भारत और यूरोप के बाल्टिक देश लातविया के बीच दोस्ती का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। दोनों देशों ने तय किया है कि वे अपने भारत-लातविया संबंध को और भी गहरा और मजबूत बनाएंगे। यह सब हुआ लातविया की खूबसूरत राजधानी रीगा में, जहाँ 9वीं भारत-लातविया विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) की बैठक हुई।
इस बैठक में दो ऐसी बड़ी बातें निकलकर आईं, जो भारत के लिए काफी अहमियत रखती हैं।
आतंकवाद पर लातविया का कड़ा रुख, भारत ने की तारीफ
बैठक की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में से एक थी आतंकवाद पर चर्चा। जैसा कि हम सब जानते हैं, भारत लंबे समय से दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाता रहा है और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलता है।
इस बैठक में, लातविया ने भी आतंकवाद के हर रूप की कड़े शब्दों में निंदा की। लातविया ने साफ कहा कि आतंकवाद, चाहे वह किसी भी रूप में हो या कहीं भी हो, उसे सही नहीं ठहराया जा सकता।
लातविया के इस स्पष्ट और कड़े रुख की भारत ने दिल खोलकर सराहना की है। भारत की तरफ से बैठक की अगुवाई कर रहे विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा कि जब दुनिया के देश आतंकवाद के खिलाफ इस तरह एकजुट होते हैं, तो इससे इस वैश्विक खतरे से लड़ने की हमारी हिम्मत और बढ़ती है। यह कदम भारत-लातविया संबंध में एक नई रणनीतिक गहराई जोड़ता है, क्योंकि दोनों देश वैश्विक शांति और सुरक्षा को लेकर एक जैसी सोच रखते हैं।
UNSC में लातविया के लिए भारत का ‘पक्का समर्थन‘
दूसरी बड़ी खबर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से जुड़ी है। लातविया 2026-2027 के कार्यकाल के लिए UNSC में एक अस्थायी सीट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहा है। यह दुनिया की सबसे ताकतवर संस्थाओं में से एक है, जहाँ वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसले लिए जाते हैं।
भारत ने इस बैठक में लातविया को अपना पक्का समर्थन दोहराया है। भारत ने कहा कि वह लातविया की इस दावेदारी का पूरा समर्थन करता है और उसकी सफल उम्मीदवारी के लिए शुभकामनाएं देता है।
यह भारत की ओर से एक बड़ा कूटनीतिक कदम है। यह दिखाता है कि भारत, लातविया को एक भरोसेमंद दोस्त और वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार भागीदार के रूप में देखता है। लातविया के लिए भारत का समर्थन बहुत मायने रखता है, क्योंकि भारत खुद भी ‘ग्लोबल साउथ’ की एक मजबूत आवाज है और संयुक्त राष्ट्र में उसका काफी प्रभाव है। यह समर्थन भारत-लातविया संबंध की बढ़ती गर्माहट और आपसी विश्वास को दर्शाता है।
व्यापार, टेक्नोलॉजी और दिलों का रिश्ता: इन मुद्दों पर भी बनी बात
इस बैठक में सिर्फ आतंकवाद या UNSC पर ही बात नहीं हुई, बल्कि दोनों देशों ने अपनी दोस्ती के हर पहलू पर खुलकर चर्चा की। लातविया की ओर से बैठक का नेतृत्व वहां के विदेश मंत्रालय के राज्य सचिव, एंडजेज विल्मसोंस ने किया।
दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि भारत-लातविया संबंध में अभी बहुत संभावनाएं बाकी हैं, खासकर इन क्षेत्रों में:
- व्यापार (Trade): दोनों देशों के बीच व्यापार को कैसे बढ़ाया जाए, इस पर खास जोर दिया गया। भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था है और लातविया यूरोपीय संघ (EU) का एक अहम सदस्य है, जो भारतीय सामानों के लिए यूरोप का गेटवे बन सकता है।
- प्रौद्योगिकी (Technology): भारत के आईटी हब और लातविया के टेक-सेवी माहौल के बीच शानदार तालमेल बन सकता है।
- नवाचार (Innovation): नए स्टार्टअप्स और इनोवेटिव आइडियाज पर मिलकर काम करने पर सहमति बनी।
- लोगों के बीच संबंध (People-to-People Ties): यह सबसे दिलचस्प है। इसका मतलब है कि दोनों देश शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में एक-दूसरे के करीब आएंगे। ज्यादा से ज्यादा भारतीय छात्र लातविया में पढ़ सकें और वहां के लोग भारत घूमने आएं, इसके लिए माहौल बनाया जाएगा।
आगे का रास्ता: अगली बैठक दिल्ली में
बातचीत का यह दौर यहीं खत्म नहीं हुआ है। दोनों देशों ने तय किया है कि वे इस तरह की हाई-लेवल मीटिंग्स करते रहेंगे ताकि जो वादे किए गए हैं, उन पर तेजी से काम हो सके।
अच्छी खबर यह है कि अगली विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) की बैठक अगले साल भारत की राजधानी नई दिल्ली में होगी।
इस दौरे पर, सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने लातविया की विदेश मंत्री बैबा ब्राजे से भी मुलाकात की, जो यह दिखाता है कि इस बैठक को दोनों तरफ से कितना महत्व दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, रीगा में हुई यह बैठक भारत-लातविया संबंध के लिए एक मजबूत नींव का काम करेगी। आतंकवाद पर एक सुर और UNSC पर पक्का समर्थन, यह दिखाता है कि भारत और लातविया, दो अलग-अलग महाद्वीपों में होते हुए भी, एक सुरक्षित और समृद्ध दुनिया के लिए एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं।















