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धुले में जात प्रमाणपत्र के नाम पर रिश्वतखोरी, 9 हजार लेते हुए ACB के जाल में फंसे दो कर्मचारी

धुले जिले में जात प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए 9 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ACB ने कार्रवाई की। प्रोजेक्ट सहायक इमरान अंसारी रंगे हाथ पकड़ा गया, दो कर्मचारियों पर केस दर्ज।

Updated at: Tue, 20 Jan 2026, 10:54 AM (IST)
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धुले जात प्रमाणपत्र रिश्वत मामला ACB कार्रवाई
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हाइलाइट्स
  • जात प्रमाणपत्र सत्यापन के बदले 9 हजार रुपये की रिश्वत लेते परियोजना सहायक को ACB ने रंगे हाथ पकड़ा।
  • ओबीसी जात प्रमाणपत्र के लिए जुलाई 2025 में किया गया आवेदन महीनों तक जानबूझकर अटकाया गया था।
  • शिकायत के बाद ACB ने सापळा कार्रवाई की, दो कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज।

महाराष्ट्र के धुले जिले में जात प्रमाणपत्र की जांच प्रक्रिया में चल रही रिश्वतखोरी का एक गंभीर मामला सामने आया है। जात प्रमाणपत्र दिलाने के बदले 9 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में जिला जात प्रमाणपत्र सत्यापन समिति कार्यालय के दो कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने सख्त कदम उठाते हुए परियोजना सहायक इमरान अंसारी को रंगे हाथों पकड़ लिया, जबकि कनिष्ठ लिपिक प्रमोद पाटिल के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

यह कार्रवाई उन आम लोगों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, जो महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद अपने काम पूरे नहीं करवा पाते।

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महीनों तक अटका रहा जात प्रमाणपत्र का काम

मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अपने साले के ओबीसी जात प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए 21 जुलाई 2025 को ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज भी समय पर जमा कर दिए गए थे। इसके बावजूद कई महीनों तक फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान परियोजना सहायक इमरान अंसारी ने काम करवाने के बदले 12 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। दबाव में आकर शिकायतकर्ता ने पहले ही 3 हजार रुपये फोनपे के जरिए दे दिए थे, लेकिन इसके बाद भी जात प्रमाणपत्र का काम नहीं किया गया।

काम नहीं हुआ तो ACB से की शिकायत

बार-बार दफ्तर जाने और अनुरोध करने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो आखिरकार शिकायतकर्ता ने 8 जनवरी 2026 को ACB धुले कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद ACB ने मामले की प्राथमिक जांच की, जिसमें रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई।

जांच के दौरान बातचीत में सौदेबाजी के बाद रिश्वत की रकम 9 हजार रुपये तय हुई। इसके बाद ACB ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया।

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रिश्वत लेते समय रंगे हाथों पकड़ा गया कर्मचारी

ACB की टीम ने तय योजना के अनुसार सापळा कार्रवाई की। जैसे ही परियोजना सहायक इमरान अंसारी ने शिकायतकर्ता से 9 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, उसी वक्त ACB की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

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इस मामले में इमरान अंसारी के साथ-साथ कनिष्ठ लिपिक प्रमोद पाटिल की भूमिका की भी जांच चल रही है। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आम लोगों के लिए बड़ी चेतावनी और राहत

इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि सरकारी दफ्तरों में रिश्वत मांगने वालों पर अब नजर रखी जा रही है। ACB अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी काम के बदले रिश्वत मांगता है तो नागरिक बिना डरे शिकायत करें। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।

धुले जिले में जात प्रमाणपत्र जैसे संवेदनशील दस्तावेजों को लेकर हो रही रिश्वतखोरी पहले भी चर्चा में रही है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि व्यवस्था में सुधार होगा।

जांच जारी, और खुलासों की संभावना

फिलहाल ACB इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस तरह के मामलों में और कर्मचारी शामिल हैं या नहीं। साथ ही पहले लिए गए 3 हजार रुपये की डिजिटल लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

यह मामला उन लोगों के लिए एक सीख है जो मजबूरी में रिश्वत देने को मजबूर हो जाते हैं। सही रास्ता यही है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई जाए।

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Anil Borade

महाराष्ट्र के धूलिया जिले से हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे ज़मीनी हकीकत को उजागर करने वाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं और सामाजिक मुद्दों, राजनीति व जनहित से जुड़े विषयों पर गहरी पकड़ रखते हैं। वर्तमान में वे प्रतिष्ठित नेशनल न्यूज़ चैनल भारत 24 में संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे Fact Finding के धूलिया जिला ब्यूरो के प्रमुख भी हैं, जहाँ से वे विश्वसनीय, तथ्यपरक और निष्पक्ष खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं।

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