Digvijaya Singh Statement पुणे: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने बयानों के चलते एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा और खेल के मैदान पर भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। पुणे में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि देश को ‘हिंदू राष्ट्र’ कहना संवैधानिक रूप से गलत है।
संविधान का हवाला: भारत को ‘भारतवर्ष’ कहना सही
अपने हालिया Digvijaya Singh Statement में उन्होंने भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का जिक्र किया। सिंह ने कहा कि हमारे संविधान में स्पष्ट लिखा है— “हम, भारत के लोग, यानी भारत” (We, the People of India, that is Bharat)। उनके अनुसार, जब संविधान में ‘भारत’ या ‘भारतवर्ष’ जैसे गौरवशाली शब्दों का उल्लेख है, तो फिर इसे ‘हिंदू राष्ट्र’ के रूप में क्यों प्रचारित किया जा रहा है?
दिग्विजय सिंह ने तर्क दिया कि ‘हिंदू’ वास्तव में कोई धर्म नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग देश को एक विशिष्ट धार्मिक पहचान देना चाहते हैं, वे इसे ‘भारतवर्ष’ कहना क्यों पसंद नहीं करते? उनके इस बयान को सीधे तौर पर आरएसएस (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस विचार के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है।”
खेल भावना पर राजनीति न हो: दिग्विजय सिंह
धर्म और राष्ट्रवाद के अलावा, इस Digvijaya Singh Statement का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा टी-20 विश्व कप में भारतीय और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के व्यवहार पर था। हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी क्रिकेटरों से हाथ नहीं मिलाया, जिस पर सिंह ने अपनी असहमति जताई।
उन्होंने कहा कि खेल के मैदान पर ‘खेल भावना’ (Sportsmanship) सर्वोपरि होनी चाहिए। उनके शब्दों में, “खिलाड़ियों को आपस में हाथ मिलाना चाहिए। खेल के मैदान पर राजनीति हावी नहीं होनी चाहिए और दोनों ही टीमों को एक-दूसरे के प्रति आपसी सम्मान दिखाना चाहिए।” पिछले कुछ समय से सीमा पर तनाव के कारण भारत-पाकिस्तान मैचों में खिलाड़ियों के हाथ न मिलाने की परंपरा पर कई पूर्व दिग्गज क्रिकेटर भी सवाल उठा चुके हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?
यह Digvijaya Singh Statement ऐसे समय में आया है जब देश में सांस्कृतिक और संवैधानिक पहचान को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ‘इंडिया बनाम भारत’ की बहस के बीच ‘भारतवर्ष बनाम हिंदू राष्ट्र’ के उनके तर्क ने वैचारिक लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दिग्विजय सिंह इस तरह के बयानों के जरिए कांग्रेस के उस धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक स्टैंड को मजबूत कर रहे हैं, जो बीजेपी की ‘हिंदू राष्ट्र’ वाली छवि के विपरीत है। हालाँकि, विपक्षी खेमा इसे अक्सर तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा बताता रहा है।
संवैधानिक पहचान बनाम विचारधारा
पुणे में दिया गया यह Digvijaya Singh Statement आने वाले दिनों में सोशल मीडिया और टीवी डिबेट्स का मुख्य केंद्र बना रह सकता है। चाहे वह हिंदू धर्म की परिभाषा हो या क्रिकेट के मैदान पर शिष्टाचार, दिग्विजय सिंह ने अपनी बात पूरी बेबाकी से रखी है। अब देखना यह होगा कि अन्य राजनीतिक दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।












