- MP पुलिस 1 अप्रैल 2026 से Drug Free India लक्ष्य पर 3 साल की कार्ययोजना लागू करेगी।
- मंदसौर, नीमच, रतलाम, भोपाल और इंदौर ड्रग्स हॉटस्पॉट जिलों पर सख्त नजर रहेगी।
- सप्लाई-डिमांड तोड़ने के लिए पुलिस और अन्य विभाग मिलकर संयुक्त कार्रवाई करेंगे।
Drug Free India: मध्य प्रदेश के भोपाल पुलिस मुख्यालय (PHQ) में पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक का मकसद प्रदेश में बढ़ते ड्रग्स के खतरे को खत्म करने के लिए 3 साल की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करना था। यह बैठक 9 जनवरी 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई APEX समिति की बैठक के निर्देशों के बाद बुलाई गई थी।
बैठक में DGP ने साफ कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस “नशे से दूरी है जरूरी” जैसे जागरूकता अभियान के जरिए पहले ही लोगों में जागरूकता फैला चुकी है। अब अगला कदम यह है कि ड्रग्स के सप्लाई और डिमांड दोनों को खत्म किया जाए और माफिया नेटवर्क को जड़ से उखाड़ा जाए।
DGP ने बैठक में यह भी बताया कि पिछले साल नवंबर 2025 में हुए DG-IG कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री ने भी ड्रग्स के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा, “हमने प्रदेश से नक्सलवाद को चार महीने पहले ही खत्म किया था। अब नारकोटिक्स ड्रग्स को भी उसी तरह चुनौती मानकर खत्म करना है।”
1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा 3 साल का मिशन
DGP कैलाश मकवाणा ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से अगले तीन वर्षों तक मध्य प्रदेश भी देश के साथ मिलकर ‘Drug Free India’ लक्ष्य की दिशा में काम करेगा। इसका उद्देश्य केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को तोड़ना और मांग घटाना है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुछ जिलों को हॉटस्पॉट मानकर वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। इनमें मंदसौर, नीमच, रतलाम, भोपाल, इंदौर जैसे जिले शामिल हैं, जहां ड्रग्स का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही अन्य जिलों में फैल रहे ड्रग्स नेटवर्क पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
माफिया नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति
बैठक में यह भी तय हुआ कि ड्रग्स माफिया को तोड़ने के लिए पुलिस-इंटेलिजेंस टीमों को सक्रिय किया जाएगा। DGP ने कहा कि ड्रग्स का कारोबार सिर्फ सप्लाई से नहीं, बल्कि मांग के कारण भी बढ़ता है। इसलिए यह योजना दो हिस्सों में काम करेगी:
✔ Supply Reduction (आपूर्ति कम करना)
- माफिया नेटवर्क की पहचान और उसे तोड़ना
- हॉटस्पॉट जिलों में बड़ी छापेमारी
- सप्लाई चैन को पकड़ने के लिए विशेष टीम
- केमिकल्स की जांच के लिए मजबूत सिस्टम
✔ Demand Reduction (मांग घटाना)
- युवाओं में जागरूकता अभियान
- स्कूल-कॉलेजों में नशे के दुष्प्रभाव की सख्त शिक्षा
- सामाजिक संस्थाओं और खेल विभाग के साथ मिलकर अभियान
✔ Harm Reduction (हानि कम करना)
- नशे की लत से पीड़ित लोगों को इलाज और पुनर्वास
- परिवारों को सपोर्ट सिस्टम
- हेल्पलाइन और सलाह केंद्र
✔ Coordination (समन्वय)
- पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल विभाग और सामाजिक संस्थाओं का मिलकर काम
- उद्योगों में उपयोग होने वाले केमिकल्स की निगरानी
- रसायनों का गलत उपयोग रोकना
शैक्षणिक संस्थानों पर सख्ती
बैठक में यह भी फैसला हुआ कि स्कूल और कॉलेजों के पास ड्रग्स की बिक्री पर सख्त रोक लगाई जाएगी। साथ ही युवा कल्याण विभाग और सामाजिक संस्थाओं की मदद से एक मजबूत रोडमैप तैयार किया जाएगा ताकि नशे की आदत से युवा दूर रहें।
इंडस्ट्री में केमिकल्स की भी होगी जांच
ड्रग्स बनाने में उपयोग होने वाले केमिकल्स की भी जांच का सिस्टम बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रसायनों का उपयोग केवल स्वीकृत उद्योगिक कार्यों के लिए हो और उनका गलत उपयोग न हो सके।
3 साल की योजना का मुख्य लक्ष्य
इस 3 वर्षीय कार्ययोजना का उद्देश्य साफ है:
- सप्लाई चेन को तोड़ना
- मांग घटाना
- ड्रग्स के मामलों में सजा दर बढ़ाना
एक नशामुक्त समाज बनाना
DGP ने कहा कि यह मिशन सिर्फ पुलिस का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। इसलिए सभी विभाग और समाज के लोग मिलकर इस पर काम करेंगे।
3 साल में ड्रग्स को जड़ से खत्म करने का संकल्प
मध्य प्रदेश पुलिस ने नशीले पदार्थों के खिलाफ एक मजबूत और व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली यह 3 साल की योजना Drug Free India के लक्ष्य को साकार करने के लिए एक बड़ा कदम है। अब देखना यह होगा कि हॉटस्पॉट जिलों में क्या सख्ती से कार्रवाई होती है और समाज में कितनी तेजी से जागरूकता फैलती है।














