Delhi Red Fort Blast: देश की राजधानी दिल्ली सोमवार शाम एक ज़ोरदार धमाके से दहल उठी. यह कोई आम शाम नहीं थी; घड़ी में शाम के 6:52 बज रहे थे, और लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास का भीड़भाड़ वाला इलाका अपनी रोज़ाना की रफ़्तार में था. तभी एक चलती कार आग का गोला बन गई और उसमें एक भीषण विस्फोट हो गया.
यह धमाका इतना ज़बरदस्त था कि इसकी गूंज आईटीओ तक महसूस की गई. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, चारों तरफ़ चीख-पुकार और अफ़रा-तफ़री मच गई. इस दर्दनाक हादसे ने, जिसे अब पुलिस एक आतंकी साज़िश के एंगल से देख रही है, 9 लोगों की ज़िंदगी छीन ली और 20 से ज़्यादा लोगों को ज़ख्मी कर दिया.
इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस ने इसे एक आतंकी घटना मानते हुए UAPA के तहत केस दर्ज किया है और इस Delhi Red Fort Blast की जांच में कई केंद्रीय एजेंसियां जुट गई हैं.
मंज़र-ए-क़यामत: जब आसमान में उठे आग के गोले
सोमवार शाम को लाल किला और चांदनी चौक का इलाका हज़ारों लोगों की आवाजाही से भरा हुआ था. लोग दफ़्तरों से घर लौट रहे थे, मेट्रो स्टेशन पर भीड़ थी, और सड़क पर गाड़ियाँ रेंग रही थीं. तभी लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 और 4 के पास, नेताजी सुभाष मार्ग पर एक सफ़ेद रंग की हुंडई आई20 कार में भयानक विस्फोट हो गया.
चश्मदीदों के मुताबिक, धमाके की आवाज़ किसी बम फटने जैसी थी. आवाज़ इतनी तेज़ थी कि आसपास की इमारतों और यहाँ तक कि मेट्रो स्टेशन की खिड़कियों के शीशे भी चकनाचूर हो गए. आसपास खड़ी कई दूसरी गाड़ियाँ भी इस आग की चपेट में आ गईं और धू-धू कर जलकर राख हो गईं.
चांदनी चौक व्यापारी संघ द्वारा जारी एक वीडियो में इस तबाही का खौफनाक मंज़र कैद हो गया. सड़क पर बिखरे शव, जलती कारें, और घबराए हुए लोग जो मदद के लिए चीख रहे थे. धमाके के बाद आसमान में आग के गोले उठते देख लोग बुरी तरह सहम गए और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे.
10 मिनट में रेस्क्यू, LNJP में घायलों का तांता
धमाके की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ तुरंत मौके पर पहुँचीं. फायर डिपार्टमेंट के मुताबिक, शाम 6:52 बजे कॉल मिली और कुल 10 फायर टेंडरों को मौके पर भेजा गया. इलाका बेहद संकरा और भीड़भाड़ वाला होने के बावजूद, फायर ब्रिगाड ने तेज़ी से काम किया और रात 7:29 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया.
लेकिन तब तक यह Delhi Red Fort Blast अपना कहर बरपा चुका था. सड़क पर हर तरफ़ तबाही के निशान थे. घायलों को तुरंत पास के लोक नायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इमरजेंसी वॉर्ड में घायलों का तांता लग गया. अस्पताल के बाहर अपनों की तलाश में रोते-बिलखते लोगों का मंज़र दिल दहला देने वाला था.
पुलिस ने बताया कि मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और घायलों का इलाज जारी है.
जांच का पहला सुराग: कार का ‘पुलवामा कनेक्शन’
दिल्ली पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए जांच शुरू की. शुरुआती जांच में ही कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जिस हुंडई आई20 कार में विस्फोट हुआ, उसमें तीन लोग सवार थे. पुलिस ने कार के मालिक मोहम्मद सलमान को हिरासत में ले लिया.
सलमान ने जो बताया, उसने जांच की दिशा ही बदल दी. सलमान ने पुलिस को बताया कि यह कार उसने करीब डेढ़ साल पहले ओखला में देवेंद्र नाम के एक व्यक्ति को बेच दी थी. जब पुलिस ने इस कड़ी को आगे बढ़ाया, तो पता चला कि कार देवेंद्र से अंबाला पहुँची और फिर… पुलवामा.
जी हाँ, वही पुलवामा, जो आतंकी घटनाओं के लिए कुख्यात रहा है. पुलिस के मुताबिक, यह कार आखिर में पुलवामा के तारिक नाम के एक व्यक्ति के पास पहुँची थी. अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है. ओखला से अंबाला और अंबाला से पुलवामा तक कार का पहुँचना, इस Delhi Red Fort Blast को एक महज़ हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साज़िश की ओर इशारा कर रहा है.
पहेली: बम नहीं, तो क्या था?
इस केस में एक और पेंच है जिसने जांच एजेंसियों को उलझा दिया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि घायलों के शरीर में कोई छर्रा (Splinter) या ‘पंचर’ (Puncture) नहीं मिला है. यह बहुत अजीब है, क्योंकि आमतौर पर बम विस्फोटों (IED ब्लास्ट) में छर्रों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा नुकसान पहुँचाया जा सके.
घायलों के शरीर पर सिर्फ जलने के निशान हैं. तो सवाल यह है कि अगर यह बम नहीं था, तो इतना भीषण विस्फोट कैसे हुआ? क्या यह कोई हाई-ग्रेड मिलिट्री एक्सप्लोसिव था? या कोई केमिकल ब्लास्ट? फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम कार और मौके से सैंपल इकट्ठा कर रही है ताकि विस्फोटक की असली पहचान की जा सके.
UAPA, NIA और NSG: जांच का हर एंगल
मामले की गंभीरता को देखते हुए, दिल्ली पुलिस ने तुरंत गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत केस दर्ज कर लिया है. UAPA के तहत केस दर्ज होने का सीधा मतलब है कि पुलिस इसे एक आतंकी हमला मानकर चल रही है.
दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने खुद मौके का मुआयना किया. उन्होंने बताया कि सभी जांच एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की टीमें भी जांच में शामिल हो गई हैं. NSG के बम निरोधक दस्ते ने भी घटनास्थल का मुआयना किया.
‘Delhi Red Fort Blast’ का फरीदाबाद कनेक्शन?
जांच की सुई सिर्फ पुलवामा पर ही नहीं रुकी है. इस धमाके के तार सोमवार को ही फरीदाबाद के धौज इलाके से हुई एक गिरफ्तारी से भी जुड़ते दिख रहे हैं.
पुलिस ने सोमवार को फरीदाबाद से डॉ. मुजम्मिल गनई नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया था. चौंकाने वाली बात यह है कि गनई के घर से पुलिस को भारी मात्रा में हथियार, टाइमर डिवाइस और विस्फोटक सामग्री मिली थी.
अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि क्या फरीदाबाद में मिले इन विस्फोटकों और टाइमर का इस्तेमाल दिल्ली ब्लास्ट में किया गया? क्या डॉ. गनई और पुलवामा का तारिक एक ही आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा हैं? यह सवाल अब Delhi Red Fort Blast की जांच का अहम सुराग बन चुका है.
हाई अलर्ट पर दिल्ली, मुंबई तक सतर्कता
इस धमाके के बाद पूरी दिल्ली में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. दिल्ली की सभी सीमाओं को सील कर दिया गया है और हर आने-जाने वाले वाहन की गहन तलाशी ली जा रही है. लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 और 4 को अगली सूचना तक के लिए बंद कर दिया गया है. पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और किसी को भी वहां जाने की इजाज़त नहीं है.
गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों से बात की और मौके पर विशेषज्ञ दल भेजने के निर्देश दिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्थिति की समीक्षा की और इस दर्दनाक घटना में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की.
दिल्ली में हुए इस धमाके की गूंज मुंबई तक सुनाई दी. मुंबई में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. मध्य रेलवे ने मुंबई के सभी प्रमुख स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT), दादर, ठाणे और कल्याण जैसे सबसे व्यस्त स्टेशनों पर रेलवे पुलिस (RPF) की अतिरिक्त गश्त और जांच जारी है.
आगे क्या?
दिल्ली एक बार फिर आतंक के साये में है. यह हमला महज़ एक हादसा नहीं है, इसके पीछे एक गहरी साज़िश की बू आ रही है. पुलिस के सामने कई सवाल हैं:
- कार में वो तीन लोग कौन थे?
- विस्फोटक किस तरह का था?
- पुलवामा का ‘तारिक’ कौन है और उसका मकसद क्या था?
- क्या फरीदाबाद मॉड्यूल इस Delhi Red Fort Blast के लिए जिम्मेदार है?
आने वाले 24 से 48 घंटे इस जांच के लिए बेहद अहम हैं. फिलहाल, दिल्ली सहमी हुई है, लेकिन देश की जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की तह तक जाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं.















