महाराष्ट्र की संतरा नगरी नागपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है जो बैंकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा में मैनेजर और कर्मचारियों ने मिलकर अपने ही ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी की है। इस Union Bank Fraud Nagpur केस में करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये का घपला किया गया है।
तीन साल बाद खुला राज
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह घोटाला दिसंबर 2019 से मई 2022 के बीच हुआ था, लेकिन इसका खुलासा अब जाकर हुआ है। गणेशपेठ पुलिस थाने में गुरुवार को इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। फिलहाल सभी आरोपी फरार चल रहे हैं।
ऐसे हुआ 1.65 करोड़ का खेल
इस घोटाले को अंजाम देने का तरीका काफी चालाकी भरा था। बैंक के तत्कालीन मैनेजर नंदेश्वर कृष्णराव मंचापुरकर और उनकी टीम ने एक पूरा प्लान बनाया था। पहले बैंक के एजेंट लोगों के पास जाते और उन्हें लोन दिलाने का लालच देते। जब लोग विश्वास कर लेते, तो उन्हें बैंक लाया जाता और सभी जरूरी कागजात ले लिए जाते।
इसके बाद शुरू होता असली खेल। इन कागजातों का इस्तेमाल कर लोगों के नाम पर फर्जी क्रेडिट कार्ड बनवा लिए जाते। फिर इन क्रेडिट कार्ड्स से पैसे निकालकर दूसरे बैंकों में ट्रांसफर कर दिए जाते। आखिर में यह रकम आरोपियों या उनके करीबी लोगों के खातों में पहुंच जाती थी।
44 बेकसूर लोग बने शिकार
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस Union Bank Fraud Nagpur केस में 44 लोगों को निशाना बनाया गया। इन सभी के नाम पर फर्जी क्रेडिट कार्ड बनाए गए और करोड़ों रुपये की ठगी की गई। सबसे दुखद बात यह है कि इन लोगों को पता भी नहीं चला कि उनके नाम पर क्या खेल हो रहा है।
ऑडिट रिपोर्ट से हुआ खुलासा
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश बैंक के वर्तमान मैनेजर संदीप मोतीलाल कुमार (40) ने किया। जब उन्होंने ऑडिट रिपोर्ट की जांच की तो उन्हें कुछ गड़बड़ नजर आई। गहराई से देखने पर पूरा मामला सामने आया और फिर उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी।
ये हैं फरार आरोपी
पुलिस ने जिन 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, उनमें सबसे अहम नाम तत्कालीन शाखा प्रबंधक नंदेश्वर कृष्णराव मंचापुरकर (63) का है। दूसरे नंबर पर बैंक कर्मचारी विनीत ज्ञानेश्वर ठेकडे (44) हैं, जो अभी पुणे में रह रहे हैं।
इसके अलावा प्रशांत जगदीश उके (40) जो फिलहाल मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में हैं, धीरज गजानन गजभिये (54), एजेंट आशीष यशवंत जोगे (39), दत्ता बैजनाथ पांचाल और विमल यशवंत जोगे के नाम भी आरोपियों की लिस्ट में शामिल हैं।
बैंकिंग सिस्टम पर सवाल
यह मामला एक बार फिर बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। जब बैंक के अंदर बैठे लोग ही धोखाधड़ी में शामिल हों, तो आम लोगों का भरोसा कैसे बना रहेगा? खासतौर पर यह Union Bank Fraud Nagpur केस दिखाता है कि कैसे सिस्टम में मौजूद खामियों का फायदा उठाया जा सकता है।
आगे क्या होगा?
अभी सभी आरोपी फरार हैं और पुलिस उन्हें पकड़ने की कोशिश में जुटी है। उम्मीद है कि जल्द ही सभी आरोपी गिरफ्तार हो जाएंगे और पीड़ितों को न्याय मिलेगा। साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसे मामलों से सबक लेते हुए बैंकिंग सिस्टम में और सख्ती लाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
यह मामला सभी बैंक ग्राहकों के लिए एक चेतावनी भी है कि वे अपने बैंक स्टेटमेंट्स और क्रेडिट कार्ड डिटेल्स पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें।
















