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कोटरी गेहूं खरीदी केंद्र अनियमितता: 51 किलो तुलाई के आरोप, उमरिया के किसान परेशान

उमरिया के कोटरी गेहूं खरीदी केंद्र पर किसानों ने 51 किलो तुलाई, जबरन काम और अधिकारियों के संरक्षण के गंभीर आरोप लगाए। जानिए पूरा मामला।

Updated at: Sat, 09 May 2026, 10:17 PM (IST)
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उमरिया जिला के मानपुर तहसील अंतर्गत आने वाले कोटरी गेहूं खरीदी केंद्र को लेकर किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि यहां नियमों के विपरीत 50 किलो की जगह 51 किलो और कई बार साढ़े 51 किलो तक गेहूं की तुलाई करवाई जाती है। उनका आरोप है कि तुलाई, बोरी में स्ट्रेंसिल, भराई और छल्ली लगाने तक का काम भी उनसे ही कराया जाता है, जबकि सरकार का दावा है कि खरीदी केंद्र पर यह सारी जिम्मेदारी समिति की होती है।

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किसानों का कहना है कि यह सब वर्षों से चल रहा है, लेकिन इस बार “किसान कल्याण वर्ष” के बीच हालात और ज्यादा परेशान करने वाले हो गए हैं। वे आरोप लगाते हैं कि शिकायत करने पर भी स्थिति नहीं बदलती, बल्कि पहले से सूचना पहुंच जाने के कारण जांच के समय सब कुछ सामान्य दिखाया जाता है।

प्रबंधक पर तानाशाही के आरोप

किसानों ने समिति प्रबंधक रजनीश दत्त तिवारी पर दबंगई के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि खरीदी केंद्र पर उनके “खास” लोगों की तैनाती रहती है, जिन्हें सर्वेयर जैसे काम दिए गए हैं। आरोप है कि बिना “संतुष्टि” के गेहूं पास नहीं किया जाता और पावती देने में भी टालमटोल होती है।

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किसानों के मुताबिक, यदि वे सवाल उठाते हैं तो उन्हें घंटों इंतजार कराया जाता है। कई किसान यह भी कहते हैं कि अतिरिक्त खर्च, मजदूरी और समय की बर्बादी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

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कोटरी गेहूं खरीदी केंद्र अनियमितता: 51 किलो तुलाई के आरोप, उमरिया के किसान परेशान 2

अधिकारियों पर संरक्षण के आरोप

किसानों ने प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी रोहित सिंह बघेल और प्रभारी एआरसीएस अभय सिंह पर भी संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब भी शिकायत की जाती है, जांच से पहले खरीदी केंद्र को सूचना मिल जाती है। इसके बाद केंद्र पर ऐसे किसानों को खड़ा कर दिया जाता है जो सब कुछ सही बताते हैं।

किसानों के अनुसार, हाल ही में शिकायत के बाद प्रमोद कुमार सेन गुप्ता (एडीएम) और हरनीत कौर कलसी (एसडीएम) मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक स्थिति “मैनेज” हो चुकी थी। अधिकारियों ने सामान्य हिदायत देकर लौटने की बात कही, जबकि किसानों का दावा है कि वास्तविक स्थिति अलग थी।

पहले भी लगे थे अनियमितता के आरोप

किसानों ने बताया कि धान खरीदी के समय भी अनियमितताओं की शिकायत हुई थी। आरोप है कि जनवरी में अवैध धान पकड़े जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि जब इस बारे में पूछा गया तो जवाब मिला कि फाइल कलेक्टर के पास है और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।

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हालांकि, किसानों का सवाल है कि यदि मौके पर गड़बड़ी पकड़ी गई थी तो एफआईआर क्यों नहीं हुई। इस पर कथित तौर पर यह कहा गया कि पुलिस जल्दी एफआईआर दर्ज नहीं करती।

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करोड़ों के घोटाले की चर्चा, जांच ठंडी

किसानों के बीच यह चर्चा भी है कि दिसंबर 2024 में जिला सहकारी बैंक द्वारा एक करोड़ रुपए से अधिक की अनियमितताओं की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद जांच टीम भी बनी, लेकिन किसानों का आरोप है कि जांच टीम को रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

किसानों का कहना है कि यदि खरीदी, भंडारण और समिति के नाम पर खरीदी गई सामग्री की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई बातें सामने आ सकती हैं। वे यह भी आरोप लगाते हैं कि खाद वितरण में भी गड़बड़ी होती है और सामग्री का उपयोग समिति के बजाय निजी काम में होता है।

“हर काम किसान करे, परची बाद में मिले”

किसानों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि गेहूं लाने के बाद उन्हें खुद बोरी में भराई, स्ट्रेंसिल, तुलाई और छल्ली लगवाने तक का काम करना पड़ता है। इसके बाद घंटों इंतजार के बाद परची मिलती है। कई किसानों ने दावा किया कि उनसे 50 किलो से लेकर एक क्विंटल तक गेहूं अलग से लिया जाता है, तभी पावती दी जाती है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन बड़ी संख्या में किसानों की एक जैसी शिकायतें सवाल जरूर खड़े करती हैं।

“शिकायत करें तो किराया भी हमारा, सुनवाई भी नहीं”

गांव से जिला मुख्यालय तक शिकायत करने जाना किसानों के लिए आसान नहीं है। किराया, समय और मजदूरी का नुकसान अलग। ऐसे में किसान कहते हैं कि वे मन मारकर सब सह लेते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि “ऊपर तक सब मिले हुए हैं” और उनकी सुनवाई नहीं होगी।

जनता की कलेक्टर से मांग

क्षेत्र के लोगों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि खाद्य, सहकारिता और वेयरहाउस विभाग को बिना सूचना दिए आकस्मिक जांच करवाई जाए। उनका कहना है कि यदि अचानक जांच होगी तो सच्चाई सामने आ सकती है।

किसान कल्याण वर्ष पर सवाल

प्रदेश सरकार ने इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। लेकिन किसानों का कहना है कि जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट हैं। यदि आरोप सही हैं तो यह सीधे-सीधे सरकारी मंशा पर पानी फेरने जैसा है।

किसान चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदारी तय हो और व्यवस्था ऐसी बने कि उन्हें सम्मान के साथ अपनी उपज बेचने का मौका मिले, न कि अपमान और परेशानी के साथ।

निष्पक्ष जांच ही निकाल सकती है सच

इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि आरोप गंभीर हैं और सीधे किसानों से जुड़े हैं। ऐसे में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच ही सच सामने ला सकती है। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो किसानों का भरोसा लौटेगा, और यदि गड़बड़ी है तो कार्रवाई से व्यवस्था सुधरेगी।

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Surendra Tripathi

सुरेंद्र त्रिपाठी, मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के निवासी, 1995 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने एमकॉम की डिग्री हासिल करने के बाद अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत दूरदर्शन से की। इसके बाद उन्होंने जैन न्यूज़, ईटीवी, ज़ी न्यूज़, और आज तक जैसी प्रमुख समाचार चैनलों में काम किया। वर्तमान में, वे हिन्दुस्थान समाचार, पीटीआई न्यूज एजेंसी और TV9 भारतवर्ष के साथ जुड़े हुए हैं। साथ ही, वे Fact Finding के साथ भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। सुरेंद्र त्रिपाठी को उनकी बेबाक लेखनी और खबरों को नए तरीके से पेश करने की अनोखी शैली के लिए पहचाना जाता है। उनकी पत्रकारिता में समाज की गहरी समझ और घटनाओं पर मजबूत पकड़ झलकती है, जो उन्हें पाठकों के बीच एक अलग पहचान दिलाती है।

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