मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में हाकिमी अस्पताल का मामला अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है। जिस जगह मरीजों की जान बचाई जानी चाहिए, वहीं एक परिवार अपनी बहू को खो बैठा। अब चौहान परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गया है और न्याय की गुहार लगा रहा है। इस burhanpur hakimi hospital case में अब पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स के नाम भी सामने आ रहे हैं, जिन पर ब्लैकमेलिंग और पैसों की वसूली के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
चौहान परिवार का आरोप है कि हाकिमी अस्पताल की डॉक्टर रेहना बोहरा ने उनकी बहू का ऑपरेशन गलत तरीके से किया। परिवार के मुताबिक, डॉक्टर को ऑपरेशन की सही समझ ही नहीं थी और उन्होंने कुछ और करना था, लेकिन कर कुछ और दिया। नतीजा यह हुआ कि परिवार की बहू की जान चली गई।
परिवार का कहना है कि इतना ही नहीं, अपनी गलती को छुपाने के लिए डॉक्टर ने तरह-तरह के हथकंडे भी अपनाए। चौहान परिवार ने इस मामले में सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जांच कहां तक पहुंची, इसकी भी कोई जानकारी नहीं मिल रही है।
परिवार की मांगें
निराश और हताश चौहान परिवार ने अब भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनकी मुख्य मांगें हैं:
पहली बात, डॉक्टर रेहना बोहरा के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरी बात, हाकिम अस्पताल को बंद किया जाना चाहिए। परिवार का कहना है कि जहां डॉक्टर को धरती पर भगवान का रूप माना जाता है, वहीं इस डॉक्टर ने एक मासूम की जान ले ली।
अब पत्रकारों पर ब्लैकमेलिंग का आरोप
इस burhanpur hakimi hospital case में अब एक नया मोड़ आया है। RTI एक्टिविस्ट और प्रेस क्लब अध्यक्ष आनंद दीक्षित और यूट्यूब पत्रकार संजय दुबे के नाम इस मामले में सामने आ रहे हैं।
आरोप है कि आनंद दीक्षित हाकिमी अस्पताल की डॉक्टर रेहना बोहरा को बचाने की कोशिश में लगे हैं। वहीं उनके साथी यूट्यूब पत्रकार संजय दुबे पर चौहान परिवार से खबरों के बदले पैसे मांगने का आरोप लगा है। कहा जा रहा है कि उन्होंने परिवार से 10 लाख रुपए की मांग की थी।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट्स
इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो रही हैं। इन पोस्ट्स में एक खास बात बार-बार आ रही है – “40 किलो का बॉयफ्रेंड”। यह इशारा किस तरफ है, आप खुद समझ सकते हैं।
फिलहाल इन दोनों के खिलाफ शाहपुर थाने में ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज हो चुका है। पुलिस के मुताबिक, आनंद दीक्षित और संजय दुबे अभी फरार चल रहे हैं और पुलिस उन्हें ढूंढने में जुटी है।
केला ग्रुप के व्यवसायी की शिकायत
इस burhanpur hakimi hospital case से जुड़ा एक और मामला भी सामने आया है। केला ग्रुप के एक व्यवसायी ने भी आनंद दीक्षित और संजय दुबे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
व्यवसायी का आरोप है कि ये दोनों उनसे जमीन खरीदी के मामले में 10 लाख रुपए की मांग कर रहे थे। वह पहले ही ढाई लाख रुपए दे चुके हैं। जब मामला बढ़ गया तो उन्होंने शाहपुर थाने में केस दर्ज कराया।
दिलचस्प बात यह है कि यह मामला भी तब सामने आया जब हाकिमी अस्पताल के विवाद ने तूल पकड़ा। इसलिए इन दोनों मामलों को आपस में जोड़कर देखा जा रहा है।
कई लोगों ने की शिकायत
हाकिमी अस्पताल के मामले के बाद कई और लोगों ने भी आनंद दीक्षित और संजय दुबे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं। अलग-अलग विभागों में उनके नाम से कई शिकायतें पहुंची हैं।
जनसंपर्क विभाग का जवाब
जब हमने इस पूरे मामले पर जनसंपर्क विभाग से बात की, तो उन्होंने बताया कि इससे पहले भी इस तरह के मामलों में उन्होंने मध्य प्रदेश शासन से मान्यता रद्द करने की अनुशंसा की है।
विभाग ने कहा कि अगर आगे भी कलेक्टर या SP से निर्देश आए तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
यूनाइटेड प्रेस ऑर्गेनाइजेशन की राय
यूनाइटेड प्रेस ऑर्गेनाइजेशन के प्रदेश अध्यक्ष रिजवान अंसारी ने इस मामले पर संतुलित राय रखी। उन्होंने कहा कि जब तक न्यायालय किसी को अपराधी घोषित नहीं कर देता, तब तक कुछ भी कहना सही नहीं होगा। फिलहाल मामला कोर्ट में है और उसी का फैसला मान्य होगा।
बुरहानपुर प्रेस क्लब की कार्रवाई
बुरहानपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष दुर्गेश शर्मा ने बताया कि पहले भी इस तरह के मामलों में उन्होंने साधारण सभा बुलाकर संबंधित सदस्यों को हटाया है।
शर्मा ने कहा कि अभी उनके पास सदस्यता के लिए कई आवेदन पेंडिंग हैं, लेकिन वे नए सदस्य नहीं जोड़ रहे हैं। उनका साफ कहना है कि अगर कोई पत्रकार किसी को ब्लैकमेल करता है या पैसों की वसूली करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
पत्रकारिता की साख पर सवाल
यह burhanpur hakimi hospital case पत्रकारिता की साख पर भी सवाल खड़े कर रहा है। जिन लोगों को समाज में न्याय दिलाने का काम करना चाहिए, अगर वही लोग ब्लैकमेलिंग और वसूली में लग जाएं तो यह चिंता की बात है।
पत्रकारिता एक जिम्मेदारी है, पेशा है, और सबसे बड़ी बात – जनता का विश्वास है। जब इस विश्वास का दुरुपयोग होता है, तो पूरे पत्रकार समुदाय की छवि खराब होती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल चौहान परिवार की भूख हड़ताल जारी है। वे तब तक अपना धरना नहीं उठाएंगे जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता। परिवार चाहता है कि डॉक्टर रेहना बोहरा के खिलाफ सख्त एक्शन हो और हाकिम अस्पताल बंद किया जाए।
दूसरी तरफ, पुलिस आनंद दीक्षित और संजय दुबे को ढूंढने में लगी है। ब्लैकमेलिंग के आरोपों की जांच चल रही है। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो इन दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। लोग मेडिकल नेगलिजेंस के साथ-साथ पत्रकारों द्वारा की जा रही कथित वसूली पर भी चिंता जता रहे हैं।
न्याय की उम्मीद में एक परिवार
बुरहानपुर का यह burhanpur hakimi hospital case कई सवाल खड़े करता है। एक तरफ मेडिकल नेगलिजेंस का मामला है, तो दूसरी तरफ पत्रकारों द्वारा कथित ब्लैकमेलिंग का मुद्दा। दोनों ही मामले गंभीर हैं और दोनों में ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
चौहान परिवार को न्याय मिलना चाहिए। अगर सच में मेडिकल नेगलिजेंस हुई है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, अगर पत्रकारों ने वसूली की है तो उनके खिलाफ भी सख्त एक्शन लेना जरूरी है।
यह मामला अभी कोर्ट में है और सच्चाई जल्द ही सामने आएगी। फिलहाल सभी की नजरें इस केस पर टिकी हैं कि आगे क्या होता है।















