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Tiger Poaching Umaria: करंट से बाघ की हत्या, BJP नेता के चौकीदार सहित 6 गिरफ्तार

उमरिया के चंदिया रेंज में करंट लगाकर बाघ T-185 की हत्या मामले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई। BJP नेता के चौकीदार समेत 6 शिकारी गिरफ्तार, कोर्ट ने दी 3 दिन की रिमांड। Tiger Poaching Umaria की पूरी खबर पढ़ें।

Updated at: Tue, 16 Dec 2025, 11:59 AM (IST)
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मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से निकला एक वयस्क बाघ T-185 करंट लगाकर मार दिया गया। इस tiger poaching umaria मामले में वन विभाग ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक भाजपा के बड़े नेता का चौकीदार भी शामिल है।

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कैसे हुई घटना की शुरुआत?

शनिवार की सुबह जब चंदिया रेंज के कक्ष क्रमांक RF-10 में कथली नदी के किनारे गश्त पर निकली वन विभाग की टीम को एक वयस्क बाघ का शव मिला, तो सबके होश उड़ गए। यह बाघ T-185 था, जो बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का जंगल छोड़कर सामान्य वन क्षेत्र में अपनी नई टेरिटरी बनाने निकला था। लेकिन किसी ने सोचा नहीं था कि यह सफर इतना खतरनाक साबित होगा।

शव मिलते ही वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। डॉग स्क्वाड को बुलाया गया और मौके पर तमाम सबूत जुटाए गए। जांच में यह बात सामने आई कि इस बाघ को जानबूझकर करंट लगाकर मारा गया था।

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वन विभाग की तेज कार्रवाई

सामान्य वन मंडल उमरिया के SDO वन कुलदीप त्रिपाठी ने इस मामले की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि डॉग स्क्वाड और अन्य सबूतों के आधार पर 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इन आरोपियों के पास से GI तार और खूंटी भी बरामद हुई है, जो साफ तौर पर बताती है कि बाघ को फंसाने के लिए करंट का जाल बिछाया गया था।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

इस tiger poaching umaria मामले में गिरफ्तार 6 आरोपियों में शामिल हैं:

  1. अशोक कुमार बैगा (पिता शिव चरण बैगा) – ग्राम बरबसपुर निवासी
  2. सोमलाल बैगा (पिता छोटे लाल बैगा) – ग्राम छोटी पाली
  3. लखुआ बैगा (पिता चरका बैगा) – ग्राम छोटी पाली
  4. लक्खू कोल (पिता डोमारी कोल) – चंदिया निवासी
  5. अंजनी यादव (पिता बाबू लाल यादव) – ग्राम छोटी पाली
  6. अच्छे लाल बैगा (पिता किशोरा बैगा) – ग्राम छोटी पाली

इन सभी में से एक आरोपी भाजपा के एक बड़े नेता का चौकीदार बताया जा रहा है, जिसने यह हैरान कर देने वाला अपराध किया। बाकी 5 आरोपी उसके साथी हैं।

कोर्ट ने दी 3 दिन की रिमांड

सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से वन विभाग ने विस्तृत जांच के लिए तीन दिन की रिमांड मांगी। कोर्ट ने रिमांड मंजूर कर ली है और अब वन विभाग की टीम इन सभी से गहन पूछताछ कर रही है।

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क्यों निकला था बाघ बांधवगढ़ से बाहर?

यह सवाल बेहद अहम है कि आखिर T-185 बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व को छोड़कर बाहर क्यों निकला? दरअसल, टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने से अक्सर युवा बाघ अपनी नई टेरिटरी तलाशने निकल पड़ते हैं। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन दुर्भाग्य से बाहर निकलते ही इन्हें कई खतरों का सामना करना पड़ता है।

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T-185 भी अपनी नई टेरिटरी बनाने सामान्य वन क्षेत्र में आया था, लेकिन वन्य जीवों के दुश्मनों ने उसे अपना शिकार बना लिया।

आगे क्या हो सकता है खुलासा?

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान आरोपियों से और भी कई अहम जानकारियां निकल सकती हैं। हो सकता है इस मामले में और लोग भी शामिल हों या फिर यह किसी बड़े गिरोह का हिस्सा हो।

जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि:

  • क्या यह शिकार पहले से योजनाबद्ध था?
  • बाघ के अंगों को बेचने की कोई साजिश थी या नहीं?
  • क्या और भी लोग इस अपराध में शामिल हैं?

वन्य जीव संरक्षण पर सवाल

यह घटना एक बार फिर से मध्य प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण पर सवाल खड़े करती है। जब एक बाघ अपनी सुरक्षित सीमा से बाहर निकलता है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होती है? ऐसे इलाकों में बाघों की निगरानी कैसे की जाए?

इस tiger poaching umaria केस से यह साफ हो जाता है कि वन्य जीवों के खिलाफ अपराध करने वाले अब भी सक्रिय हैं और उन्हें सख्त से सख्त सजा देने की जरूरत है।

अंतिम शब्द: T-185 की मौत से सीख

वन विभाग की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन इस घटना ने एक और बाघ की जान ले ली। T-185 की मौत न सिर्फ वन्य जीव संरक्षण के लिए झटका है, बल्कि यह दिखाता है कि हमें अभी भी बहुत लंबा रास्ता तय करना है।

उम्मीद है कि इस मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर व्यवस्था की जाएगी।

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Surendra Tripathi

सुरेंद्र त्रिपाठी, मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के निवासी, 1995 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने एमकॉम की डिग्री हासिल करने के बाद अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत दूरदर्शन से की। इसके बाद उन्होंने जैन न्यूज़, ईटीवी, ज़ी न्यूज़, और आज तक जैसी प्रमुख समाचार चैनलों में काम किया। वर्तमान में, वे हिन्दुस्थान समाचार, पीटीआई न्यूज एजेंसी और TV9 भारतवर्ष के साथ जुड़े हुए हैं। साथ ही, वे Fact Finding के साथ भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। सुरेंद्र त्रिपाठी को उनकी बेबाक लेखनी और खबरों को नए तरीके से पेश करने की अनोखी शैली के लिए पहचाना जाता है। उनकी पत्रकारिता में समाज की गहरी समझ और घटनाओं पर मजबूत पकड़ झलकती है, जो उन्हें पाठकों के बीच एक अलग पहचान दिलाती है।

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