनों से गांव के लोग दहशत में जी रहे थे। अब जाकर सभी को चैन की सांस मिली है।

ग्रामीणों ने बताया कि रेंजर पांडेय और उनकी टीम ने दिन-रात एक करके इस leopard captured uttarakhand अभियान को सफल बनाया। बच्चे अब फिर से स्कूल जा सकेंगे और महिलाएं भी बिना डर के अपने रोजमर्रा के काम कर सकेंगी।

आगे क्या होगा?

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब इस गुलदार की मेडिकल जांच की जाएगी। विशेषज्ञों की टीम यह देखेगी कि यह जानवर किसी बीमारी से ग्रस्त तो नहीं है। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

संभावना है कि इसे किसी रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा या फिर किसी सुरक्षित जंगल में छोड़ा जा सकता है जहां मानव बस्तियां नहीं हैं।

यह घटना एक बार फिर से इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के सिकुड़ने और मानव बस्तियों के विस्तार की वजह से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

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