Lucknow STF drug: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस बार जिसे पकड़ा है, वो कोई मामूली तस्कर नहीं है। ये तो पूरा का पूरा 100 करोड़ रुपये की ड्रग चेन का बड़ा खिलाड़ी निकला है। गोमतीनगर के ग्वारी चौराहे से गिरफ्तार किया गया अमित टाटा देखने में भले ही एक आम इंसान लगे, लेकिन अंदर से ये पूरे नशे के नेटवर्क को चला रहा था।
जब STF उसे अपने दफ्तर ले गई, तो एक-एक करके उसके सारे राज खुलने लगे। पता चला कि अमित टाटा सिर्फ एक स्थानीय तस्कर नहीं था, बल्कि दुबई में बैठे शुभम जायसवाल के सीधे संपर्क में था। मतलब साफ है – यहां जमीन पर धंधा अमित करता था और ऊपर से पूरा ऑपरेशन दुबई से कंट्रोल होता था।
कैसे चलता था ये पूरा खेल?
अमित टाटा ने पूछताछ के दौरान बताया कि झारखंड और वाराणसी में जो मेडिकल फर्में खोली गई थीं, वो असल में दवा बेचने के लिए नहीं थीं। ये तो नशे की तस्करी के अड्डे थे। कागजों में मालिक तो अमित दिखता था, लेकिन असल में कंट्रोल पूरी तरह तस्करों के हाथ में था।
2024 में सबसे पहले धनबाद में ‘देवकृपा मेडिकल एजेंसी’ नाम से एक फर्म खोली गई। इसके बाद वाराणसी में ‘श्री मेडिकल’ के नाम से लाइसेंस लेकर बड़े पैमाने पर फेन्सेडिल कफ सिरप का धंधा शुरू किया गया। ये कफ सिरप दिखने में आम दवाई लगता था, लेकिन अंदर कोडीन मिक्स्चर था, जो एक खतरनाक नशीला पदार्थ है।
100 करोड़ का कारोबार कैसे चलता था?
जांच में पता चला कि एबॉट कंपनी से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत का कफ सिरप खरीदा गया था। इस सिरप को फिर अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और नेपाल तक भेजा जाता था। ये सिर्फ एक राज्य या शहर की बात नहीं थी, बल्कि पूरा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क था।
मुनाफे के लालच में अमित टाटा ने इस अवैध कारोबार में कदम रखा था। धीरे-धीरे उसका नेटवर्क इतना बड़ा हो गया कि वो कई राज्यों में फैल गया। लखनऊ में रहकर वो इस नेटवर्क को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में था, लेकिन STF की नजर से बच नहीं पाया।
STF की कार्रवाई और क्या-क्या बरामद हुआ?
Lucknow STF drug की इस बड़ी कार्रवाई में अमित टाटा के पास से एक फॉर्च्यूनर गाड़ी, कई मोबाइल फोन, नकदी और कई डिजिटल दस्तावेज बरामद किए गए। ये दस्तावेज पूरे नेटवर्क की जानकारी देने वाले थे। इनमें लेन-देन के रिकॉर्ड, संपर्क नंबर और सप्लाई चेन की पूरी डिटेल थी।
दिलचस्प बात ये है कि अमित के खिलाफ पहले भी लखनऊ और वाराणसी में कफ सिरप तस्करी के मामले दर्ज हैं। इसके अलावा अमित टाटा के पिता अशोक कुमार सिंह और उनकी फर्म पर भी FIR दर्ज है। यानी ये पूरा परिवार ही इस धंधे में शामिल था।
ड्रग इंस्पेक्टर ने क्या कहा?
जौनपुर के ड्रग इंस्पेक्टर रजत पांडे ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि ये सिर्फ एक छोटा सा मामला नहीं है। ये एक बड़ा सिंडिकेट है जो कई राज्यों और देशों तक फैला हुआ है। कफ सिरप के नाम पर नशे की तस्करी का ये धंधा बहुत व्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा था।
दुबई कनेक्शन की पूरी कहानी
सबसे बड़ी बात ये है कि इस पूरे नेटवर्क को दुबई से कंट्रोल किया जा रहा था। शुभम जायसवाल नाम का शख्स दुबई में बैठकर पूरे ऑपरेशन को संभालता था। अमित टाटा उसका भारत में मुख्य संपर्क था। दुबई से निर्देश आते थे और अमित उन्हें जमीन पर लागू करता था।
ये पूरा सेटअप इतना प्रोफेशनल था कि कई महीनों तक पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। लेकिन उत्तर प्रदेश STF की लगातार निगरानी और गुप्त सूचनाओं के आधार पर आखिरकार अमित टाटा को गिरफ्तार कर लिया गया।
अब क्या होगा आगे?
STF अब दुबई कनेक्शन सहित पूरे नेटवर्क के तार खंगाल रही है। जांच एजेंसियां ये जानने की कोशिश कर रही हैं कि कफ सिरप का ये अवैध कारोबार किन-किन राज्यों और देशों तक फैला हुआ है। किन-किन फर्मों और कंपनियों ने इस धंधे में मदद की है, और कितने लोग इस चेन का हिस्सा हैं।
अमित टाटा की गिरफ्तारी के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही कई बड़े नाम भी पुलिस के शिकंजे में आ सकते हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरफ्तारी से पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो जाएगा।
क्या है कोडीन मिक्स कफ सिरप?
कोडीन मिक्स कफ सिरप एक प्रकार की दवा है जिसका इस्तेमाल खांसी के इलाज में किया जाता है। लेकिन इसमें मौजूद कोडीन एक नशीला पदार्थ है। अधिक मात्रा में लेने पर ये गंभीर लत और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। इसीलिए इसकी बिक्री पर सख्त नियम हैं।
लेकिन तस्कर इसे अवैध तरीके से बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। खासकर युवाओं में ये नशे का एक लोकप्रिय माध्यम बन गया है, जो बेहद चिंताजनक है।
समाज पर असर
इस तरह के नशीले पदार्थों की तस्करी सिर्फ कानूनी अपराध नहीं है, बल्कि ये समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा है। खासकर युवा पीढ़ी इसका सबसे ज्यादा शिकार होती है। एक बार इस लत में फंसने के बाद बाहर निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है।
यूपी STF की ये कार्रवाई इस दिशा में एक बड़ा कदम है। उम्मीद है कि इससे दूसरे तस्करों को भी सबक मिलेगा और वो इस अवैध धंधे से दूर रहेंगे।
कानून की लंबी पकड़
उत्तर प्रदेश STF की ये कार्रवाई दिखाती है कि चाहे नेटवर्क कितना भी बड़ा हो, कानून की पकड़ से कोई नहीं बच सकता। अमित टाटा की गिरफ्तारी इस बात का सबूत है कि पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार नजर रखे हुए हैं।
उम्मीद है कि जल्द ही इस सिंडिकेट के बाकी सदस्य भी पकड़े जाएंगे और समाज को इस खतरे से मुक्ति मिलेगी।
















