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अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी के मऊ मकान को 3 दिन में गिराने का नोटिस

मध्य प्रदेश के मऊ कैंट बोर्ड ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी के मऊ स्थित चार मंजिली मकान पर अवैध निर्माण का नोटिस जारी किया है। तीन दिन की समय सीमा में निर्माण न हटाने पर बोर्ड बुलडोजर से कार्रवाई करेगा।

Edited By: Sameer Mahajan
Updated at: Fri, 21 Nov 2025, 10:17 AM (IST)
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मध्य प्रदेश के इंदौर-महो में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी की मुश्किलें एक नए मोड़ पर पहुंच गई हैं। मऊ (Mhow) कैंट बोर्ड ने उनके पैतृक चार मंजिला मकान पर अवैध निर्माण को लेकर मोटा नोटिस जारी कर दिया है। बोर्ड ने कहा है कि बिना अनुमति बने अतिरिक्त हिस्से को तीन दिनों के भीतर हटाया जाए, वरना वह खुद बुलडोजर से कार्रवाई करेगा और खर्चा मकान मालिकों से वसूल किया जाएगा।

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मकान की पुरानी कहानी

यह मकान मऊ के मुकेरी मोहल्ला में है और इसे स्थानीय लोग “मौलाना की इमारत” के नाम से जानते हैं। इसके इतिहास की जड़ें तीन दशकों से भी पुरानी हैं: कैंट बोर्ड के रिकॉर्ड में यह बताया गया है कि 1996 और 1997 में भी इस संपत्ति के अवैध हिस्सों को हटाने की मांग की जा चुकी थी।

बोर्ड के अभियंता एच.एस. कलोया ने बताया है कि पहले भी कई नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन उस समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।

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नया नोटिस और सख्ती

अब बोर्ड ने औपचारिक नोटिस चस्पा कर रखा है। उसमें साफ लिखा है कि अवैध हिस्सों को तीन दिनों के भीतर हटाना होगा। यदि मकान मालिक इस समय सीमा का पालन नहीं करते हैं, तो कैंट बोर्ड जेसीबी मशीन लगाकर खुद निर्माण हटाएगा। इसके साथ जो खर्च आएगा, वह संबंधित लोगों से वसूला जाएगा।

यह फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब जावेद सिद्दीकी और उनकी यूनिवर्सिटी पहले ही राष्ट्रीय जांच की नज़र में हैं। यूनिवर्सिटी का नाम हाल ही में दिल्ली के लाल किले के ब्लास्ट मामले से जुड़ा था, और जांच एजेंसियों की निगाहें वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं पर हैं।

लोकल पालीसी और समुदाय की प्रतिक्रिया

महो कैंट (Cantonment) का इलाका नियमों में बहुत सख्त माना जाता है। वहां बेसमेंट जैसी सुविधाएं बिना मंजूरी के बनाना वर्जित है।

स्थानीय लोगों में इस कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई लोग कहते हैं कि यह सिर्फ निर्माण का मामला नहीं है, बल्कि पूरी समय की लापरवाही का नतीजा है — जब पहले नोटिस दिए गए थे, तब कार्रवाई नहीं हुई। अब बोर्ड ने जो सख्ती दिखाई है, उसे लोग एक बड़े संदेश की तरह देख रहे हैं कि नियम-व्यवस्था के उल्लंघन पर अब माना नहीं जाएगा।

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समुदाय के एक निवासी ने याद किया है कि ये इमारत कभी बहुत प्रतिष्ठित हुआ करती थी। लेकिन वर्षों से यह कब्जा विवादों और कानूनी झंझटों में फँसी रही।

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जोड़ता हुआ राष्ट्रीय संदर्भ

यह कार्रवाई सिर्फ स्थानीय प्रशासन की निगरानी नहीं है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहले ही दिल्ली विस्फोट मामले में सुर्खियों में है, और उसके चेयरमैन के घर पर यह नोटिस राष्ट्रीय जांच एजेंसाओं के दबाव के बीच आया है।

इतने समय बाद जब मकान को गिराने की चेतावनी दी जा रही है, तो यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ नियमों का पालन कराने का मामला है या फिर आरोपों के बीच एक प्रभावी राजनीतिक और कानूनी संदेश भी है।

संभावित परिदृश्य आगे क्या हो सकता है

  • अगर मकान मालिक नोटिस में बताई गई अवधि के अंदर सुधार नहीं करते हैं, तो बोर्ड बुलडोजर से खुद कार्रवाई करेगा और खर्चा उनसे वसूलेगा।
  • दूसरी ओर, मकान मालिक स्वयं अवैध हिस्सों को हटाने की कोशिश कर सकते हैं, ताकि समस्या शांतिपूर्वक हल हो सके।
  • इस बीच, राष्ट्रीय एजेंसियों की जांच जारी है, और इस मकान की यह कानूनी लड़ाई यूनिवर्सिटी की व्यापक छानबीन की कहानी का भी हिस्सा बन सकती है।
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