नई दिल्ली: देश में बढ़ते इन्फ्लूएंजा के मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने influenza preparedness India को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस बीमारी से निपटने के लिए सिर्फ केंद्र सरकार के प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि राज्य सरकारों को भी पूरी मजबूती से साथ आना होगा।
दो दिवसीय चिंतन शिविर में influenza preparedness India पर जोर
राजधानी दिल्ली में आयोजित एक खास चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने influenza preparedness India के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। यह दो दिन का कार्यक्रम ‘इन्फ्लूएंजा की तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए अंतर-मंत्रालयी और अंतर-क्षेत्रीय तालमेल को मज़बूत करना’ विषय पर केंद्रित था।
अपने संबोधन में मंत्री जी ने जोर देते हुए कहा कि इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी से निपटने के लिए पहले से तैयारी बेहद जरूरी है। साथ ही समय पर सही प्रतिक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि influenza preparedness India सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि एक ठोस कार्य योजना होनी चाहिए।
क्यों चिंता का विषय है इन्फ्लूएंजा?
इन्फ्लूएंजा यानी फ्लू सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। हर साल इस संक्रामक बीमारी की वजह से दुनियाभर में हजारों लोगों की जान चली जाती है। मौसमी बदलाव के साथ इसके मामले तेजी से बढ़ते हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है।
खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए यह बीमारी ज्यादा खतरनाक साबित होती है। इसलिए influenza preparedness India की दिशा में ठोस और समय पर कदम उठाना समय की मांग है।
कैसे हो रही है निगरानी?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय influenza preparedness India के तहत इस बीमारी को लेकर पूरी तरह सतर्क है। इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आई.डी.एस.पी.) नेटवर्क के जरिए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौसमी इन्फ्लूएंजा के रुझानों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यह निगरानी प्रणाली बेहद अहम है क्योंकि इससे समय रहते किसी भी तरह के फ्लू के प्रकोप का पता लगाया जा सकता है और उसके अनुसार तुरंत कदम उठाए जा सकते हैं। आई.डी.एस.पी. नेटवर्क देश के कोने-कोने से डेटा एकत्र करता है और उसका विश्लेषण कर स्वास्थ्य अधिकारियों को अलर्ट करता है।
WHO के साथ मिलकर मजबूत हो रही influenza preparedness India
इस चिंतन शिविर का आयोजन केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से किया। यह बात अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि WHO की विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय अनुभव से भारत को influenza preparedness India की दिशा में बेहतर रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
WHO ने पहले भी कई देशों में फ्लू महामारी से निपटने में अहम भूमिका निभाई है। उनके अनुभव और दिशानिर्देशों से भारत अपनी तैयारियों को और भी प्रभावी बना सकता है।
110 प्रतिनिधियों ने की influenza preparedness India पर चर्चा
इस दो दिवसीय शिविर में विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संस्थानों से करीब 110 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें स्वास्थ्य विशेषज्ञ, नीति निर्माता, प्रशासनिक अधिकारी और क्षेत्र के दूसरे अहम लोग शामिल हैं।
यह मंच सभी हितधारकों को एक साथ बैठकर influenza preparedness India से जुड़ी रणनीतियों पर खुलकर चर्चा करने का सुनहरा अवसर दे रहा है। ऐसे कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं क्योंकि इनसे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत होता है और एक दूसरे के अनुभवों से सीखने का मौका मिलता है।
क्या होगा आगे का रोडमैप?
इस शिविर से उम्मीद की जा रही है कि देश में influenza preparedness India को लेकर एक व्यापक और कारगर कार्ययोजना तैयार होगी। इसमें निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
समय पर वैक्सीनेशन: खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए फ्लू वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
जागरूकता अभियान: आम जनता को इन्फ्लूएंजा के लक्षणों, बचाव के तरीकों और समय पर इलाज के बारे में जागरूक करना।
स्वास्थ्य सुविधाओं की मजबूती: अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में फ्लू मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त व्यवस्था और दवाइयों का स्टॉक सुनिश्चित करना।
आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र: किसी भी तरह के फ्लू के प्रकोप की स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए मजबूत सिस्टम तैयार करना।
केंद्र-राज्य समन्वय क्यों जरूरी?
स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने influenza preparedness India के लिए केंद्र-राज्य समन्वय पर बार-बार जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जहां केंद्र और राज्य दोनों की साझा जिम्मेदारी है। अगर दोनों स्तरों पर बेहतर तालमेल नहीं होगा तो किसी भी स्वास्थ्य चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटना मुश्किल होगा।
राज्य सरकारें जमीनी स्तर पर काम करती हैं और उन्हें स्थानीय स्थिति की बेहतर जानकारी होती है। वहीं केंद्र सरकार के पास संसाधन, नीति निर्माण और समन्वय की ताकत है। दोनों के मिले-जुले प्रयासों से ही influenza preparedness India मजबूत हो सकती है।
जनता को भी रहना होगा सतर्क
सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम जनता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। मौसम बदलने पर सर्दी-जुकाम को हल्के में न लें, समय पर डॉक्टर से सलाह लें और जरूरत पड़ने पर फ्लू का टीका लगवाएं। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, बार-बार हाथ धोएं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करें।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें, बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखें और अपनी इम्युनिटी मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लें।
स्वास्थ्य मंत्री नड्डा का यह बयान और केंद्र सरकार की यह पहल बताती है कि देश में influenza preparedness India को लेकर गंभीरता से काम हो रहा है। अब देखना होगा कि इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और कैसे केंद्र-राज्य मिलकर इस चुनौती से निपटते हैं।
















