मध्य प्रदेश के धार जिले में एक बार फिर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। लोकायुक्त इंदौर ने बदनावर तहसील के एक पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह patwari bribe case indore क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम भीमपुरा के 60 वर्षीय किसान नारायण सिंह परिहार के पास पुश्तैनी खेती की जमीन है। उनकी समस्या यह थी कि जमीन का नक्शा मौके पर मौजूद कब्जे के हिसाब से सही नहीं था। इस गड़बड़ी को ठीक करवाने के लिए नारायण सिंह ने करीब डेढ साल पहले एसडीएम ऑफिस बदनावर में आवेदन दिया था।
लेकिन डेढ साल बीत जाने के बाद भी जब उनके आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो वे परेशान होकर पटवारी हल्का नंबर 47 (नया-75) वनवासा के पटवारी सुनील बेनल से मिले। यहीं से शुरू हुआ रिश्वत का खेल।
पटवारी ने मांगे 50 हजार रुपये
जब नारायण सिंह पटवारी सुनील बेनल से मिले तो उन्होंने साफ-साफ कहा कि अगर आपकी फाइल एसडीएम ऑफिस भिजवानी है और नक्शा सुधार का काम करवाना है, तो 50 हजार रुपये देने होंगे। एक आम किसान के लिए यह रकम बहुत बड़ी थी। जब नारायण सिंह ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो बातचीत में रिश्वत की रकम घटकर 20 हजार रुपये पर आ गई।
लोकायुक्त में की शिकायत
परेशान किसान ने हिम्मत दिखाते हुए इंदौर लोकायुक्त कार्यालय के पुलिस अधीक्षक विशेष प्रतिष्ठान श्री राजेश सहाय के पास शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जांच की गई और सत्यापन में यह बात सही पाई गई कि पटवारी वाकई रिश्वत की मांग कर रहा है।
ट्रैप टीम ने रचा जाल
19 जनवरी 2026 को लोकायुक्त इंदौर ने ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। एक विशेष दल का गठन किया गया जिसमें कार्यवाहक निरीक्षक सचिन पटेरिया, कार्यवाहक प्रआर विवेक मिश्रा, आरक्षक विजय कुमार, शैलेंद्र सिंह बघेल, चालक शेरसिंह ठाकुर और आरक्षक कृष्णा अहिरवार शामिल थे।
योजना के मुताबिक नारायण सिंह को 20 हजार रुपये के नोट दिए गए जिन पर विशेष रसायन लगाया गया था। तय समय पर जब पटवारी सुनील बेनल ने किसान से रिश्वत की रकम ली, तभी लोकायुक्त की टीम ने धावा बोल दिया।
रंगे हाथों हुई गिरफ्तारी
पटवारी सुनील बेनल को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। 46 वर्षीय सुनील बेनल जो सरस्वती कॉलोनी, पेटलावद रोड, बदनावर में रहता है, अब भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत मुकदमे का सामना कर रहा है।
जनता में संदेश
यह patwari bribe case indore लोकायुक्त की सक्रियता का उदाहरण है। इस मामले से यह साफ होता है कि सरकारी कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करके आम लोगों को परेशान करते हैं और गैरकानूनी तरीके से पैसे वसूलते हैं।
नारायण सिंह जैसे किसान जो डेढ साल से अपने जायज काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, उन्हें रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जा रहा था। लेकिन उन्होंने हिम्मत दिखाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई।
क्या कहता है कानून?
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत लेना या मांगना संज्ञेय अपराध है। इसमें कम से कम 6 महीने से लेकर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
यह मामला मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की एक कड़ी है और जनता को संदेश देता है कि अगर कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत की मांग करे तो चुप न रहें, बल्कि लोकायुक्त या एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराएं।
















