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MP SIR duty death: नहीं मिल रही थी सैलरी फिर भी करना पड़ा काम, MP SIR दबाव में 7वीं मौत

MP SIR duty death: कटनी में रोजगार सहायक रूपेंद्र सिंह की मौत से सनसनी। 3 महीने से नहीं मिली सैलरी, काम का दबाव बना कारण। जानें पूरा मामला।

Updated at: Thu, 27 Nov 2025, 11:26 AM (IST)
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प्रदेश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। कटनी जिले में एक रोजगार सहायक ने अपनी जान दे दी। परिवार वालों का कहना है कि तीन महीने से सैलरी नहीं मिलने और लगातार बढ़ते काम के दबाव ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। यह MP SIR duty death का सातवां मामला बताया जा रहा है, जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।

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क्या है पूरा मामला?

कटनी जिले के ढीमरखेड़ा थाना इलाके में गोपालपुर पंचायत में रहने वाले रूपेंद्र सिंह घर के पीछे खेत में एक पेड़ से लटके हुए मिले। सुबह-सुबह जब गांव वालों ने यह मंजर देखा तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। खबर मिलते ही परिवार के लोग, गांववाले और उनके साथी काम करने वाले लोग मौके पर पहुंच गए।

रूपेंद्र गोपालपुर पंचायत में रोजगार सहायक की नौकरी करते थे। वो बूथ नंबर 275 में बीएलओ अनिल कुमार दहिया के साथ काम करते थे। घरवालों और उनके साथियों का कहना है कि काफी समय से उन्हें तनख्वाह नहीं मिल रही थी। ऊपर से SIR का काम इतना ज्यादा हो गया था कि वो दबाव में आ गए थे।

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परिजनों ने बताया कि पिछले कई दिनों से रूपेंद्र बहुत परेशान रहते थे। घर में भी किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे। लगता था जैसे कुछ गहरी चिंता में डूबे हों।

परिवार और कर्मचारियों की मांगें

इस दुखद घटना के बाद पंचायत के लोगों और रोजगार सहायक संघ के सदस्यों ने जिला पंचायत के CEO के जरिए सरकार को एक ज्ञापन दिया है। इसमें कई मांगें रखी गई हैं:

  • रूपेंद्र के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाए
  • परिवार में से किसी एक को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाए
  • कर्मचारियों पर बढ़ते काम के दबाव को कम किया जाए
  • समय पर वेतन देने की व्यवस्था की जाए

कर्मचारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते काम और सैलरी में देरी की वजह से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। सरकार को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। उनका दावा है कि पैसों की तंगी और सरकारी काम के बोझ ने रूपेंद्र को मानसिक तौर पर तोड़ दिया था।

MP SIR duty death: पहले हो चुकी हैं 6 मौतें

मध्य प्रदेश में यह पहली MP SIR duty death नहीं है। इससे पहले भी 6 बीएलओ और सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान दम तोड़ चुके हैं। आइए जानते हैं इन सभी मामलों के बारे में:

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शहडोल का मामला: सोहागपुर में बीएलओ मनीराम नापित मतदाता फॉर्म इकट्ठा करते वक्त अचानक बीमार पड़ गए और उनकी मौत हो गई।

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नर्मदापुरम में हादसा: पिपरिया में शिक्षक और बीएलओ सुजान सिंह रघुवंशी सर्वे से वापस लौट रहे थे तभी ट्रेन हादसे का शिकार हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।

मंडीदीप में अचानक मौत: ऑनलाइन मीटिंग खत्म होते ही बीएलओ रमाकांत पांडे बेहोश हो गए। अस्पताल ले जाने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

झाबुआ की दर्दनाक घटना: बीएलओ भुवन सिंह को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। इसके सदमे और तनाव में उन्हें हार्ट अटैक आया और मौत हो गई।

दमोह और बालाघाट: यहां भी दो बीएलओ लगातार भागदौड़ और दबाव में बीमार पड़े और इलाज के दौरान चल बसे।

राजधानी भोपाल में भी गंभीर हालात

राजधानी भोपाल में दो बीएलओ कीर्ति कौशल और मोहम्मद लईक को ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक आया। फिलहाल दोनों अस्पताल में भर्ती हैं। रीवा, भिंड समेत कई जिलों से हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मामले सामने आ रहे हैं।

कर्मचारियों का आरोप है कि बीमारी और थकान के बावजूद उनसे काम पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है। कई बार तो ऐसा होता है कि तबीयत खराब होने पर भी छुट्टी नहीं मिलती।

गांववालों ने क्या कहा?

गोपालपुर के लोगों का कहना है कि अगर समय पर रूपेंद्र को सैलरी मिल जाती और इतना काम का दबाव न होता तो शायद वो आज जिंदा होते। लोगों ने कहा कि प्रशासन को जमीनी स्तर पर काम करने वालों की दिक्कतों को गंभीरता से सुनना चाहिए।

कई बार ऐसा होता है कि कर्मचारियों को न तो पर्याप्त संसाधन मिलते हैं, न ही पर्याप्त स्टाफ। फिर भी उन्हें बहुत कम समय में ढेर सारा काम खत्म करने को कहा जाता है। यह सिस्टम बिल्कुल गलत है।

पुलिस ने क्या कहा?

कटनी के एएसपी ने बताया कि रूपेंद्र पिछले तीन दिनों से घर से गायब थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि उन्हें शराब पीने की आदत थी। पुलिस के पास अभी तक वेतन न मिलने या काम के ज्यादा बोझ की कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं है।

फिलहाल, पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है ताकि पता चल सके कि आखिर रूपेंद्र ने यह कदम क्यों उठाया। घटना के बाद इलाके में लोगों में प्रशासन के खिलाफ गुस्सा दिखाई दे रहा है।

SIR क्या है और क्यों बढ़ा है दबाव?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक खास अभियान है जो मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चलाया जाता है। इसमें हर घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटानी होती है, फॉर्म भरवाने होते हैं और पूरा डाटा ऑनलाइन अपलोड करना होता है।

इस काम में बीएलओ और रोजगार सहायकों को दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है। ऊपर से प्रशासनिक दबाव अलग। अगर काम समय पर पूरा न हो तो कार्रवाई का डर भी रहता है। ऐसे में कर्मचारी बहुत तनाव में आ जाते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार काम का दबाव, आर्थिक परेशानी और नौकरी जाने का डर किसी भी व्यक्ति को गंभीर अवसाद में ले जा सकता है। खासकर जब घर में परिवार की जिम्मेदारी हो और सैलरी ही न मिल रही हो तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही काम का बोझ भी उचित होना चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति इतने दबाव में न आए।

सिस्टम में क्या बदलाव जरूरी?

इन लगातार हो रही MP SIR duty death की घटनाओं से साफ है कि सिस्टम में कुछ गंभीर खामियां हैं। जरूरत है कुछ ठोस बदलावों की:

समय पर वेतन: सबसे पहली जरूरत है कि कर्मचारियों को समय पर पूरा वेतन मिले। तीन-तीन महीने तक सैलरी रोकना किसी भी तरह से सही नहीं है।

काम का उचित बंटवारा: एक व्यक्ति पर इतना काम न डाला जाए कि वो संभाल ही न पाए। जरूरत हो तो ज्यादा स्टाफ रखा जाए।

मानसिक स्वास्थ्य सपोर्ट: कर्मचारियों के लिए काउंसलिंग की सुविधा होनी चाहिए। अगर कोई तनाव में है तो उसे मदद मिल सके।

छुट्टी की सुविधा: बीमारी या इमरजेंसी में बिना डर के छुट्टी मिलनी चाहिए। हर वक्त नौकरी जाने का डर नहीं होना चाहिए।

आगे क्या?

अब पुलिस की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। वही बताएगी कि रूपेंद्र की मौत के पीछे असली वजह क्या थी। लेकिन यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर बढ़ता दबाव कितना खतरनाक होता जा रहा है।

परिवार और गांववाले प्रशासन से न्याय की मांग कर रहे हैं। उम्मीद है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएगी।

यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है। यह पूरे सिस्टम की खामी है जो सामने आई है। अगर अभी भी नहीं चेते तो न जाने कितने और परिवारों को यह दर्द झेलना पड़ेगा।

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