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बुरहानपुर की महिलाएं बना रहीं केले के रेशे से इको-फ्रेंडली राखी, अब ऑनलाइन भी ऑर्डर करें

बुरहानपुर की महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे केले के रेशे से बने इको-फ्रेंडली राखी की ऑनलाइन बिक्री शुरू हो गई है। जानिए कैसे घर बैठे ऑर्डर करें और कैसे ये राखियां महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं।

Updated at: Wed, 06 Aug 2025, 11:31 PM (IST)
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हाइलाइट्स
  • बुरहानपुर की महिलाएं केले के रेशे से इको-फ्रेंडली राखियां बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
  • इन राखियों को ऑनलाइन ऑर्डर किया जा सकता है, जो हाथ से बनी और पर्यावरण के अनुकूल हैं।
  • “एक जिला एक उत्पाद” योजना और बनाना फेस्टिवल से इन देसी राखियों को देशभर में पहचान मिल रही है।

इको-फ्रेंडली राखी: अब बाजारों में सिर्फ रंग-बिरंगी राखियां ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को बचाने वाली देसी राखियां भी दस्तक दे चुकी हैं। ये खास राखियां मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की महिलाएं केले के रेशों से तैयार कर रही हैं। खास बात ये है कि अब ये राखियां ऑनलाइन भी ऑर्डर की जा सकती हैं और सीधे आपके घर तक डिलीवर होंगी।

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इन खूबसूरत राखियों को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं के स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किया जा रहा है। ये महिलाएं ‘केले के तने’ से रेशा निकालकर न सिर्फ राखी बना रही हैं, बल्कि इससे टोकरियां, झाड़ू, पेन स्टैंड, झूमर, पर्स, कंघी और कई हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट भी बना रही हैं।

पर्यावरण के लिए फायदेमंद, दिखने में शानदार

इन राखियों की सबसे खास बात यह है कि ये 100% इको-फ्रेंडली हैं। यानी इनमें कोई प्लास्टिक या हानिकारक सामग्री नहीं होती। पूरी तरह देसी, हाथों से बनी ये राखियां पारंपरिक त्योहार को एक नया और प्राकृतिक अंदाज देती हैं।

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परियोजना प्रबंधक श्रीमती संतमती खलखो बताती हैं कि इन राखियों में बहन का स्नेह तो है ही, साथ ही पर्यावरण के प्रति प्यार भी झलकता है। ये राखियां सिर्फ सजावटी चीज नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल हैं।

अब घर बैठे करें ऑर्डर

अगर आप भी इन इको-फ्रेंडली राखियों को खरीदना चाहते हैं तो बस इस लिंक पर क्लिक करें

ऑर्डर प्रक्रिया:
Add to Cart → Change Address → Proceed to Checkout → Billing Details → Place Order
या फिर संपर्क करें: 📞 91091-31531

जिला पंचायत में लगा स्टॉल

बुरहानपुर के जिला पंचायत कार्यालय में इन राखियों का स्टॉल भी लगाया गया है। कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने स्वयं इन राखियों का अवलोकन किया और महिलाओं के इस कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि ‘‘एक जिला एक उत्पाद’’ योजना के तहत जिले में केले को चयनित किया गया है, और अब इससे बने उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर प्रशासन जोर दे रहा है।

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महिलाओं के लिए रोज़गार का मौका

ग्राम एकझिरा की श्रीमती अनुसुइया और ग्राम डोंगरगांव की दीदियां इस काम में जुटी हैं। वो सिर्फ राखी ही नहीं बना रही, बल्कि खुद का व्यवसाय खड़ा कर रही हैं। इससे उन्हें सालाना ₹35,000 से ₹40,000 तक की कमाई हो रही है।

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हर राखी बनाने में करीब 20 से 30 मिनट का समय लगता है। डिजाइन और साइज के हिसाब से इनका दाम ₹30 से ₹50 तक रखा गया है।

बनाना फेस्टिवल से मिली पहचान

बुरहानपुर में आयोजित Banana Festival ने भी इन प्रोडक्ट्स को खूब पहचान दिलाई है। अब इन राखियों की मांग सिर्फ जिले में ही नहीं बल्कि पूरे देश में तेजी से बढ़ रही है।

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