गोवा (पणजी): देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित फिल्म आयोजनों में से एक 56वां अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव IFFI 2025 गोवा की राजधानी पणजी में भव्य समापन समारोह के साथ खत्म हो गया। इस साल का फिल्म महोत्सव एक बार फिर भारतीय और वैश्विक सिनेमा के लिए एक यादगार मंच साबित हुआ। समापन कार्यक्रम में सूचना और प्रसारण सचिव संजय जाजू खास तौर पर मौजूद रहे।
सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने में IFFI की भूमिका
समापन समारोह को संबोधित करते हुए सूचना और प्रसारण सचिव संजय जाजू ने IFFI 2025 की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि IFFI ने सिर्फ फिल्म निर्माताओं और रचनाकारों को एक बेहतरीन मंच ही नहीं दिया है, बल्कि भारत के तिरंगे को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में भी अहम योगदान दिया है।
जाजू ने इस बात पर जोर दिया कि यह महोत्सव भारतीय सिनेमा की ताकत और विविधता को दुनिया के सामने पेश करने का सबसे कारगर माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि फिल्मों के जरिए देश की कला, संस्कृति और परंपराओं को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का यह सिलसिला लगातार मजबूत हो रहा है।
सिनेमा बना सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत का जरिया
संजय जाजू ने फिल्मों के बढ़ते क्रिएटिव बिजनेस और उसकी व्यावहारिक उपयोगिता की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति दोनों को मजबूत करने का काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री न सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा कर रही है, बल्कि देश की सॉफ्ट पावर को भी बढ़ा रही है। IFFI 2025 जैसे आयोजन इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
IFFI 2025 का 56वां संस्करण रहा खास
56वें अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव में देश-विदेश से आए फिल्मकारों, कलाकारों और सिने प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस बार के महोत्सव में विभिन्न भाषाओं और शैलियों की फिल्मों को प्रदर्शित किया गया।
गोवा के खूबसूरत शहर पणजी में आयोजित IFFI 2025 ने एक बार फिर साबित किया कि भारतीय सिनेमा की विविधता और गुणवत्ता वैश्विक मानकों पर खरी उतरती है। महोत्सव के दौरान कई चर्चाएं, मास्टरक्लास और नेटवर्किंग सेशन भी आयोजित किए गए, जिससे युवा फिल्मकारों को सीखने का मौका मिला।
फिल्म उद्योग का बढ़ता कारोबार
भारतीय फिल्म उद्योग आज दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते फिल्म बाजारों में से एक है। हर साल हजारों फिल्में बनती हैं और करोड़ों लोग सिनेमाघरों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इन्हें देखते हैं। IFFI 2025 जैसे आयोजन इस इंडस्ट्री को और भी ज्यादा प्रोफेशनल और ग्लोबल बनाने में मदद कर रहे हैं।
सूचना और प्रसारण सचिव ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सरकार फिल्म उद्योग को हर संभव सहयोग और सुविधाएं मुहैया करा रही है। इससे न सिर्फ बड़े बल्कि छोटे और स्वतंत्र फिल्मकारों को भी अपनी कहानियां सुनाने का मौका मिल रहा है।
IFFI का महत्व और भविष्य
IFFI 2025 हर साल नवंबर-दिसंबर में गोवा में आयोजित होता है और यह भारत का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव है। पिछले कई दशकों से यह महोत्सव भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के बीच एक सेतु का काम कर रहा है।
इस महोत्सव में दुनिया भर से फिल्में आती हैं और भारतीय दर्शकों को विश्व सिनेमा से रूबरू होने का मौका मिलता है। साथ ही, भारतीय फिल्मकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा मंच मिलता है।
भारतीय सिनेमा का उज्ज्वल भविष्य
56वें अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव का समापन भारतीय सिनेमा के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है। गोवा में आयोजित IFFI 2025 के इस भव्य कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारतीय सिनेमा में कहानियां सुनाने की अद्भुत क्षमता है।
IFFI केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान का प्रतीक है। अगले साल होने वाले 57वें संस्करण की तैयारियां जल्द ही शुरू हो जाएंगी और सिने प्रेमियों को फिर से एक शानदार अनुभव का इंतजार है।












