बिहार के मुंगेर जिले में एक बड़ा मामला सामने आया है जहां एक क्यूआरटी (Munger QRT) के सिपाही को अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस घटना ने पुलिस विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मुंगेर के नया रामनगर थाना क्षेत्र के कन्हैयाचक पाटम गांव में शनिवार शाम को एक अजीब घटना घटी। क्यूआरटी के पांच जवान बिना वर्दी पहने गांव में पहुंचे। इन जवानों का नेतृत्व सिपाही सुरेन्द्र कुमार कर रहे थे। अब सबसे बड़ी बात यह है कि इस छापेमारी की न तो स्थानीय थाने को जानकारी दी गई और न ही किसी बड़े अधिकारी को बताया गया।
पुलिस की जांच में पता चला कि ये जवान कथित तौर पर शराब माफिया से अवैध वसूली करने पहुंचे थे। मौके पर शराब के साथ वीडियो बनाकर पैसे की डिमांड की जा रही थी। जब बात नहीं बनी तो मामला बिगड़ गया।
कैसे हुई झड़प?
शराब माफिया और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विवाद बढ़ गया। मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इस दौरान क्यूआरटी के सिपाही सोनू कुमार राय को चोटें आईं और पुलिस की बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि झड़प के दौरान सिपाही सुरेन्द्र कुमार की सरकारी पिस्तौल गिर गई, जिसे किसी ने उठाकर छिपा दिया।
टमाटर के खेत से मिली पिस्तौल
रविवार को पुलिस की कड़ी मेहनत रंग लाई। कन्हैयाचक गांव के एक टमाटर के खेत से लूटी गई सरकारी पिस्तौल बरामद कर ली गई। एसडीपीओ के नेतृत्व में देर रात तक चली छापेमारी आखिरकार सफल रही।
कितने लोग हुए गिरफ्तार?
इस मामले में पुलिस ने कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें क्यूआरटी सिपाही सुरेन्द्र कुमार के अलावा सात अन्य लोग शामिल हैं:
- भुट्टो यादव
- गुड्डू कुमार
- छोटू कुमार
- वार्ड सदस्य अभिषेक कुमार उर्फ मनीष कुमार
- विनय कुमार यादव
- मोनू राज
- पवन कुमार
सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज
मुंगेर के पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने बताया कि इस घटना में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
पहली एफआईआर नया रामनगर के थानाध्यक्ष रविन्द्र कुमार वर्मा की शिकायत पर क्यूआरटी सिपाही सुरेन्द्र कुमार के खिलाफ दर्ज की गई है। इसमें बिना वर्दी के छापेमारी करने और शराब माफिया से अवैध वसूली के आरोप लगाए गए हैं।
दूसरी एफआईआर घायल सिपाही सोनू कुमार राय के बयान पर दर्ज हुई है। इसमें 13 नामजद और 25-30 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस विभाग के लिए शर्मनाक
यह घटना बिहार पुलिस के लिए काफी शर्मनाक है। एक ओर जहां पुलिस को कानून का पालन करवाना चाहिए, वहीं खुद पुलिसकर्मी ही अवैध वसूली में लिप्त पाए गए। बिना अनुमति और बिना वर्दी के छापेमारी करना पुलिस नियमों का खुला उल्लंघन है।
अभी भी फरार हैं कई आरोपी
पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी है कि बाकी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। पुलिस टीम अलग-अलग जगहों पर छापे मार रही है।
जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं पुलिस के प्रति लोगों के विश्वास को कम करती हैं। जब खुद पुलिसवाले गलत काम में शामिल हों तो आम आदमी किससे न्याय की उम्मीद करे?
आगे क्या होगा?
अब इस मामले की गहन जांच चल रही है। पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आरोपी सिपाही के खिलाफ क्या सजा होती है और क्या इस मामले में और भी पुलिसकर्मी शामिल निकलते हैं।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह आम नागरिक हो या खाकी वर्दी में हो।
















