मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जो सोशल मीडिया पर खुद को समाज सुधारक बताने वालों की असलियत उजागर कर रहा है। यूट्यूबर संजय दुबे, RTI एक्टिविस्ट डॉ. आनंद दीक्षित उर्फ सूर्यकांत दीक्षित और राकेश सईवाल पर ब्लैकमेलिंग और रंगदारी वसूलने का एक और गंभीर आरोप लगा है। Burhanpur Extortion Case में पुलिस ने तीनों के खिलाफ एक्सटॉर्शन, संगठित अपराध और SC-ST एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है।
कैसे शुरू हुआ यह पूरा मामला?
निंबोला थाना क्षेत्र के हसनपुरा गांव में रहने वाले सुरेश नाम के एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मामला उनकी खेती की जमीन से जुड़ा है – खसरा नंबर 67/2/1, जो करीब 0.87 हेक्टेयर की है। सुरेश ने बताया कि उनके पिता की मौत के बाद यह जमीन उनकी मां और भाई के नाम पर आई थी। बाद में परिवार ने इस जमीन को सिरसौदा निवासी सुधीर पाटिल को बेचने का फैसला लिया।
बस यहीं से कहानी का अंधेरा पहलू शुरू होता है। जैसे ही जमीन की डील-सौदे की बात चली, तीनों आरोपियों को इसकी भनक लग गई। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी जुटाई, फोटो और वीडियो बनाए, और फिर शुरू हो गया धमकियों का सिलसिला।
एक साल तक चली मानसिक प्रताड़ना
Burhanpur Extortion Case की शिकायत के अनुसार, सुरेश को करीब एक साल तक लगातार परेशान किया गया। आरोपियों ने शुरुआत में पांच लाख रुपये की मांग रखी। डर और समाज में बदनामी के भय से घबराए सुरेश ने पहले 50 हजार रुपये नकद दे दिए। लेकिन जैसा कि अक्सर ब्लैकमेलिंग के मामलों में होता है, एक बार पैसा मिलने के बाद आरोपियों की मांग और बढ़ गई।
जब सुरेश ने और पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, तो धमकियों का नया दौर शुरू हुआ। आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं दिए तो फोटो और वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा और झूठे केस में फंसा दिया जाएगा। आखिरकार तंग आकर सुरेश को निंबोला थाने में शिकायत करनी पड़ी।
जातिगत अपमान का भी आरोप
Burhanpur Extortion Case में सबसे गंभीर बात यह है कि शिकायत में यह भी दर्ज है कि पैसे की मांग करते समय आरोपियों ने सुरेश के साथ जातिगत शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उनका अपमान भी किया। इसी वजह से पुलिस ने मामले में SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी हैं, जो प्रकरण को और भी गंभीर बना देती हैं।
यह पहला मामला नहीं है
चौंकाने वाली बात यह है कि यह इन तीनों आरोपियों के खिलाफ पहला मामला नहीं है। करीब 25 दिन पहले ही शाहपुर थाना पुलिस ने इन्हीं लोगों के खिलाफ एक और रंगदारी का केस दर्ज किया था। उस मामले में भी जमीन खरीदार सुधीर पटेल से 10 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसमें से ढाई लाख रुपये वसूले भी जा चुके हैं।
दोनों मामलों में एक बात कॉमन है – तरीका बिल्कुल एक जैसा। जमीन की जानकारी जुटाना, फोटो-वीडियो बनाना, फिर डर दिखाकर पैसे की वसूली करना।
सोशल वर्कर का मुखौटा
जांच में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। कलेक्टर कोर्ट ने पट्टे की जमीन की बिक्री को शून्य करार देने का फैसला दिया था। इस फैसले के बाद आरोपी आनंद दीक्षित और राकेश सईवाल खुद कलेक्टर ऑफिस पहुंचे और जनसुनवाई में जिला पंचायत के CEO को तुलसी का पौधा देकर खुद को सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पेश किया।
सवाल यह है कि क्या यह सब सिस्टम सुधारने का नाटक था या फिर अपनी छवि बनाने की कोशिश? Burhanpur Extortion Case की जांच से यह साफ होता जा रहा है कि असलियत कुछ और ही थी।
तीनों आरोपी फरार
फिलहाल तीनों आरोपी – यूट्यूबर संजय दुबे, डॉ. आनंद दीक्षित उर्फ सूर्यकांत दीक्षित और राकेश सईवाल करीब एक महीने से फरार चल रहे हैं। शाहपुर थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा के अनुसार पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन अब तक इनका कोई पता नहीं चला है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, डॉ. आनंद दीक्षित और संजय दुबे के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) या जिलाबदर की कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि इन आरोपियों के खिलाफ पहले से ही जिला अस्पताल घोटाला, ब्लैकमेलिंग, रंगदारी और धमकी जैसे कई मामले दर्ज हैं।
पुलिस की तैयारी
निंबोला थाना प्रभारी राहुल कांबले ने बताया कि Burhanpur Extortion Case में आरोपियों के खिलाफ एक्सटॉर्शन, संगठित अपराध और SC-ST एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के लिए खास टीमें बनाई गई हैं जो लगातार काम कर रही हैं।
पुलिस अब इन सभी पुराने मामलों को आधार बनाकर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। अधिकारियों का मानना है कि यह महज दो-तीन लोगों का खेल नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क हो सकता है।
सोशल मीडिया पर सवाल
Burhanpur Extortion Case ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जो लोग सोशल मीडिया पर खुद को सिस्टम का रखवाला, RTI एक्टिविस्ट और जनता का हितैषी बताते हैं, क्या उनकी असलियत कुछ और हो सकती है? क्या यूट्यूब और सोशल मीडिया की लोकप्रियता का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जा रहा है?
यह मामला यह भी बताता है कि किस तरह जमीन-जायदाद के सौदों में कमजोर लोगों को निशाना बनाया जाता है। फोटो और वीडियो का डर दिखाकर, सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर लोगों से पैसे वसूले जा रहे हैं।
आगे क्या होगा?
अब देखना यह है कि पुलिस जल्द से जल्द इन आरोपियों को गिरफ्तार कर पाती है या नहीं। और क्या जांच में यह पता चल पाएगा कि यह सिर्फ तीन लोगों का काम था या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
Burhanpur Extortion Case सिर्फ एक स्थानीय अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह सोशल मीडिया और एक्टिविज्म के नाम पर कुछ लोग अपराध की दुनिया चला रहे हैं। जनता को भी सावधान रहने की जरूरत है और ऐसे लोगों की असलियत समझने की जरूरत है जो सिर्फ अपने फायदे के लिए लोगों की मुसीबतों का फायदा उठाते हैं।
बुरहानपुर पुलिस की अगली कार्रवाई का इंतजार है, जो तय करेगी कि क्या इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा या नहीं।















