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BJP जिलाध्यक्ष ने तोड़ी चुप्पी! बेटी-पत्नी पर हमले का आरोप, प्रदर्शनकारियों से कहा- ‘सस्ती लोकप्रियता के लिए झूठ मत बोलो

बुरहानपुर BJP जिलाध्यक्ष मनोज माने ने तोड़ी चुप्पी! वीडियो में बताया- बेटी-पत्नी को गालियां, धक्का-मुक्की और जान की धमकी। प्रदर्शनकारियों को कहा- सस्ती लोकप्रियता के लिए झूठ न बोलें।

Updated at: Sat, 13 Dec 2025, 11:29 AM (IST)
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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में BJP controversy अब एक बड़ा ट्विस्ट आ गया है। जो BJP जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज माने पिछले चार दिनों से चुप थे और सिर्फ “मुझे कुछ नहीं कहना” कहकर टाल रहे थे, उन्होंने अब आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति और वीडियो जारी करके उन्होंने अपना पक्ष रखा है और सरपंच पति महेंद्र इंगले पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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डॉ. माने ने दावा किया है कि उनकी बेटी और पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, उन्हें गालियां दी गईं, धक्का-मुक्की की गई, जबरन घर में धकेला गया और जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि सरपंच पति का मीडिया में दिया गया बयान अपने आप में घटना की स्वीकारोक्ति है।

“सरपंच पति का बयान ही है स्वीकारोक्ति”

डॉ. मनोज माने ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में साफ शब्दों में कहा कि 9 दिसंबर को जैनाबाद गांव में जो घटना हुई, उस पर कुछ लोग भ्रामक तथ्यों के साथ मीडिया में बयान दे रहे हैं। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

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उन्होंने कहा, “चार दिन पहले बने सीमेंट रोड के मात्र 20 फीट हिस्से पर मेरे ड्राइवर द्वारा ट्रैक्टर ले जाने को लेकर जो विवाद हुआ, उस पर सरपंच प्रतिनिधि महेंद्र इंगले ने जो बयान दिया है, वह खुद उनके द्वारा की गई घटना की स्वीकारोक्ति प्रतीत होता है।”

यह एक तीखा बयान है। BJP जिलाध्यक्ष साफ कह रहे हैं कि सरपंच पति ने मीडिया में जो बात कही, उससे ही साबित हो रहा है कि घटना हुई थी।

“मेरी बेटी और पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार”

डॉ. माने ने सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ड्राइवर द्वारा ट्रैक्टर से सीमेंट रोड के छोटे से हिस्से को पार करना किसी को यह अधिकार नहीं देता कि वह किसी महिला और युवती के साथ बदसलूकी करे।

उन्होंने कहा, “सरपंच पति महेंद्र इंगले और उनके समर्थकों ने घटना के दौरान मेरी पत्नी और बेटी के साथ अभद्र व्यवहार किया। यह बेहद शर्मनाक बात है।”

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जिलाध्यक्ष ने आगे बताया:

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  • गंदी-गंदी गालियां दी गईं – उनकी बेटी और पत्नी को अपशब्द कहे गए
  • धक्का-मुक्की कर मारा गया – शारीरिक हिंसा की गई
  • जान से मारने की धमकियां दी गईं – जान का खतरा बताया गया
  • जबरन घर में धकेला गया – उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया गया

यह BJP controversy में अब तक का सबसे गंभीर आरोप है। अगर यह सच है, तो यह एक बेहद संगीन मामला है।

“मैं घटना के समय कार्यक्रम में था”

डॉ. माने ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि घटना के समय वे खुद मौजूद नहीं थे। वे खकनार मंडल में नेपानगर विधायक सुश्री मंजू दादू एवं पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ “सांसद खेल महोत्सव” में शामिल थे।

उन्होंने कहा, “शाम 7.30 बजे जब मैं कार्यक्रम से लौटा, तभी मुझे इस घटना की जानकारी मिली। घर पहुंचने पर मेरी बेटी ने पूरी घटना बताई। वह बहुत डरी हुई और परेशान थी।”

यह बयान अहम है क्योंकि इससे साफ होता है कि जिलाध्यक्ष खुद घटनास्थल पर नहीं थे। उन्हें बाद में परिवार से पता चला।

“मैंने समझौते की कोशिश की, लेकिन…”

डॉ. माने ने यह भी बताया कि उन्होंने मामले को सुलझाने की कोशिश की थी। उन्होंने सरपंच, सरपंच प्रतिनिधि, उनके परिवारजनों और समर्थकों के स्थानीय संरक्षकों से दूरभाष पर बात की।

लेकिन उन्होंने कहा, “मैंने उनसे फोन पर चर्चा की, लेकिन उन्होंने घटना को गंभीरता से लेने के बजाय उल्टा मुझे ही घटना को भूल जाने की सलाह दे दी। यह कैसी बात है? मेरी बेटी और पत्नी के साथ जो हुआ, उसे मैं कैसे भूल सकता हूं?”

जिलाध्यक्ष ने आगे कहा, “ऐसे गैरजिम्मेदाराना व्यवहार से व्यथित होकर मैंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने का निर्णय लिया, ताकि मेरे परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।”

“आज मेरे परिवार के साथ, कल किसी और के साथ”

डॉ. माने ने एक इमोशनल अपील करते हुए कहा, “आज मेरे परिवार के साथ जो हुआ, वो कल किसी अन्य की बहन-बेटी और परिवार के साथ न हो। इसलिए मैंने FIR दर्ज कराई।”

यह बयान काफी पावरफुल है। जिलाध्यक्ष यह कह रहे हैं कि उन्होंने सिर्फ अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि समाज में किसी भी महिला के साथ ऐसा न हो, इसलिए कानूनी कार्रवाई की।

“ज्ञापन देने वाले अपना स्तर न गिराएं”

डॉ. माने ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जिन्होंने बुधवार को कलेक्ट्रेट में जाकर सरपंच के समर्थन में ज्ञापन दिया था।

उन्होंने कहा, “बुधवार 10 दिसंबर को कलेक्टर कार्यालय में सरपंच प्रतिनिधि व उनके परिवारजनों एवं समर्थकों के पक्ष में ज्ञापन देने वालों से अनुरोध है कि वे सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए तथ्यहीन बयानबाजी न करें।”

यह एक सीधा हमला है उन भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी जो जिलाध्यक्ष के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे।

“घटना के समय कौन था, कौन नहीं था”

जिलाध्यक्ष ने एक दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा, “यह ध्यान देने योग्य है कि घटना 9 दिसंबर की दोपहर में हुई, जब अधिकांश ग्रामीण अपने घरों पर मौजूद थे और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई भी सार्वजनिक रूप से ग्रामीणों की उपस्थिति में ही हुई।”

उन्होंने आगे कहा, “आश्चर्य की बात है कि जो लोग आज मीडिया में गांव की शांति की बात कर रहे हैं, वे घटना के समय से लेकर देर रात तक गांव में मौजूद ही नहीं थे। और अब तीन दिन बाद तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रहे हैं।”

यह बयान उन लोगों पर सीधा हमला है जो बाद में सरपंच के समर्थन में आए।

“सत्य के प्रति ईमानदार रहें”

डॉ. माने ने अंत में अपील की कि “ज्ञापन की अगुआई करने वाले लोग अपना स्तर न गिराएं और सत्य के प्रति ईमानदार रहें।”

यह एक चुनौती है उन सभी लोगों को जो उनके खिलाफ खड़े हैं।

अब सच क्या है?

BJP controversy अब और गंभीर हो गया है। एक तरफ सैकड़ों ग्रामीण और भाजपा कार्यकर्ता कह रहे हैं कि जिलाध्यक्ष ने दलित सरपंच के साथ अन्याय किया है। दूसरी तरफ जिलाध्यक्ष कह रहे हैं कि उनकी बेटी और पत्नी के साथ गालीगलौज, धक्का-मुक्की और जान की धमकी दी गई।

सवाल यह है कि सच क्या है? पुलिस जांच कर रही है, लेकिन दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए हैं।

एक बात तय है – यह मामला अब सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं रहा। यह भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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