विज्ञापन
---Advertisement---

IAS Santosh Verma Controversy: ब्राह्मण बेटी बयान पर 51000 इनाम, जानें मामला

IAS Santosh Verma Controversy: "ब्राह्मण बेटी दान में दे" बयान पर 51000 का इनाम घोषित। भोपाल में बवाल, मांगी बर्खास्तगी। जानें पूरा मामला।

Updated at: Sat, 06 Dec 2025, 12:06 AM (IST)
Follow Us:
---Advertisement---

मध्य प्रदेश में IAS अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है कि अब उनका मुंह काला करने पर 51,000 रुपये का इनाम घोषित हो चुका है। राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल ने यह इनाम देने का ऐलान किया है। IAS Santosh Verma Controversy ने पूरे प्रदेश में ऐसी आग लगा दी है कि ब्राह्मण समाज, सवर्ण संगठन, कर्मचारी यूनियनें और राजनीतिक दल सभी सड़कों पर उतर आए हैं। मांग एक ही है – संतोष वर्मा को तुरंत बर्खास्त किया जाए।

विज्ञापन

आखिर क्या बोल गए IAS संतोष वर्मा?

पूरा मामला 23 नवंबर रविवार का है जब भोपाल के अंबेडकर मैदान में AJJAKS (अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) का प्रांतीय अधिवेशन हो रहा था। कृषि विभाग में उप सचिव के पद पर तैनात IAS अधिकारी संतोष वर्मा इस संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बने थे।

पदभार संभालते हुए मंच से संतोष वर्मा ने आरक्षण का पक्ष लेते हुए एक ऐसा बयान दे दिया जो अब IAS Santosh Verma Controversy की सबसे बड़ी सुर्खी बन गया है। उन्होंने कहा, “जब तक ब्राह्मण अपनी बेटी दान में न दे, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।”

विज्ञापन

यह बयान वर्मा ने आरक्षण की पैरवी करते हुए दिया और इसमें ब्राह्मण समाज की बेटियों को घसीट लिया। बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विवाद की आग पूरे मध्य प्रदेश में फैल गई।

51,000 रुपये का इनाम, मुंह काला करने की चुनौती

IAS Santosh Verma Controversy के बाद राष्ट्रीय सनातन सेना ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए संतोष वर्मा का मुंह काला करने पर 51,000 रुपये का इनाम घोषित कर दिया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल ने कहा कि जो लोग बेटियों की मर्यादा से खिलवाड़ करें, उन्हें जनता के सामने शर्मिंदा होना चाहिए।

यह इनाम घोषणा दिखाती है कि समाज में कितना गुस्सा है। लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि एक IAS अधिकारी इस तरह का बयान दे सकता है।

अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने भी कड़ा रुख अपनाया और एमपी नगर थाने में ज्ञापन देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने कहा कि यह बयान सीधे-सीधे ब्राह्मण समाज का अपमान है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विज्ञापन

ब्राह्मण समाज और सवर्ण संगठनों का विरोध

IAS Santosh Verma Controversy को लेकर सिर्फ ब्राह्मण समाज ही नहीं, बल्कि कई सवर्ण संगठन भी मैदान में उतर आए हैं। सभी संगठनों ने एकजुट होकर संतोष वर्मा का मुंह काला करने और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

विज्ञापन

अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्र ने कहा, “यह बयान पूरी तरह से अभद्र, असंसदीय और अमर्यादित है। ऐसे व्यक्ति को IAS जैसे प्रतिष्ठित पद पर रहने का कोई हक नहीं है। ब्राह्मण समाज इस समय क्रोध में है और अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में आंदोलन होगा।”

संगठनों ने यह भी कहा कि बीजेपी सरकार जो ‘बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ’ का नारा देती है, लाड़ली लक्ष्मी और लाड़ली बहना जैसी योजनाएं चलाती है, उसी सरकार में एक IAS अधिकारी बेटियों के बारे में ऐसी अनर्गल टिप्पणी करे, यह शर्मनाक है।

कर्मचारी संगठनों ने उप मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन

सिर्फ सामाजिक संगठन ही नहीं, सरकारी कर्मचारी संगठन भी IAS Santosh Verma Controversy को लेकर भड़क गए हैं। मंगलवार को मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ, लिपिक संघ और कर्मचारी मंच के प्रतिनिधियों ने मंत्रालय में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा।

मंत्रालय संघ अध्यक्ष सुधीर नायक ने साफ शब्दों में चेतावनी दी, “यदि दो-तीन दिन के भीतर संतोष वर्मा के विरुद्ध शासन द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है तो आंदोलन के अगले चरण घोषित किए जाएंगे। हम और इंतजार नहीं करेंगे।”

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ऐसा अधिकारी जो समाज में विभेद पैदा करे और बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ करे, उसे सरकारी सेवा में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन है।

संतोष वर्मा ने दी सफाई, मांगी माफी

जब विवाद बढ़ता देखा और हर तरफ से आग बरसने लगी तो IAS Santosh Verma Controversy में फंसे संतोष वर्मा ने मीडिया के सामने सफाई देने की कोशिश की।

वर्मा ने कहा, “मेरे बयान को गलत रूप से प्रस्तुत किया गया है। अगर किसी व्यक्ति या वर्ग की भावना आहत हुई है तो मैं खेद व्यक्त करता हूं। मेरा 29 मिनट का भाषण था जिसका संदर्भ सामाजिक समरसता को लेकर था। लेकिन मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है।”

वर्मा का कहना है कि बैठक में चर्चा का विषय यह था कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए या धार्मिक आधार पर। इसी संदर्भ में उन्होंने “रोटी-बेटी” वाले व्यवहार की बात की थी।

लेकिन उनकी यह सफाई किसी को संतुष्ट नहीं कर पाई है। विरोधी संगठनों का कहना है कि वीडियो में बयान साफ सुनाई दे रहा है और 29 मिनट के भाषण में “ब्राह्मण अपनी बेटी दान में दे” कहने की क्या जरूरत थी?

विवादों का पुराना इतिहास खुला

दिलचस्प बात यह है कि IAS Santosh Verma Controversy कोई पहला विवाद नहीं है। राज्य प्रशासनिक सेवा से पदोन्नत होकर IAS कैडर पाने वाले संतोष वर्मा का विवादों से पुराना नाता रहा है।

सबसे बड़ा विवाद तब हुआ था जब पदोन्नति के लिए जज के फर्जी हस्ताक्षर करने का गंभीर आरोप लगा। इस मामले में संतोष वर्मा जेल भी जा चुके हैं। यह उनके करियर का सबसे काला अध्याय था।

इतना ही नहीं, करीब चार साल पहले इंदौर में एक महिला ने उन पर शादी के बाद धोखा देने का आरोप लगाकर FIR भी दर्ज कराई थी। यह मामला भी काफी चर्चा में रहा था।

अब इन पुराने विवादों की भी चर्चा फिर से शुरू हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि ऐसे विवादित रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को IAS जैसे प्रतिष्ठित पद पर कैसे रखा जा सकता है।

कांग्रेस ने भी साधा निशाना

विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। IAS Santosh Verma Controversy पर विधानसभा में उप नेता हेमंत कटारे, प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभागाध्यक्ष मुकेश नायक, संगीता शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया, “AJJAKS के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा ने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है। उन्होंने एक बड़े समुदाय का खुला अपमान किया है। ऐसे अधिकारी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”

कांग्रेस का सवाल है कि बीजेपी सरकार चुप क्यों बैठी है? जब बेटियों का सम्मान दांव पर है तो सरकार को तत्काल एक्शन लेना चाहिए।

भाजपा विधायक ने दिया हिंदू एकता का संदेश

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने IAS Santosh Verma Controversy पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सनातन और हिंदू एकता जिंदाबाद। कुछ जातिवादी लोग हिंदू एकता भंग करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन हिंदू एक था, एक है और हमेशा एक रहेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “सभी बेटियों का सम्मान है और सब सुरक्षित हैं। किसी की भी अपराधी मानसिकता नहीं चलेगी। हम ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं करेंगे जो समाज में फूट डालने की कोशिश करें।”

विधायक शर्मा ने साफ संकेत दिया कि भाजपा इस मामले को हल्के में नहीं ले रही और जल्द ही कार्रवाई हो सकती है।

भाजपा मंत्री ने कहा – घिनौना कृत्य

भाजपा के प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पाराशर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

उन्होंने लिखा, “बेटी किसी की भी हो, एक जैसी ही पूज्य है। जो भारतीय समाज बेटियों में देवी के दर्शन करता है, उस समाज का कोई उच्च अधिकारी ऐसे निकृष्ट विचार रखे, यह कृत्य घिनौना है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”

मंत्री पाराशर ने आगे कड़े शब्दों में लिखा, “अपने निकृष्ट सोच की तुष्टि के लिए बेटियों की मर्यादा को तार-तार करने वाला व्यक्ति भारतीय प्रशासनिक सेवा के लायक तो कतई नहीं है। इसे समाज से दंड मिलना चाहिए और कानून से भी।”

यह बयान साफ दिखाता है कि IAS Santosh Verma Controversy को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर भी नाराजगी है और कार्रवाई की जोरदार मांग उठ रही है।

सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन

कानूनी जानकारों का कहना है कि शासकीय सेवा के अधिकारी सेवा आचरण नियम से बंधे होते हैं। अखिल भारतीय सेवा के लिए बनाए गए आचरण नियम 1968 में साफ प्रविधान है कि ऐसा कोई भी कृत्य जो समाज में विभेद पैदा करता हो, मान्य नहीं है।

IAS Santosh Verma Controversy में दिया गया बयान स्पष्ट रूप से इन नियमों का उल्लंघन है। एक IAS अधिकारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज में सद्भाव बनाए, न कि विभाजन की खाई खोदे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान न सिर्फ एक समुदाय का अपमान है बल्कि बेटियों के सम्मान से भी खिलवाड़ है, जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

मुख्य सचिव के संज्ञान में आया मामला

सूत्रों के अनुसार, IAS Santosh Verma Controversy का मामला अब मुख्य सचिव अनुराग जैन के संज्ञान में लाया गया है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि संतोष वर्मा को जल्द ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “मामला बेहद गंभीर है और विस्तृत जांच चल रही है। सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन के मामले में कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है।”

हालांकि अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन संगठनों और राजनीतिक दलों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

क्या होगी अगली कार्रवाई?

विभिन्न संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे संतोष वर्मा को IAS कैडर से बर्खास्त करने से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। ब्राह्मण समाज ने दो-तीन दिन का अल्टीमेटम दे दिया है।

अगर इस समय सीमा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की पूरी तैयारी कर ली गई है। कर्मचारी संगठनों ने भी अपना पूरा समर्थन दिया है और कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे भी आंदोलन में शामिल होंगे।

राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। अब देखना यह होगा कि मध्य प्रदेश सरकार इस संवेदनशील मामले में क्या फैसला लेती है और कब तक लेती है।

आगे क्या होगा, सबकी नजरें सरकार पर

51,000 रुपये के इनाम से शुरू हुई IAS Santosh Verma Controversy की यह कहानी अब मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी सुर्खी बन चुकी है। ब्राह्मण समाज का गुस्सा, सवर्ण संगठनों का विरोध, कर्मचारी यूनियनों की चेतावनी, राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और अब प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना – सब कुछ दिखाता है कि यह मामला कितना गंभीर हो चुका है।

यह विवाद एक बार फिर साबित करता है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे अधिकारियों को अपने शब्दों का कितना ध्यान रखना चाहिए, खासकर जब बात जाति, धर्म और बेटियों के सम्मान की हो।

फिलहाल सभी की नजरें मध्य प्रदेश सरकार पर हैं। क्या संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी या मामला किसी तरह ठंडा पड़ जाएगा, यह आने वाले 48-72 घंटों में साफ हो जाएगा। एक बात तो तय है – यह विवाद इतनी जल्दी शांत होने वाला नहीं दिख रहा।

विज्ञापन

Sameer Mahajan

समीर महाजन, Fact Finding न्यू एज डिजिटल मीडिया के फाउंडर और संपादक हैं। उन्होंने प्रमुख समाचार चैनलों में संवाददाता के रूप में कार्य किया और वर्तमान में बड़े न्यूज़ नेटवर्क से जुड़े हैं। उनकी विशेषता राजनीति, अपराध, खेल, और सामाजिक मुद्दों में है। Fact Finding की स्थापना का उद्देश्य उन खबरों को उजागर करना है जो मुख्यधारा मीडिया में दब जाती हैं, ताकि सच्चाई और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

Join WhatsApp

Join Now

Join Arattai

Join Now

विज्ञापन