मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है जो राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रही है। बुरहानपुर भाजपा जिलाध्यक्ष विवाद अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि पुलिस केस बन चुका है। भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज माने की पत्नी ने ग्राम पंचायत जैनाबाद की सरपंच, उसके पति महेंद्र इंगले, देवर और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ शिकारपुर थाने में गंभीर आरोपों के साथ FIR दर्ज कराई है।
जिलाध्यक्ष खुद इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं और इसे ‘घरेलू मामला’ बताकर टाल रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब मामला थाने तक पहुंच चुका है और गंभीर धाराओं में केस दर्ज हो चुका है, तो जिलाध्यक्ष क्यों चुप हैं? क्या पार्टी के भीतर का यह विवाद राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है?
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना शिकारपुर थाना क्षेत्र के जैनाबाद गांव में घटी है, जो भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज माने का गृह ग्राम है। मामला तब शुरू हुआ जब गांव में नया सीमेंट रोड बना था और भाजपा जिलाध्यक्ष के ड्राइवर ने ट्रैक्टर लेकर उसी रास्ते से जाने की कोशिश की।
तभी गांव की सरपंच के पति महेंद्र इंगले ने बीच रास्ते में ड्राइवर को रोक दिया। उनका कहना था कि यह रास्ता नया बना है और यहां से ट्रैक्टर नहीं ले जाया जा सकता। ड्राइवर ने जब यह स्पष्ट किया कि रास्ता बने काफी समय हो चुका है और लोग वहां से आ-जा भी रहे हैं, तो महेंद्र इंगले ने कथित तौर पर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया।
आरोप है कि सरपंच के पति ने ड्राइवर को गंदी-गंदी गालियां दीं और धमकी भरे अंदाज में पेश आए। यहीं से मामला तूल पकड़ने लगा।
जब परिवार पहुंचा तो हुई और बदतमीजी
जब भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज माने के परिवार के सदस्यों को इस घटना की जानकारी मिली, तो वे मौके पर पहुंचे। परिवार ने सरपंच के पति महेंद्र इंगले से विनम्रता से बात करने की कोशिश की और उनसे अनुरोध किया कि वे बदतमीजी न करें। आखिर ट्रैक्टर उनका ही था और रास्ता भी सार्वजनिक।
लेकिन इसके बाद भी महेंद्र इंगले नहीं माने। बल्कि उन्होंने कथित रूप से परिवार के सदस्यों के साथ भी अभद्रता की और उन्हें भी अपशब्द कहे। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान सरपंच और उनका पूरा परिवार भी मौके पर पहुंच गया, जिसमें उनके देवर भी शामिल थे।
आरोप है कि सरपंच, उसके पति महेंद्र इंगले, देवर और एक अन्य व्यक्ति ने मिलकर भाजपा जिलाध्यक्ष के परिवार को धमकाया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि उन्हें जान से मारने की धमकी तक दी गई।
FIR में क्या-क्या आरोप लगे?
इस पूरे प्रकरण के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज माने की पत्नी ने शिकारपुर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर ग्राम पंचायत जैनाबाद की सरपंच, उसके पति महेंद्र इंगले, देवर और एक अन्य आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 191(2), 296(अ), 115(2) और 351(3) के तहत केस दर्ज कर लिया है।
FIR में निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
- गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार – सरपंच के परिवार ने जिलाध्यक्ष के ड्राइवर और परिवार के सदस्यों के साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया
- जान से मारने की धमकी – परिवार को धमकी दी गई कि उन्हें जान से मार दिया जाएगा
- सार्वजनिक रास्ते पर रोक-टोक – नए सीमेंट रोड पर बिना किसी वैध कारण के ट्रैक्टर को रोका गया
- सामूहिक रूप से डराना-धमकाना – सरपंच का पूरा परिवार मिलकर धमकी देने के आरोप
पुलिस ने क्या कहा?
शिकारपुर थाना प्रभारी ने इस मामले पर बात करते हुए कहा, “एक ट्रैक्टर गांव की गली से गुजर रहा था, तभी सरपंच के पति महेंद्र इंगले ने ड्राइवर को रोका और उसके साथ गाली-गलौज की। जब जिलाध्यक्ष का परिवार वहां पहुंचा, क्योंकि ट्रैक्टर उनका था, तो उन्होंने सरपंच के पति से विनम्रता से बात करने की कोशिश की। लेकिन वह नहीं माने और परिवार के साथ भी अभद्रता की।”
उन्होंने आगे कहा, “इस दौरान सरपंच, उनका पति, देवर और एक अन्य व्यक्ति मौके पर थे। उन्होंने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। पीड़ित की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच जारी है और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”
क्या है दूसरा पक्ष?
इस घटना को लेकर एक दूसरा पक्ष भी सामने आया है। कुछ सूत्रों का कहना है कि भाजपा जिलाध्यक्ष की बेटी की गाड़ी का टायर पंचर हो गया था। उन्होंने अपने ड्राइवर को टायर ठीक करवाने के लिए भेजा। जब ड्राइवर पंचर बनवाकर वापस आ रहा था, तभी सरपंच के पति महेंद्र इंगले ने उसे रोका और कहा कि यहां से आना-जाना मना है।
इस बात पर घर से परिवार के सदस्य बाहर आए और सरपंच के परिवार से पूछा कि आखिर क्या समस्या है। इसके जवाब में सरपंच का पूरा परिवार वहां पहुंच गया और दोनों पक्षों के बीच तनातनी बढ़ गई। आरोप है कि इस दौरान भी परिवार को धमकाया गया और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।
राजनीतिक समीकरण और चुप्पी का सवाल
इस पूरे बुरहानपुर भाजपा जिलाध्यक्ष विवाद में सबसे अहम और चौंकाने वाला पहलू यह है कि दोनों ही पक्ष भाजपा से जुड़े हुए हैं। एक तरफ जिलाध्यक्ष मनोज माने हैं, तो दूसरी तरफ जैनाबाद की सरपंच और उनका परिवार भी भाजपा से ही है। यह एक अंदरूनी पार्टी विवाद है जो अब सार्वजनिक और कानूनी मामला बन चुका है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज माने इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से क्यों बच रहे हैं? उनका कहना है कि यह एक घरेलू मामला था जो अब निपट चुका है। लेकिन जब थाने में FIR दर्ज हो चुकी है, गंभीर धाराओं में केस चल रहा है, और स्थानीय स्तर पर इस घटना की व्यापक चर्चा हो रही है, तो यह कैसे ‘घरेलू मामला’ रह गया?
क्या पार्टी के भीतर की राजनीति की वजह से जिलाध्यक्ष चुप हैं? क्या वरिष्ठ नेतृत्व ने उन्हें चुप रहने को कहा है? या फिर वे खुद नहीं चाहते कि यह मामला और बढ़े? ये सवाल स्थानीय लोगों के मन में उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों पक्ष भाजपा से जुड़े हैं, इसलिए यह देखने वाली बात होगी कि पार्टी इस मामले को कैसे हैंडल करती है। कुछ ग्रामीणों का मानना है कि सरपंच के परिवार ने अपनी हद पार कर दी। एक ग्रामीण ने कहा, “सरपंच को लगता है कि वह गांव की मालकिन है और जो चाहे कर सकती है। लेकिन यह तरीका गलत है।”
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। एक अन्य निवासी ने बताया, “रास्ते को लेकर पहले भी छोटी-मोटी बहसें होती रही हैं, लेकिन इस बार मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस तक पहुंच गया। दोनों पक्ष भाजपा के हैं, तो पार्टी को बीच में आकर सुलझाना चाहिए था।”
जैनाबाद के कुछ बुजुर्गों ने कहा कि राजनीति में रहने वाले लोगों को अपने व्यवहार में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। “यह सब देखकर आम लोग क्या सीखेंगे? जो नेता हैं, वही एक-दूसरे से लड़ रहे हैं,” एक बुजुर्ग ने कहा।
पार्टी के लिए बड़ी चुनौती
यह मामला भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जब एक ही पार्टी के जिलाध्यक्ष के परिवार और सरपंच के परिवार के बीच इतना गंभीर टकराव हो, तो यह पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल खड़े करता है। जिलाध्यक्ष के परिवार के साथ हुई कथित बदसलूकी और जान से मारने की धमकी किसी भी राजनीतिक दल के लिए शर्मनाक स्थिति है।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले को जल्द सुलझाना पार्टी के हित में होगा। अगर यह मामला लंबा खिंचा तो यह पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, “बुरहानपुर में भाजपा की अच्छी पकड़ है, लेकिन अगर अंदरूनी कलह सामने आती रहेगी तो यह पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।”
BNS की किन धाराओं में हुआ केस?
पुलिस ने इस मामले में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 191(2), 296(अ), 115(2) और 351(3) के तहत केस दर्ज किया है। इन धाराओं का मतलब समझना जरूरी है:
- धारा 191(2) – दंगा या गैरकानूनी जमावड़ा से संबंधित धारा
- धारा 296(अ) – धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या जानबूझकर अपमान करने से संबंधित
- धारा 115(2) – स्वेच्छा से चोट पहुंचाना
- धारा 351(3) – आपराधिक धमकी और डराना-धमकाना
ये सभी गंभीर धाराएं हैं और इनमें सजा का प्रावधान है। पुलिस अब दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और साक्ष्य इकट्ठा कर रही है।
आगे क्या होगा?
अब देखना यह है कि पुलिस जांच किस दिशा में जाती है और क्या भाजपा का वरिष्ठ नेतृत्व इस मामले में हस्तक्षेप करता है। कुछ सूत्रों का कहना है कि पार्टी स्तर पर इस मामले को सुलझाने की कोशिश हो सकती है, लेकिन अब जब FIR दर्ज हो चुकी है तो कानूनी प्रक्रिया अपना रास्ता तय करेगी।
बुरहानपुर भाजपा जिलाध्यक्ष विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब एक ही पार्टी के दो धड़ों के बीच इतना तनाव हो, तो आम जनता से कैसी उम्मीदें रखी जा सकती हैं। स्थानीय नेतृत्व और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और सौहार्दपूर्ण समाधान निकालें।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह स्थानीय राजनीति में भाजपा की आंतरिक स्थिति को भी दर्शाता है। आने वाले दिनों में इस मामले का क्या रुख रहता है, यह तय करेगा कि पार्टी अपने अंदरूनी विवादों को कैसे संभालती है।















