मध्य प्रदेश: क्या आप सोच सकते हैं कि महज 30 दिनों में 28 गुमशुदा बच्चों को कैसे खोजा जा सकता है? बुरहानपुर पुलिस ने यह कर दिखाया है! Operation Muskaan के तहत चलाई गई इस मुहिम ने न सिर्फ 28 परिवारों में खुशियां लौटाईं, बल्कि पुलिसिंग का एक नया मॉडल भी पेश किया। जानिए कैसे हुआ यह कारनामा और क्यों यह अभियान इतिहास बन गया है।
एक मिशन, चार राज्य, 28 मासूम चेहरे
1 नवंबर से 30 नवंबर 2025 के बीच बुरहानपुर में एक खास मुहिम शुरू हुई – Operation Muskaan। पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने ठान लिया कि हर गुमशुदा बच्चे को उसके घर तक पहुंचाना है। और फिर शुरू हुआ एक्शन का सिलसिला जो कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र तक फैल गया।
नतीजा? 28 बच्चे बरामद – जिनमें 24 बालिकाएं और 4 बालक शामिल थे। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, 28 परिवारों की टूटी उम्मीदों को फिर से जोड़ने की कहानी है।
कैसे बना यह प्लान? जानिए अंदर की बात
Operation Muskaan कोई साधारण अभियान नहीं था। इसके पीछे था सुनियोजित रणनीति का जाल। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर इंदौर के पुलिस महानिरीक्षक अनुराग और निमाड़ रेंज के DIG श्री सिद्धार्थ बहुगुणा ने पूरी योजना तैयार की।
SP पाटीदार ने हर थाने को स्पष्ट टारगेट दिया – कोई बच्चा छूटना नहीं चाहिए। विशेष टीमें बनाई गईं जो सीमा पार जाकर भी बच्चों को खोजने के लिए तैयार थीं। और सबसे बड़ा हथियार था – साइबर तकनीक!
साइबर सेल ने खेला गेम चेंजर का रोल
यह अभियान साइबर सेल बुरहानपुर के बिना अधूरा था। आधुनिक तकनीक, डिजिटल फॉरेंसिक, CCTV फुटेज एनालिसिस और मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग – सबकुछ काम में लाया गया।
सोशल मीडिया पर मिले सुराग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और ऑनलाइन एक्टिविटी की जांच से पुलिस को वो लीड्स मिलीं जो पारंपरिक तरीके से मिलना नामुमकिन था। तकनीक और मेहनत का यह कॉम्बिनेशन ही इस सफलता का असली राज था।
देखिए थानेवार सक्सेस स्टोरी
Operation Muskaan में हर थाने ने अपना योगदान दिया:
- थाना शाहपुर: सबसे आगे – 8 बच्चे बरामद
- थाना खकनार: शानदार प्रदर्शन – 6 बच्चे मिले
- थाना लालबाग: 5 बच्चों को घर पहुंचाया
- थाना निंबोल: 5 मासूमों को बचाया
- थाना गणपति नाका: 2 बच्चे सुरक्षित
- थाना नेपानगर और शिकारपुर: 1-1 बच्चे बरामद
हर थाने की अपनी सक्सेस स्टोरी रही, लेकिन लक्ष्य एक था – बच्चों को उनके परिवार से मिलाना।
वो पल जब माता-पिता की आंखों में आए खुशी के आंसू
सोचिए उन माता-पिता की हालत, जिन्हें महीनों से अपने बच्चों का कोई पता नहीं था। रातों की नींद हराम, दिन भर की बेचैनी और हर पल का इंतजार। Operation Muskaan ने उन परिवारों को वो खुशी दी जो शायद वे कभी नहीं भूलेंगे।
पुलिस ने सिर्फ बच्चों को खोजा ही नहीं, बल्कि उनकी काउंसलिंग और पुनर्वास का भी ध्यान रखा। मनोवैज्ञानिकों की मदद से बच्चों को फिर से सामान्य जीवन के लिए तैयार किया जा रहा है।
यह केवल शुरुआत है – आगे भी जारी रहेगी मुहिम
SP देवेंद्र पाटीदार ने साफ कर दिया है कि Operation Muskaan एक बार का अभियान नहीं है। यह बच्चों की सुरक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता है जो हमेशा जारी रहेगी।
सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गुमशुदा बच्चों के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। साइबर सर्विलांस को और मजबूत किया जा रहा है।
जनता का भरोसा बना पुलिस की ताकत
इस अभियान ने समाज में पुलिस के प्रति विश्वास को नई ऊंचाई दी है। लोग अब मानने लगे हैं कि जब सिस्टम ईमानदारी से काम करे तो कुछ भी असंभव नहीं है।
Operation Muskaan की यह सफलता मध्य प्रदेश ही नहीं, पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गई है। यह साबित करता है कि तकनीक, समर्पण और सही लीडरशिप मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
क्या आप जानते हैं अपने इलाके में ऐसा कोई केस? तुरंत पुलिस को सूचित करें। हर बच्चे को सुरक्षित घर मिलना उसका हक है!















