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Devpur Double Murder Case: 7 साल बाद आया फैसला, पूर्व नगराध्यक्ष सहित 11 दोषियों को दोहरी उम्रकैद

Dhule Devpur Double Murder Case में 7 साल बाद बड़ा फैसला। जिला अदालत ने पूर्व नगराध्यक्ष बाजीराव पवार समेत 11 आरोपियों को दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई। जानिए पूरा मामला।

Updated at: Fri, 13 Mar 2026, 8:31 AM (IST)
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महाराष्ट्र के धुले जिले में साल 2018 में हुए बहुचर्चित Devpur Double Murder Case में आखिरकार 7 साल बाद अदालत ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। इस सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने पूर्व नगराध्यक्ष बाजीराव पवार समेत कुल 11 आरोपियों को दोषी करार देते हुए दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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अदालत के इस फैसले के बाद पूरे धुले जिले के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से चल रही सुनवाई के बाद आए इस निर्णय को न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

2018 में हुआ था सनसनीखेज दोहरा हत्याकांड

दरअसल, यह मामला धुले शहर के देवपुर इलाके का है। साल 2018 में रावसाहेब पाटिल और उनके बेटे वैभव पाटिल की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।
इस घटना ने उस समय पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और राजनीतिक हलकों में भी इसकी काफी चर्चा हुई थी।

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दोनों की हत्या के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए व्यापक जांच शुरू की थी। जांच के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और धीरे-धीरे इस केस की परतें खुलती चली गईं।

पूर्व नगराध्यक्ष समेत 11 आरोपी दोषी

इस मामले की सुनवाई धुले की जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयश्री पुलाटे की अदालत में चल रही थी। लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

अदालत ने इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता माने जा रहे पूर्व नगराध्यक्ष बाजीराव पवार सहित कुल 11 आरोपियों को दोषी ठहराया है।
सभी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120 (बी) के तहत अपराध का दोषी माना गया।

सभी दोषियों को दोहरी उम्रकैद

कोर्ट ने सभी 11 दोषियों को दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

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इसके अलावा अदालत ने एक ऐसे व्यक्ति को भी दोषी माना है जिसने आरोपियों को फरार होने में मदद की थी। उसे 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।

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हालांकि इस मामले में एक आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।

32 गवाहों के आधार पर कोर्ट का फैसला

सरकारी पक्ष के अनुसार, इस पूरे मामले में अदालत ने मजबूत सबूतों और गवाहों के बयानों को अहम आधार माना।
जिला सरकारी वकील देवेंद्रसिंह तंवर ने बताया कि अदालत ने 32 गवाहों के बयान और जांच के दौरान जुटाए गए ठोस सबूतों के आधार पर यह फैसला सुनाया है।

सरकारी पक्ष का कहना है कि यह हत्याकांड राजनीतिक रंजिश और पुरानी दुश्मनी के कारण रचा गया था। इसी वजह से इस मामले को शुरुआत से ही काफी संवेदनशील माना जा रहा था।

जांच अधिकारियों की भूमिका रही अहम

इस केस की जांच उस समय की पुलिस टीम ने की थी। तत्कालीन जांच अधिकारी सरिता भांड और सतीश गोराडे ने मामले से जुड़े अहम सबूत जुटाए थे।

पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूत और गवाहों के बयान इस केस में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए और अदालत ने इन्हें फैसले में महत्वपूर्ण आधार माना।

हाईकोर्ट में अपील की तैयारी

सरकारी पक्ष ने संकेत दिए हैं कि जो आरोपी इस मामले में बरी हुआ है या जिन्हें कम सजा मिली है, उनके खिलाफ अब बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।

फैसले के बाद पूरे महाराष्ट्र में चर्चा

धुले के Devpur Double Murder Case में आए इस फैसले के बाद पूरे जिले में हलचल देखी जा रही है।
लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कानूनी जानकारों का भी मानना है कि यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम उदाहरण के तौर पर देखा जाएगा।

करीब सात साल बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि चाहे कितना भी समय क्यों न लगे, लेकिन कानून के हाथ आखिरकार अपराधियों तक पहुंच ही जाते हैं।

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Anil Borade

महाराष्ट्र के धूलिया जिले से हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे ज़मीनी हकीकत को उजागर करने वाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं और सामाजिक मुद्दों, राजनीति व जनहित से जुड़े विषयों पर गहरी पकड़ रखते हैं। वर्तमान में वे प्रतिष्ठित नेशनल न्यूज़ चैनल भारत 24 में संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे Fact Finding के धूलिया जिला ब्यूरो के प्रमुख भी हैं, जहाँ से वे विश्वसनीय, तथ्यपरक और निष्पक्ष खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं।

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