- चाईबासा में थैलेसीमिया पीड़ित 5 बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का मामला।
- मुख्यमंत्री ने दो अधिकारियों को निलंबित कर राज्यभर में जांच के आदेश दिए।
- अब सभी ब्लड बैंकों में केवल ELISA टेस्ट से होगी खून की जांच।
झारखंड के Chaibasa (पश्चिम सिंहभूम) में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी की नींद उड़ा दी है। थैलेसीमिया पीड़ित कुछ बच्चों को HIV-सक्रिय (infected) खून चढ़ाये जाने की सूचना मिलते ही राज्य का स्वास्थ्य प्रशासन जांच मोड में आ गया है।
मामला इस तरह सामने आया कि थैलेसीमिया से पीड़ित एक 7 वर्षीय बच्चे की फ्लोर्गोली टेस्टing के बाद HIV-पॉजिटिव होने की जानकारी मिली। उसके परिवार ने आरोप लगाया कि खून का स्रोत स्थानीय ब्लड बैंक था। इस जांच के बाद चार और बच्चों में भी HIV पाया गया।
क्या हुआ?
- बच्चे को 3 सितम्बर को खून लगाया गया था, जिसके बाद 18 अक्टूबर को HIV-टेस्ट पॉजिटिव पाया गया।
- जांच के दौरान कुल मिलाकर पांच थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में HIV पाया गया।
- घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य के Hemant Soren ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। दो वरिष्ठ मेडिकल अधिकारी को निलंबित किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
मामले के फैलने के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग ने निम्न कदम उठाए हैं।
- Neha Arora (विशेष सचिव, स्वास्थ्य विभाग) के नेतृत्व में उच्च स्तरीय जाँच कमेटी गठित की गई है, जो स्थानीय ब्लड बैंक व ट्रांसफ्यूजन सिस्टम की प्रक्रिया-व्यवस्था देख रही है।
- हर ब्लड बैंक को किट-लैप परीक्षण (rapid test kits) के बजाय केवल ELISA-टेस्ट से ही खून जाँचने का निर्देश दिया गया है। इससे संक्रमण का खतरा कम होगा।
- जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता व सुरक्षा मानदंडों का पालन करने को कहा गया है।
- धनबाद के Shahid Nirmal Mahto Medical College & Hospital (एसएनएमएमसीएच) में भी ब्लड बैंक का औचक निरीक्षण हुआ। उपायुक्त Aditya Ranjan ने कहा कि ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समस्या क्यों गंभीर है?
यह केवल एक स्थानीय मामला नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती समस्या है।
- कई ब्लड बैंक में उन्नत जाँच मशीनें नहीं हैं, जिससे “विन्डो पीरियड” में मौजूद HIV समेत अन्य संक्रमण पकड़ना मुश्किल होता है।
- थैलेसीमिया जैसे बीमारियों में मास-ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है, इसलिए खून की सुरक्षा पहले से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
- अगर खून स्रोत रूप में सुरक्षित नहीं हो, तो रोगी समूह में जानलेवा परिणाम हो सकते हैं।
आगे क्या होगा?
- कमेटी अपनी जाँच पूरी कर जल्द रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी, उसके बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- सभी जिलों में ब्लड बैंकों का ऑडिट होगा और एसओपी (सोप) का ड्राफ्ट तैयार कर उसे फॉलो करवाया जाएगा। Neha Arora ने बताया है कि इस ड्राफ्ट को सभी जिलों के साथ साझा किया जाएगा।
- प्रभावित बच्चों को पूरी चिकित्सा सुविधा मुफ्त में दिए जाने की गारंटी राज्य ने दी है।
इस घटना से हमें क्या सीख मिलती है?
- खून का ट्रांसफ्यूजन सिर्फ एक तकनीकी सेवा नहीं है, बल्कि जीवन-बचाने वाला काम है — इसलिए हर तरह की सुरक्षा जाँच बेहद अहम है।
- स्वास्थ्य संस्थाओं में सिस्टम की कमजोरी तुरंत उजागर हो सकती है; इसलिए उन्हें समय-समय पर महत्त्वपूर्ण ऑडिट और मॉनिटरिंग की जरूरत है।
- रोगियों के साथ संगठन की जवाबदेही बढ़नी जरूरी है ताकि आम लोग भरोसा महसूस करें कि उन्हें सुरक्षित इलाज मिलेगा।
चाईबासा में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को HIV-संक्रमित खून चढ़ने का मामला चिंताजनक है, लेकिन इसे तुरंत उठाया जाना, जांच की शुरुआत और सख्त निर्देश दिखाते हैं कि सरकार इस तरह की त्रुटियों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
अब यह देखना होगा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में कब तक सुधार होगा और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति कैसे रोकी जाएगी।
















