हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में राजकीय प्राथमिक पाठशाला तागी से सामने आए एक बच्चे की पिटाई के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित अध्यापक को निलंबित कर दिया है।
मामला चंबा के विकास खंड मैहला का है, जहां एक शिक्षक पर आरोप है कि उसने स्कूल में एक छोटे बच्चे को इतनी बुरी तरह मारा कि बच्चे का कान का पर्दा फट गया और उसे ऑपरेशन करवाना पड़ा।
बच्चा अस्पताल में भर्ती
परिजनों के अनुसार, घटना के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज चंबा में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि बच्चे के कान को गंभीर चोट पहुंची है और उसका इलाज जारी है।
माता ने बताया कि उनके बेटे को स्कूल के एक अध्यापक ने मामूली गलती पर पीट दिया, जिससे वह घायल हो गया। उन्होंने तुरंत ही मामले की शिकायत शिक्षा विभाग में की थी।
जांच कमेटी ने पाया शिक्षक दोषी
शिकायत मिलते ही उप शिक्षा निदेशक (एलिमेंट्री) चंबा बलबीर सिंह ने तुरंत एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। इस कमेटी ने दो दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें अध्यापक को दोषी पाया गया।
रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने शिक्षक को निलंबित करने का आदेश जारी किया। विभाग ने कहा कि बच्चों के साथ हिंसक व्यवहार किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विभाग की सख्त चेतावनी
उप शिक्षा निदेशक बलबीर सिंह ने इस घटना के बाद सभी शिक्षकों को चेतावनी दी है कि बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार रखना हर अध्यापक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समय-समय पर ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे बच्चों से अनुशासित और सम्मानजनक तरीके से पेश आएं।
उन्होंने कहा —
“शिक्षा सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि व्यवहार से भी मिलती है। अगर शिक्षक ही बच्चों पर हाथ उठाने लगेंगे तो इसका असर उनकी मानसिकता पर पड़ता है। इसलिए विभाग ऐसी घटनाओं को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।”
शिक्षा विभाग हुआ सतर्क
घटना के बाद विभाग ने पूरे जिले के स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि बच्चों के साथ कोई भी अनुचित व्यवहार होने पर तुरंत रिपोर्ट दी जाए। अगर कोई शिक्षक इस तरह की हरकत करता है तो उसके खिलाफ तुरंत सस्पेंशन की कार्रवाई की जाएगी।
समाज में गूंजा संदेश
इस घटना के बाद अभिभावक वर्ग ने भी राहत की सांस ली है कि विभाग ने दो दिन के अंदर कार्रवाई कर एक मिसाल पेश की है। लोगों का कहना है कि इससे अन्य शिक्षकों को भी सीख मिलेगी कि बच्चों पर हाथ उठाना अब जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है।
वहीं, स्थानीय लोगों ने यह भी अपील की है कि स्कूलों में बच्चों को डर या मार से नहीं, बल्कि प्यार और समझ से सिखाने की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए।
















