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Dr. Shaheen Shahid: मेधावी छात्रा से आतंकी साजिशकर्ता तक का सफर? दिल्ली बम ब्लास्ट केस का चौंकाने वाला ‘लेडी कनेक्शन’

लखनऊ की टॉपर, कानपुर की असिस्टेंट प्रोफेसर Dr. Shaheen Shahid कैसे बन गईं Jaish-e-Mohammed के महिला विंग की लीडर? जानें दिल्ली बम ब्लास्ट केस में अल फलाह यूनिवर्सिटी कनेक्शन की पूरी कहानी।

Updated at: Mon, 17 Nov 2025, 7:02 PM (IST)
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देश की राजधानी दिल्ली में हुए एक बड़े बम ब्लास्ट के मामले में जब एक महिला डॉक्टर का नाम सामने आया, तो हर कोई सन्न रह गया। यह कहानी है Dr. Shaheen Shahid की, जो कभी उत्तर प्रदेश के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं, लेकिन आज वह जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) के महिला विंग की कथित लीडर होने के आरोप में सलाखों के पीछे हैं।
यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि एक ऐसे गहरे और खतरनाक नेटवर्क के भंडाफोड़ की शुरुआत है, जिसका तार शिक्षा जगत से लेकर सीधे आतंकी संगठनों से जुड़ रहा है।

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पहला अध्याय: लखनऊ की मेधावी बेटी (The Bright Beginnings)

Dr. Shaheen Shahid का जन्म और शुरुआती जीवन किसी भी सामान्य, महत्वाकांक्षी भारतीय लड़की जैसा ही था। उनका संबंध लखनऊ के कैसरबाग इलाके के एक साधारण परिवार से था। उनके पिता, शाहिद अहमद अंसारी, उत्तर प्रदेश हेल्थ डिपार्टमेंट के रिटायर्ड कर्मचारी थे। बचपन से ही शाहीन का एक ही सपना था – डॉक्टर बनना।

लखनऊ के लालबाग स्थित सरकारी गर्ल्स स्कूल में वह शुरू से ही पढ़ने में तेज थीं। 10वीं और 12वीं, दोनों कक्षाओं में उन्होंने टॉप किया। यह दिखाता है कि वह कितनी फोकस्ड और इंटेलिजेंट छात्रा थीं। अपनी लगन के दम पर, उन्होंने कॉमन प्री-मेडिकल टेस्ट (CPMT) जैसी मुश्किल परीक्षा पास की और इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।

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सफलता की सीढ़ियाँ: MBBS से MD और प्रोफेसर तक

Dr. Shaheen Shahid ने 1996 में अपनी MBBS की पढ़ाई शुरू की और 2002 तक पूरी कर ली। उन्होंने सिर्फ MBBS तक ही अपनी पढ़ाई सीमित नहीं रखी, बल्कि फार्माकोलॉजी (Pharmacology) में MD की डिग्री भी हासिल की। यह स्पष्ट था कि शिक्षा के क्षेत्र में उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी।

MD पूरी करने के बाद, उन्होंने प्रतिष्ठित यूपी लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा भी पास की। इसी के आधार पर उन्हें कानपुर के जाने-माने गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल (GSVM) मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति मिली। यह किसी भी मध्यवर्गीय परिवार की बेटी के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

प्रोफेसर के रूप में उनका करियर आगे बढ़ा। कुछ समय कन्नौज मेडिकल कॉलेज में बिताने के बाद, वह फिर कानपुर लौट आईं। वह एक सम्मानित डॉक्टर और शिक्षिका थीं, जिनका भविष्य उज्जवल माना जा रहा था।

2013: गुमनामी और जीवन का यू-टर्न

जीवन में बड़ा मोड़ 2013 के आसपास आया। जो डॉक्टर और असिस्टेंट प्रोफेसर अपने काम के प्रति इतनी समर्पित थी, वह अचानक काम से गायब हो गईं। किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ। यह गुमनामी इतनी गहरी थी कि कॉलेज को अंततः 2021 में उनकी सेवा समाप्त करनी पड़ी।

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इस बीच, उनकी निजी जिंदगी में भी उथल-पुथल थी। उनकी शादी मुंबई के एक डॉक्टर से हुई थी, लेकिन यह रिश्ता टूट गया और वे अलग हो गए। इसी दौर में, Dr. Shaheen Shahid ने फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी (Al Falah University) में नौकरी करना शुरू कर दिया।

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सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, फरीदाबाद में उनकी जिंदगी ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

अल फलाह यूनिवर्सिटी और जैश-ए-मोहम्मद कनेक्शन

फरीदाबाद में नौकरी के दौरान ही, Dr. Shaheen Shahid का संपर्क कथित तौर पर मुजम्मिल नामक एक संदिग्ध व्यक्ति से हुआ, जिसका सीधा कनेक्शन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) जैसे खतरनाक आतंकी संगठन से था। यहीं से शुरू हुई उनकी दूसरी, और खौफनाक दुनिया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, शाहीन धीरे-धीरे जैश के महिला विंग, जिसे “जमात-उल-मोमिनात” कहा जाता है, की लीडर बन गईं। उनका काम सिर्फ नेतृत्व करना नहीं था, बल्कि जैश के लिए नेटवर्क बनाना और सबसे खतरनाक, पढ़ी-लिखी और अन्य महिलाओं को संगठन में भर्ती करना था। एक प्रोफेसर, जिसने ज्ञान बांटा, अब वह दहशत का बीज बोने लगी।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि शाहीन का जैश के आतंकवादी नेटवर्क के साथ सीधा संबंध था। उन्होंने अपने पद और पहचान का इस्तेमाल संगठन को मजबूत करने और उसकी पहुंच बढ़ाने के लिए किया।

दिल्ली बम ब्लास्ट और फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़

Dr. Shaheen Shahid की गिरफ्तारी फरीदाबाद में चल रहे एक बड़े टेरर मॉड्यूल के भंडाफोड़ के दौरान हुई। यह मॉड्यूल कितना खतरनाक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, हथियार और कई अन्य संदिग्ध चीजें बरामद हुईं।

जांच में यह भी पता चला कि शाहीन के गहरे संबंध फरीदाबाद के अन्य संदिग्ध डॉक्टरों से थे, जिनमें डॉ. मुजम्मिल गनई का नाम प्रमुख है।

सबसे सनसनीखेज खुलासा यह था कि उनकी कार से भी हथियार बरामद हुए थे। इससे भी बड़ी बात, वह Delhi Bomb Blast में शामिल अन्य आरोपियों के लगातार संपर्क में थीं। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि वह सिर्फ एक मोहरा नहीं थीं, बल्कि इस बड़ी आतंकी साजिश में उनकी केंद्रीय भूमिका थी। वह दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके के आरोपियों से संपर्क में थीं, जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

Dr. Shaheen Shahid का अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा होना और वहां नौकरी करना, सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ। यह दिखाता है कि किस तरह आतंकी संगठन अब शिक्षा और प्रतिष्ठित संस्थानों का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को फैलाने के लिए कर रहे हैं।

गहन जांच और अनसुलझे सवाल

फिलहाल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य सुरक्षा एजेंसियां Dr. Shaheen Shahid की सभी गतिविधियों की गहन जांच कर रही हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि एक मेधावी छात्रा और सफल प्रोफेसर कैसे, कब और किन कारणों से इस खतरनाक रास्ते पर चली गई।

मुख्य सवाल हैं:

  • व्यवहार में बदलाव: किस बात ने उन्हें एक सादे जीवन से पूरी तरह से मोड़ दिया?
  • निजी जीवन से अलगाव: 2013 में अचानक काम छोड़कर गायब हो जाने और निजी जीवन से हटने के पीछे क्या वजह थी?
  • संदिग्ध संपर्क: मुजम्मिल और अन्य आतंकी नेटवर्क से उनका संपर्क कैसे स्थापित हुआ?

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, उनके इस आपराधिक राह पर जाने के पीछे उनके व्यवहार में आया बदलाव, अचानक निजी जीवन से कट जाना और फरीदाबाद में बने संदिग्ध संपर्क ही मुख्य कारण हैं।

आतंक की राह पर एक डॉक्टर, समाज के लिए चेतावनी

इस केस ने एक बार फिर देश की सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। Dr. Shaheen Shahid की कहानी एक चेतावनी है कि आतंकी संगठन अब किसी भी वर्ग या पेशे के लोगों को अपने जाल में फंसा सकते हैं।

एक डॉक्टर, एक प्रोफेसर, जिसका काम जीवन बचाना था, वह अब आतंक के दलदल में फंस चुकी है। NIA इस पूरे नेटवर्क की जड़ें तलाश रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश में ऐसी कोई भी Terror Module सक्रिय न रह सके।

Dr. Shaheen Shahid की गिरफ्तारी देश में सक्रिय Jaish-e-Mohammed नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है, और जांच एजेंसियां जल्द ही इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की उम्मीद कर रही हैं।

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