महाराष्ट्र के धुळे जिले में शिरपूर तालुका स्थित अनेर डैम के महादेव आदिवासी आश्रम स्कूल में 46वें तालुका स्तरीय science exhibition dhule का भव्य आयोजन किया गया। दो दिवसीय इस विज्ञान महोत्सव में 185 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों का प्रदर्शन किया गया और करीब 500 छात्रों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक शिक्षा जरूरी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और धुळे जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. तुषार रंधे ने कहा कि विज्ञान सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए व्यावहारिक प्रयोग बेहद जरूरी हैं। स्कूलों में रोजमर्रा की गतिविधियों के जरिए छात्रों को विज्ञान की नई-नई खोजों से अवगत कराना चाहिए।”
IIT पवई के हाइड्रोजन रिसर्च का जिक्र
डॉ. रंधे ने science exhibition dhule में IIT पवई में चल रहे सौर ऊर्जा से हाइड्रोजन गैस बनाने के शोध का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा से बनने वाले हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल घरेलू और सामुदायिक स्तर पर खाना पकाने के लिए किया जा सकता है।
“आश्रम स्कूलों में बड़े पैमाने पर खाना बनाने में जो ईंधन खर्च होता है, वह काफी ज्यादा है। हाइड्रोजन आधारित खाना पकाने की व्यवस्था से यह खर्च काफी कम हो सकता है,” उन्होंने समझाया। डॉ. रंधे ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने पर हाइड्रोजन गैस एलपीजी जितना ही सुरक्षित है।
आदिवासी समाज को विज्ञान से जोड़ने का आह्वान
कार्यक्रम का उद्घाटन शिरपूर विधायक काशीराम पावरा ने किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान से काम आसान और तेज होते हैं। विधायक पावरा ने आदिवासी समाज से अपील करते हुए कहा, “अपनी परंपराओं को संजोते हुए हमें वैज्ञानिक सोच को अपनाना चाहिए। यही आधुनिक समय की जरूरत है।”
185 प्रयोगों में दिखी वैज्ञानिक प्रतिभा
इस science exhibition dhule में कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रयोग प्रस्तुत किए गए। इनमें टिकाऊ खेती, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक के विकल्प, हरित ऊर्जा, नई तकनीक, गणित के मजेदार मॉडल, स्वास्थ्य और स्वच्छता तथा जल संरक्षण जैसे विषय शामिल थे। तालुका की विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने अपनी रचनात्मकता और वैज्ञानिक समझ का शानदार प्रदर्शन किया।
शिक्षकों के लिए भी विशेष आयोजन
छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी शिक्षण सामग्री प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। यह पहल शिक्षकों को बेहतर शिक्षण तकनीक से परिचित कराने के उद्देश्य से की गई।
आयोजन का उद्देश्य
गट शिक्षा अधिकारी डॉ. नीता सोनवणे ने पत्रकारों से बातचीत में बताया, “खानदेश के आदिवासी और दुर्गम इलाकों के बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना और उन्हें स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक प्रयोग सीखने का मौका देना ही इस science exhibition dhule का मुख्य उद्देश्य है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता महादेव आदिवासी विकास मंडल के अध्यक्ष चंद्रसिंह रहमान वलवी ने की। इस मौके पर किसान विद्या प्रसारक संस्था की कोषाध्यक्ष आशाताई रंधे, सहायक परियोजना अधिकारी भटू आव्हाड सहित कई शैक्षणिक संगठनों के पदाधिकारी और प्रधानाचार्य मौजूद थे।
यह आयोजन आदिवासी क्षेत्रों में वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। ऐसे कार्यक्रम न केवल छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करते हैं बल्कि उन्हें भविष्य के लिए भी तैयार करते हैं।
















