उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में इन दिनों कुछ खास हो रहा है। भारत और नेपाल की सेनाएं मिलकर एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही हैं, जिसका नाम है सूर्यकिरण-19। यह India Nepal Military Exercise सिर्फ एक रूटीन ट्रेनिंग नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों की एक मिसाल है।
क्या है सूर्यकिरण-19 अभ्यास?
सूर्यकिरण भारत और नेपाल के बीच होने वाला एक वार्षिक संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इस बार का 19वां संस्करण पिथौरागढ़ की पहाड़ियों में चल रहा है। पहले हफ्ते में ही दोनों देशों के जवानों ने कई तरह की हाई-लेवल ट्रेनिंग पूरी कर ली है। खास बात यह है कि इस बार का फोकस आतंकवाद से निपटने और मुश्किल इलाकों में ऑपरेशन करने पर ज्यादा है।
किस तरह की ट्रेनिंग हो रही है?
इस India Nepal Military Exercise में जवानों को कई तरह के स्किल्स सिखाए जा रहे हैं। जंगल और ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में लड़ाई लड़ना, आतंकियों से निपटने के खास तरीके, और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल – सब कुछ इस ट्रेनिंग का हिस्सा है।
जवानों ने फील्ड क्राफ्ट की ट्रेनिंग ली है, जिसमें मैदानी इलाकों में छुपने और दुश्मन पर नजर रखने की तकनीक शामिल है। काफिले की सुरक्षा, सर्च ऑपरेशन, और जंगल में सर्वाइव करने के गुर भी सिखाए गए। रॉक क्राफ्ट यानी चट्टानों पर चढ़ाई की ट्रेनिंग और जंगल में फायरिंग के अभ्यास भी किए गए हैं।
आधुनिक तकनीक का तड़का
इस बार के सूर्यकिरण अभ्यास में सबसे खास बात है आधुनिक तकनीक का जमकर इस्तेमाल। ISR ड्रोन यानी इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस ड्रोन का उपयोग किया गया। ये ड्रोन दुश्मन की हलचल पर नजर रखने और जानकारी जुटाने में बेहद कारगर होते हैं।
इसके अलावा अनमैन्ड लॉजिस्टिक व्हीकल्स यानी बिना ड्राइवर वाली गाड़ियों का भी प्रयोग हुआ। ये गाड़ियां खतरनाक इलाकों में सामान पहुंचाने के काम आती हैं, जहां जवानों को भेजना रिस्की हो सकता है। निगरानी सेंसर भी लगाए गए हैं जो चौबीसों घंटे एरिया पर नजर रखते हैं।
इन आधुनिक तकनीकों की मदद से दोनों सेनाओं की मुश्किल इलाकों में ऑपरेशन करने की क्षमता काफी बढ़ गई है। पहाड़ों और जंगलों जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी अब जवान ज्यादा सटीक और प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं।
सिर्फ फिजिकल ट्रेनिंग नहीं
India Nepal Military Exercise में सिर्फ शारीरिक प्रशिक्षण ही नहीं हुआ। अकादमिक सत्रों में भी कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। UN मिशन यानी संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में भारत और नेपाल की भूमिका पर बात हुई। ऑपरेशन खुकरी जैसे ऐतिहासिक मिशनों के अनुभव भी साझा किए गए।
ये अकादमिक सत्र जवानों को सिर्फ फाइटिंग स्किल्स ही नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक थिंकिंग और इंटरनेशनल ऑपरेशंस की समझ भी देते हैं।
क्यों जरूरी है यह अभ्यास?
भारत और नेपाल के बीच लंबी और खुली सीमा है। दोनों देशों को एक जैसे सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ता है। आतंकवाद, सीमा पार से तस्करी, और प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य – इन सभी चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों सेनाओं का मिलकर काम करना बेहद जरूरी है।
सूर्यकिरण जैसे अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाते हैं। साथ मिलकर ट्रेनिंग करने से जवान एक-दूसरे के तरीकों को समझते हैं, जो किसी इमरजेंसी में बेहद काम आता है।
दोस्ती की नई ऊंचाइयां
यह India Nepal Military Exercise सिर्फ सैन्य प्रशिक्षण नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच दोस्ती को और मजबूत करने का जरिया भी है। भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्ते हैं। रोटी-बेटी का नाता है।
सूर्यकिरण-19 के जरिए दोनों देशों की सेनाएं यह साबित कर रही हैं कि रक्षा के मामले में भी वे एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। यह अभ्यास दोनों देशों के जवानों को एक-दूसरे को करीब से जानने और समझने का मौका भी देता है।
पिथौरागढ़ की खूबसूरत लेकिन चुनौतीपूर्ण पहाड़ियों में हो रहा यह अभ्यास आने वाले दिनों में दोनों सेनाओं को और भी तैयार बनाएगा। आतंकवाद और दूसरे सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए यह तैयारी बेहद जरूरी है।












