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मध्य प्रदेश: विरोदा में दशा माता और नवनाथ बाबा का 10 दिवसीय धार्मिक आयोजन संपन्न

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के विरोदा गांव में 10 दिन तक दशा माता और नवनाथ बाबा की पूजा अर्चना हुई। दसवें दिन निकली सवारी और विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Updated at: Sat, 02 Aug 2025, 7:26 PM (IST)
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हाइलाइट्स
  • विरोदा गांव में 10 दिन तक दशा माता और नवनाथ बाबा की भक्ति में डूबा रहा माहौल।
  • दसवें दिन निकाली गई नवनाथ बाबा की भव्य सवारी, भक्तों का उमड़ा जनसैलाब।
  • विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद, रात में होगा दशा माता का विसर्जन।

(मनोज गवांदे)मध्य प्रदेश: बुरहानपुर जिले के ग्राम विरोदा में अमावस्या से शुरू हुआ दशा माता और नवनाथ बाबा का 10 दिवसीय धार्मिक आयोजन अब संपन्न हो गया। इस पूरे कार्यक्रम में भक्ति, आस्था और परंपरा की एक खूबसूरत झलक देखने को मिली। आज आयोजन के दसवें और अंतिम दिन गांव में भव्य सवारी और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने भाग लिया।

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10 दिन तक चला पूजा-अर्चना का सिलसिला

गांव के श्रद्धालु सुरेश भिखारी सोनवाने और युवराज भिखारी सोनवाने ने बताया कि उनके निवास पर पिछले 6 सालों से दशा माता की स्थापना की परंपरा चली आ रही है। इस बार भी अमावस्या के दिन माता की स्थापना की गई थी और पूरे 10 दिन तक भक्तिभाव से पूजा-अर्चना होती रही। साथ ही नवनाथ बाबा की भी विशेष आराधना की गई।

नवनाथ बाबा की सवारी बनी आस्था का केंद्र

आखिरी दिन यानी दशवें दिन नवनाथ बाबा की सवारी यात्रा निकाली गई, जिसमें गुरु राजू महाराज, शिष्य सुरेश महाराज और नवनाथ बाबा के श्रद्धालु परिवारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ढोल-नगाड़ों, भजनों और जयघोषों के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे गांव को भक्तिमय माहौल से भर दिया।

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विशाल भंडारे में जुटे हजारों श्रद्धालु

इस अवसर पर ग्राम विरोदा सहित आसपास के गांव — बहादरपुर, लोनी, लालबाग, बुरहानपुर, नेपानगर, धाबा, अड़गांव और यहां तक कि इंदौर से भी श्रद्धालु पहुंचे। सभी ने दशा माता और नवनाथ बाबा के दर्शन किए और महाप्रसाद का लाभ लिया। भंडारे में हर उम्र के लोग पहुंचे और प्रसाद पाकर खुद को धन्य माना।

रात्रि में होगा दशा माता का विसर्जन

ग्रामवासी सुनील देवीदास सोनवने ने बताया कि दशा माता का दरबार पूरे 10 दिनों तक गांव में आस्था का केंद्र बना रहा। मेले जैसा माहौल बना रहा, जहां आस-पास के गांवों से लोग दर्शन करने आए। रात 12 बजे दशा माता का विसर्जन किया जाएगा, जिसके साथ ही यह पावन आयोजन समाप्त हो जाएगा।

गांव की एकजुटता और श्रद्धा का उदाहरण

इस आयोजन ने यह साफ कर दिया कि गांव की एकजुटता और धार्मिक भावना कितनी मजबूत है। हर घर से लोग किसी न किसी रूप में आयोजन से जुड़े रहे — कोई सेवा में, कोई साज-सज्जा में, तो कोई भंडारे की तैयारी में। युवाओं ने सोशल मीडिया पर आयोजन की तस्वीरें और वीडियो साझा कर इसे और अधिक जन-जन तक पहुंचाया।

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