- हकीमी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान वैष्णवी चौहान की मौत, महीनों बाद भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं
- उसी अस्पताल परिसर में पति नागेश चौहान की संदिग्ध मौत, हालात अब भी स्पष्ट नहीं
- लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद अस्पताल संचालन जारी, प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में सामने आया Hakimi Hospital Burhanpur Death Case अब सिर्फ एक अस्पताल या एक परिवार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य सिस्टम और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। हकीमी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान वैष्णवी चौहान की मौत और कुछ महीनों बाद उसी अस्पताल परिसर में उनके पति नागेश चौहान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने जिले में हड़कंप मचा दिया है।
शनिवार दोपहर करीब 2 बजे पीड़ित परिवार ने प्रेसवार्ता कर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस पूरे Hakimi Hospital Burhanpur Death Case की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
दो महीने बाद भी सन्नाटा, कार्रवाई नदारद
पीड़ित परिवार के सदस्य और अधिवक्ता महेश चौहान ने प्रेसवार्ता में साफ कहा कि घटना को दो महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब तक न तो किसी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम उठाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। कुछ निजी अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त करने की बातें सामने आईं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सवाल यह है कि अगर Hakimi Hospital Burhanpur Death Case इतना गंभीर है, तो फिर जांच और कार्रवाई में इतनी देरी क्यों?
लाइसेंस निरस्त, फिर भी अस्पताल चालू?
जिला प्रशासन ने जिन दो अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किए हैं, उनमें एक हकीमी अस्पताल और दूसरा श्री बालाजी अस्पताल शामिल है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद हकीमी अस्पताल में लगातार स्टाफ की शिफ्ट लगती रही और कामकाज भी चलता रहा।
परिवार का कहना है कि अगर अस्पताल का लाइसेंस रद्द हो चुका है, तो वहां इलाज किस आधार पर हो रहा था? क्या यही प्रशासन की सख्ती है? यही सवाल Hakimi Hospital Burhanpur Death Case को और ज्यादा गंभीर बना देता है।
श्री बालाजी अस्पताल पर भी उठे सवाल
सिर्फ हकीमी अस्पताल ही नहीं, बल्कि श्री बालाजी अस्पताल को लेकर भी कई अनियमितताओं की बात सामने आई है। आरोप है कि अस्पताल में कोई स्पेशलिस्ट डॉक्टर मौजूद नहीं था, फिर भी इलाज किया जा रहा था। प्रशासन ने इस अस्पताल का भी लाइसेंस निरस्त कर दिया, लेकिन इसके बावजूद ओपीडी और इलाज जारी रहा।
अब सवाल यह उठता है कि जब लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी अस्पताल चल रहे हैं, तो आम लोगों की जान की सुरक्षा कौन करेगा? क्या Hakimi Hospital Burhanpur Death Case से भी सिस्टम कुछ सीख नहीं लेना चाहता?
11 नवंबर 2025: ऑपरेशन के दौरान वैष्णवी की मौत
परिवार के अनुसार 11 नवंबर 2025 को वैष्णवी चौहान का हकीमी अस्पताल में गर्भाशय का ऑपरेशन किया गया था। आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में भारी लापरवाही बरती गई, जिसके चलते उनकी असमय मौत हो गई।
परिजनों का कहना है कि इस ऑपरेशन के दौरान मौजूद डॉक्टरों की लापरवाही ही वैष्णवी की मौत की मुख्य वजह है। इस मामले में डॉ. अनुपमा दीक्षित, डॉ. आनंद दीक्षित, डॉ. रेहाना बोहरा, डॉ. मुफज्जल बोहरा और कुछ अकुशल डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
इतने गंभीर Hakimi Hospital Burhanpur Death Case में अब तक न तो किसी डॉक्टर पर एफआईआर हुई और न ही परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी गई।
31 दिसंबर 2025: पति नागेश चौहान की रहस्यमयी मौत
इस मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया जब 31 दिसंबर 2025 को वैष्णवी के पति नागेश चौहान की भी उसी अस्पताल परिसर में मौत हो गई। उनकी मौत अस्पताल के तीसरे माले की टैरिस पर हुई, जहां से एक बंदूक और धारदार हथियार मिलने की बात सामने आई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये हथियार वहां आए कैसे? सूत्रों का दावा है कि नागेश की मौत मेडिकल इंस्ट्रूमेंट से लगे घाव के कारण हुई। इस घटना में डॉक्टर बोहरा के घायल होने की भी जानकारी सामने आई, लेकिन पुलिस की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया।
पुलिस की चुप्पी, परिवार का आक्रोश
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस न तो मीडिया को जानकारी दे रही है और न ही परिवार को। अभी तक शॉर्ट पीएम रिपोर्ट तक परिजनों को नहीं सौंपी गई है। ऐसे में Hakimi Hospital Burhanpur Death Case को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है।
परिवार और हिंदूवादी संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
सिस्टम पर उठते बड़े सवाल
लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद अस्पताल कैसे चल रहे हैं?
- दोषी डॉक्टरों पर अब तक एफआईआर क्यों नहीं?
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट परिवार को क्यों नहीं दी गई?
- नागेश चौहान की मौत की सच्चाई क्या है?
ये सभी सवाल Hakimi Hospital Burhanpur Death Case को सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की परीक्षा बना देते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और कब इस मामले में सख्त कार्रवाई होती है।















