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Mamleshwar Mahadev: सालों बाद खुले प्राचीन शिव मंदिर, अब रोज होगी पूजा-अर्चना

Mamleshwar Mahadev मंदिर के शिखर क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिव मंदिरों के ताले आखिरकार खुल गए हैं। खंडवा कलेक्टर ने सफाई कर पूजा-अर्चना शुरू कराई। अब हर दिन भक्तों को मिलेगा दर्शन का अवसर।

Updated at: Mon, 17 Nov 2025, 11:09 PM (IST)
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Mamleshwar Mahadev मंदिर: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर से एक सुखद खबर सामने आई है। यहां ममलेश्वर महादेव मंदिर के शिखर क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिव मंदिरों को सालों बाद फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। सोमवार से इन मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हो गई है।

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काफी समय से ये मंदिर बंद पड़े थे और भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से उन पर ताले जड़े गए थे। लेकिन अब खंडवा कलेक्टर ऋषव कुमार गुप्ता के निर्देश पर इन मंदिरों को खुलवाया गया और उनकी पूरी साफ-सफाई कराई गई।

पांडव काल से जुड़ी मान्यता

शिव पुराण के अनुसार, ममलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में पांडव काल के पांच मंदिर मौजूद हैं। कहा जाता है कि इन मंदिरों का उल्लेख स्वयं शिव पुराण में मिलता है। साल 1997 में ओंकारेश्वर बांध के निर्माण के दौरान “24 अवतार मंदिर” की मूर्तियों को यहां से हटाकर वृद्ध कालेश्वर महादेव और उसके आसपास के मंदिरों में स्थापित किया गया था।

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इन मंदिरों का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व इतना गहरा है कि स्थानीय लोग इन्हें “आस्था का केंद्र” मानते हैं। कई श्रद्धालु बताते हैं कि जब ये मंदिर बंद थे, तब भी लोग इनके दर्शन की आस में दूर से प्रणाम करते थे।

सालों से बंद थे मंदिर, अब हटे ताले और बैरिकेडिंग

जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से भारतीय पुरातत्व विभाग ने इन मंदिरों को बंद कर दिया था। वहीं, कोविड-19 महामारी के दौरान पूरे परिसर को बैरिकेडिंग से घेर दिया गया था ताकि लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण रखा जा सके। लेकिन अब वह दौर खत्म हो चुका है।

खंडवा प्रशासन ने मंदिर परिसर से बैरिकेडिंग हटवा दी है और अब श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर सकेंगे। प्रशासन का कहना है कि Mamleshwar Mahadev Temple की यह ऐतिहासिक पहचान अब पहले से अधिक भव्य रूप में दिखाई देगी।

बेहतर व्यवस्थाओं की दिशा में काम जारी

कलेक्टर ऋषव कुमार गुप्ता ने बताया कि ममलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई नई व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मंदिर के आसपास की साफ-सफाई के साथ ही यात्री प्रतीक्षालय बनाया जा रहा है, जिसमें बैठने की व्यवस्था, टीन शेड और सीलिंग फैन लगाए जा रहे हैं।

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साथ ही मंदिर परिसर में स्थित अन्य छोटे मंदिरों में भी पूजा-अर्चना शुरू करने की तैयारी चल रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को एक साफ-सुथरा, सुलभ और आस्था से भरा वातावरण मिल सके।

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‘हर हर महादेव’ की गूंज से गूंज उठा ओंकारेश्वर

सालों से बंद पड़े इन मंदिरों के खुलने से पूरे ओंकारेश्वर में खुशी का माहौल है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में ममलेश्वर महादेव मंदिर पहुंच रहे हैं। कई भक्तों का कहना है कि यह कदम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहरों को संजोने की दिशा में भी बड़ा प्रयास है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के ठीक सामने नर्मदा तट पर स्थित है और इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान प्राप्त है। अब जब Mamleshwar Mahadev Temple के प्राचीन शिवालय फिर से खुल गए हैं, तो यह तीर्थनगरी एक बार फिर भक्तिभाव से सराबोर हो गई है।

आस्था का पुनर्जागरण

ओंकारेश्वर के ममलेश्वर महादेव मंदिर में बंद पड़े शिव मंदिरों का दोबारा खुलना सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि श्रद्धा और परंपरा का पुनर्जागरण है। आने वाले दिनों में यह जगह श्रद्धालुओं के लिए और भी आकर्षण का केंद्र बनेगी।

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