भोपाल/बुरहानपुर/नर्मदापुरम। सरकारी नौकरी में पद बदलने से पुराने पाप धुल नहीं जाते। इसका जीता-जागता उदाहरण स्वास्थ्य विभाग में देखने को मिला है। वर्तमान में बुरहानपुर जिला अस्पताल में सिविल सर्जन (Civil Surgeon) की कुर्सी संभाल रहे डॉ. प्रदीप मोडेस की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। मध्य प्रदेश शासन ने उनके खिलाफ कोर्ट में भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
यह पूरा मामला तब का है जब डॉ. मोडेस नर्मदापुरम (होशंगाबाद) में सीएमएचओ (CMHO) थे। CMHO Bribe Case में काफी समय से लंबी चली जांच और कागजी कार्यवाही के बाद अब सरकार ने ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाते हुए अभियोजन (Prosecution) की स्वीकृति जारी कर दी है।
अभी कहां हैं डॉ. प्रदीप मोडेस?
सबसे पहले यह जान लीजिए कि जिस अधिकारी पर कार्रवाई हुई है, वे अभी कहां हैं। आदेश के मुताबिक, डॉ. प्रदीप मोडेस वर्तमान में बुरहानपुर जिले में सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ हैं। हालांकि, जिस मामले में उन पर केस चलेगा, वह उनकी पिछली पोस्टिंग यानी नर्मदापुरम के कार्यकाल का है। उनके साथ ही तत्कालीन संविदा लेखा प्रबंधक सुश्री भावना चौहान पर भी केस चलेगा।
फ्लैशबैक: क्या था 2022 का वह रिश्वत कांड?
साल 2022 में नर्मदापुरम के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में एक बड़ा हड़कंप मचा था। दरअसल, इसी ऑफिस में सहायक ग्रेड-3 के पद पर काम करने वाले मदनमोहन वर्मा ने अपने कुछ बिलों के भुगतान के लिए फाइल बढ़ाई थी।
आरोप है कि तत्कालीन सीएमएचओ (अब बुरहानपुर सिविल सर्जन) डॉ. प्रदीप मोडेस और लेखा प्रबंधक भावना चौहान ने बिल पास करने के बदले ‘कमीशन’ यानी रिश्वत की मांग की। सौदा तय हुआ और तारीख मुकर्रर हुई 2 मई 2022।
लोकायुक्त/विशेष पुलिस स्थापना की टीम ने जाल बिछाया। तय योजना के मुताबिक:
- डॉ. प्रदीप मोडेस के लिए: 2,000 रुपये
- लेखा प्रबंधक भावना चौहान के लिए: 3,000 रुपये
जैसे ही यह राशि डॉ. मोडेस की टेबल की दराज में और भावना चौहान की टेबल पर रखी गई, टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया था।
जांच रिपोर्ट: साजिश और पद का दुरुपयोग
विशेष पुलिस स्थापना (Special Police Establishment) ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह केवल एक गलती नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी। पुलिस ने अपनी जांच में मूल दस्तावेज, सर्विस रिकॉर्ड और बातचीत की हिंदी ट्रांसक्रिप्शन रिपोर्ट पेश की। जांच में पाया गया कि दोनों अधिकारियों ने आपस में मिल-भगत (Criminal Conspiracy) कर अवैध कमाई के लिए पद का दुरुपयोग किया।
इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य स्तरीय समिति ने 10 नवंबर 2025 को हुई बैठक में डॉ. मोडेस के खिलाफ कोर्ट में केस चलाने की सिफारिश की थी।
सरकार का आदेश: अब कोर्ट में होगा फैसला
अक्सर देखा जाता है कि रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद भी विभागीय अनुमति (Sanction) के पेंच में मामले लटक जाते हैं। लेकिन इस Narmadapuram CMHO Bribe Case में सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
15 दिसंबर 2025 को लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अवर सचिव सीमा इधरिया द्वारा जारी आदेश (क्रमांक: 4173/0904/2025) में स्पष्ट कहा गया है कि डॉ. प्रदीप मोडेस (वर्तमान सिविल सर्जन, बुरहानपुर) और भावना चौहान के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 12, 13(1) बी, 13(2) और आईपीसी की धारा 120-बी के तहत न्यायालय में मुकदमा चलाया जाए।
क्या असर होगा?
बुरहानपुर में एक जिम्मेदार पद (सिविल सर्जन) पर रहते हुए डॉ. मोडेस पर अभियोजन की स्वीकृति मिलना विभाग में चर्चा का विषय बन गया है। अब पुलिस कोर्ट में चालान पेश करेगी और न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगी। यह कार्रवाई संदेश देती है कि पोस्टिंग बदल जाने या शहर बदल लेने से भ्रष्टाचार के आरोप खत्म नहीं होते। कानून का हाथ लंबा होता है और वह देर-सवेर गिरेबान तक पहुंच ही जाता है।
बुरहानपुर और नर्मदापुरम के स्वास्थ्य विभाग में इस आदेश के बाद खलबली मची है। यह मामला न केवल भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक सबक है, बल्कि यह भी बताता है कि यदि मदनमोहन वर्मा जैसे कर्मचारी हिम्मत दिखाएं, तो सिस्टम की सफाई संभव है।















