महाराष्ट्र में इस समय एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई ने हलचल मचा दी है। Bogus Disabled Officers Suspended मामले में राज्य सरकार ने 316 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी का लाभ लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें नंदुरबार जिले के दो अधिकारी भी शामिल हैं।
बुधवार (4 तारीख) को यह फैसला सामने आया। जांच में सामने आया कि कई अधिकारी 40 प्रतिशत से कम दिव्यांग होने के बावजूद खुद को पात्र बताकर सरकारी सेवा में लाभ ले रहे थे। कुछ मामलों में प्रमाणपत्र ही संदिग्ध पाए गए।
कैसे खुला मामला?
इस पूरे मामले को विधानसभा में भाजपा विधायक ने उठाया था। उनके लिखित प्रश्न के जवाब में मंत्री ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे।
सरकार की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार 28 जिला परिषदों से कुल 10,922 दिव्यांग अधिकारियों और कर्मचारियों का रिकॉर्ड सामने आया। इनमें से 6,218 की जांच पूरी की जा चुकी है। जांच में 316 अधिकारियों के दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली। या तो उनके पास वैध प्रमाणपत्र नहीं था, या फिर वे 40 प्रतिशत से कम दिव्यांग थे।
मंत्री सावे ने साफ कहा कि ऐसे सभी 316 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
नंदुरबार में भी हलचल
इस कार्रवाई में नंदुरबार जिले के दो अधिकारियों का नाम शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा जिले के एक माध्यमिक शिक्षा अधिकारी की एसआईटी जांच भी चल रही है। इससे जिले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
अभी जांच जारी है
दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव के निर्देश पर यह व्यापक जांच शुरू की गई थी। अब भी करीब पांच हजार अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की जांच बाकी है।
सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद Bogus Disabled Officers Suspended की संख्या और बढ़ सकती है। फिलहाल कई अधिकारी ‘गैस पर’ यानी असमंजस की स्थिति में हैं।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, निलंबन के बाद अब बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। यानी जिन अधिकारियों पर फर्जी प्रमाणपत्र का आरोप साबित होगा, उन्हें सरकारी सेवा से हटाया जा सकता है।
साथ ही कानूनी कार्रवाई भी संभव है। दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार कानून 2016 के तहत अगर कोई व्यक्ति फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र का उपयोग करता है, तो उसे दो साल तक की सजा या एक लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ 316 अधिकारियों तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि इतने बड़े स्तर पर फर्जी प्रमाणपत्र कैसे बन गए और वर्षों तक किसी को भनक क्यों नहीं लगी?
राज्य में इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। आम जनता के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि असली हकदारों का अधिकार कहीं छीना तो नहीं गया?
सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पारदर्शिता के साथ आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि Bogus Disabled Officers Suspended मामला आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।












