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Dhule Election Violence: वोटिंग से एक दिन पहले शिवसेना नेता के घर पर पत्थरबाजी, BJP पर आरोप

Dhule Election Violence: धुले में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन वोटिंग से पहले शिवसेना जिला अध्यक्ष मनोज मोरे के घर पर हमला। BJP कैंडिडेट के पति पर लगा आरोप।

Updated at: Thu, 15 Jan 2026, 11:41 AM (IST)
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Dhule Election Violence में शिवसेना जिला अध्यक्ष मनोज मोरे के घर पर पत्थरबाजी, टूटी खिड़कियां और कुर्सियां
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महाराष्ट्र के धुले शहर में वोटिंग से सिर्फ एक दिन पहले एक ऐसी घटना हुई है जिसने पूरे इलाके के राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। शिवसेना शिंदे गुट के जिला अध्यक्ष मनोज मोरे के घर पर पत्थरबाजी की गई, जिसमें उनके घर का काफी नुकसान हुआ। यह Dhule Election Violence का मामला अब सियासी बवाल का रूप ले चुका है और पूरे शहर में इसकी चर्चा है।

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क्या हुआ मनोज मोरे के घर पर?

धुले म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले आज जो हुआ, वो किसी को भी हैरान कर देने वाला था। शिवसेना के जिला अध्यक्ष मनोज मोरे के घर के बाहर अचानक पत्थरों की बौछार शुरू हो गई। घटना इतनी तेज और अचानक थी कि घर के बाहर रखी कुर्सियां टूट गईं, खिड़की के शीशे चकनाचूर हो गए और ईंटें घर के अंदर तक गिरती नजर आईं।

मनोज मोरे का कहना है कि यह कोई आम झगड़ा नहीं बल्कि एक सुनियोजित हमला था। उन्होंने आरोप लगाया है कि वार्ड नंबर 2 से BJP की कैंडिडेट प्रभावती शिंदे के पति विलास शिंदे ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर यह हमला किया। इस Dhule Election Violence की घटना ने चुनावी शांति को भंग कर दिया है।

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सियासी रंजिश का मामला या चुनावी हिंसा?

धुले में यह घटना सिर्फ एक पत्थरबाजी नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी सियासी रंजिश होने की बात सामने आ रही है। वार्ड नंबर 2 में BJP और शिवसेना के बीच कड़ी टक्कर है। प्रभावती शिंदे BJP की ओर से इस वार्ड से चुनाव लड़ रही हैं और उनके पति विलास शिंदे उनके चुनाव अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हैं।

मनोज मोरे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वोटिंग से एक दिन पहले यह हमला उन्हें डराने और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है। उनका कहना है कि विलास शिंदे और उनके समर्थकों ने संगठित तरीके से उनके घर पर हमला बोला। Dhule Election Violence के इस मामले ने स्थानीय राजनीति में खलबली मचा दी है।

पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और टूटी हुई कुर्सियों, शीशों और बिखरी ईंटों को देखा। घटना की गंभीरता को देखते हुए देवपुर पुलिस स्टेशन में जल्द ही एक केस दर्ज किया जाएगा।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और CCTV फुटेज की जांच की जा रही है। चूंकि कल वोटिंग होनी है, इसलिए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो और Dhule Election Violence की कोई और वारदात न हो सके।

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धुले का राजनीतिक माहौल गरमाया

इस घटना के बाद धुले का पूरा राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है। शिवसेना और BJP के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए हैं। दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर दिए हैं।

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शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने मनोज मोरे के घर के बाहर जमा होकर विरोध प्रदर्शन किया और BJP पर हमले का आरोप लगाया। वहीं, BJP की तरफ से इन आरोपों को बेबुनियाद बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि Dhule Election Violence जैसी घटनाएं शहर की छवि खराब करती हैं।

वोटिंग से पहले की यह घटना क्यों अहम है?

म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में वोटिंग से ठीक एक दिन पहले ऐसी घटना होना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह वाकई में सियासी प्रतिद्वंद्विता का मामला है या फिर किसी व्यक्तिगत रंजिश का? क्या वोटिंग से पहले यह घटना मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है?

धुले म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में कई अहम वार्ड हैं जहां शिवसेना और BJP के बीच सीधी टक्कर है। ऐसे में यह घटना चुनावी नतीजों को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि Dhule Election Violence का यह मामला वोटर्स की सोच बदल सकता है।

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धुले में पिछले कुछ समय से राजनीतिक तनाव बढ़ रहा था। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन पर कब्जे की होड़ में सभी पार्टियां पूरी ताकत झोंक रही हैं। ऐसे में हिंसक घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं लेकिन अप्रत्याशित नहीं।

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि Dhule Election Violence जैसे मामले लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं। उनका मानना है कि चुनाव आयोग को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग Dhule Election Violence के इस मामले पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक गुंडागर्दी बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

ट्विटर और फेसबुक पर #DhuleElectionViolence ट्रेंड कर रहा है। स्थानीय पत्रकारों ने भी इस मामले को काफी कवरेज दी है।

अब क्या होगा आगे?

पुलिस जांच अपने स्तर पर जारी है और देवपुर पुलिस स्टेशन में जल्द ही FIR दर्ज की जाएगी। चुनाव आयोग भी इस मामले पर नजर रख रहा है। कल होने वाली वोटिंग के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय चुनाव भी कभी-कभी बड़े राजनीतिक दंगलों से कम नहीं होते। धुले के लोग अब यह देखने को बेताब हैं कि Dhule Election Violence के इस मामले का वोटिंग पर क्या असर पड़ता है और न्याय किस तक पहुंचता है।

चुनाव आयोग ने यह साफ किया है कि किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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Anil Borade

महाराष्ट्र के धूलिया जिले से हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे ज़मीनी हकीकत को उजागर करने वाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं और सामाजिक मुद्दों, राजनीति व जनहित से जुड़े विषयों पर गहरी पकड़ रखते हैं। वर्तमान में वे प्रतिष्ठित नेशनल न्यूज़ चैनल भारत 24 में संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे Fact Finding के धूलिया जिला ब्यूरो के प्रमुख भी हैं, जहाँ से वे विश्वसनीय, तथ्यपरक और निष्पक्ष खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं।

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