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Burhanpur Murder Case: DNA टेस्ट से खुला हत्या का राज! पैरा कमांडो ने कैसे रची थी खौफनाक साजिश

किसी और को मारकर खुद मृत दिखाने की चाल! Burhanpur Murder Case में पैरा कमांडो की चौंकाने वाली साजिश। कैसे पकड़ा गया 30,000 का इनामी? अभी पढ़ें

Updated at: Sun, 07 Dec 2025, 8:51 PM (IST)
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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में एक साल पहले हुए अंधे कत्ल (Burhanpur Murder Case) के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। लालबाग पुलिस ने डेढ़ साल की मेहनत के बाद 30,000 रुपये के इनामी आरोपी हुसन सिंह को उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार किया है। यह मामला जितना रहस्यमय था, उतनी ही दिलचस्प इसकी कहानी भी है।

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कैसे शुरू हुआ यह रहस्यमय मामला?

25 मई 2024 की बात है। बुरहानपुर के कुंडी भंडारा इलाके में एक खेत में एक शख्स की अधजली लाश मिली। शव इतना जला हुआ था कि उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया था। पहली नजर में यह एक साधारण हत्या का मामला लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने जांच शुरू की, मामला और भी उलझता चला गया।

जब पुलिस ने लाश की तलाशी ली, तो पैंट की पिछली जेब से एक पर्स मिला। इस पर्स में हुसन सिंह नाम के शख्स का आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज थे, साथ ही एक मोबाइल नंबर भी था। शुरुआत में पुलिस को लगा कि मृतक की पहचान हो गई है, लेकिन जब जांच आगे बढ़ी तो असली सच सामने आया।

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पैरा कमांडो की चालाकी भरी साजिश

जब पुलिस ने हुसन सिंह के परिवार से संपर्क किया तो उसके पिता गंगाराम और भाई प्रद्युमन ने लाश की पहचान करने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि हुसन तो पनवेल में अपने दोस्त गणेश शर्मा के साथ होटल चलाता है और वह जिंदा है। यहीं से इस Burhanpur Murder Case में एक नया मोड़ आया।

पुलिस की टीम तुरंत महाराष्ट्र के पनवेल पहुंची और गणेश शर्मा से पूछताछ की। पूछताछ में गणेश ने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया। उसने बताया कि हुसन और उसने मिलकर यह घिनौना अपराध किया था।

ऐसे अंजाम दिया गया कत्ल

गणेश शर्मा ने बताया कि 22 मई 2024 को वे दोनों महाराष्ट्र के मनमाड से एक मजदूर को काम और शराब का लालच देकर बुरहानपुर लेकर आए। इस बेकसूर मजदूर को कुंडी भंडारा के एक खेत में लेजाकर शराब पिलाई गई। जब वह नशे में धुत हो गया, तो दोनों ने मिलकर उसका गला घोंट दिया।

इतना ही नहीं, अपनी पहचान छुपाने के लिए हुसन सिंह ने चालाकी से अपना आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज मृतक की जेब में रख दिए। फिर पहचान मिटाने के लिए शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इस पूरी साजिश का मकसद था किसी और को फंसाना और खुद बच निकलना।

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एक साल बाद हुई मृतक की पहचान

इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती थी मृतक की सही पहचान करना। पुलिस कांस्टेबल भरत देशमुख ने इसमें अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में पिछले एक साल के गुमशुदा लोगों की जानकारी जुटाई। CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) के जरिए काम करते हुए वे अलग-अलग थानों में गए।

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करीब एक साल बाद 21 जुलाई 2025 को उन्हें कामयाबी मिली। संभाजीनगर के मुकुंदवाडी थाने में दर्ज एक गुमशुदा रिपोर्ट से मेल खाया। मृतक की पहचान कैलाश सावले (33 वर्ष) के रूप में हुई। DNA टेस्ट से यह पुष्टि हो गई कि वह कैलाश की ही लाश थी।

डेढ़ साल तक फरार रहा शातिर आरोपी

पुलिस ने गणेश शर्मा को तो पकड़ लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी हुसन सिंह फरार हो गया। हुसन कोई साधारण अपराधी नहीं था – वह 10वीं पैरा स्पेशल फोर्स में 6 साल तक काम कर चुका था। हालांकि मारपीट के मामलों के कारण उसे आर्मी से निकाल दिया गया था।

इस Burhanpur Murder Case में हुसन की गिरफ्तारी के लिए 30,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया। लालबाग थाने के प्रभारी निरीक्षक अमित सिंह जादौन की टीम ने कई राज्यों में छापेमारी की। हुसन के मोबाइल नंबर, IMEI और सोशल मीडिया की निगरानी की गई। कई बार टीम उत्तर प्रदेश के आगरा, झांसी और दूसरे शहरों में भी गई, लेकिन हर बार हुसन बच निकलने में कामयाब रहा।

आखिरकार आगरा में दबोचा गया आरोपी

डेढ़ साल की कड़ी मेहनत के बाद पुलिस को सूचना मिली कि हुसन आगरा में छुपा है। तुरंत एक टीम आगरा भेजी गई। उत्तर प्रदेश की STF टीम की मदद से रायमा मंदिर के पास से हुसन सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में हुसन ने बताया कि उसकी प्रीतेश गुप्ता नाम के शख्स से पैसों को लेकर दुश्मनी थी। उसे फंसाने के लिए उसने यह साजिश रची थी।

आरोपी का खतरनाक आपराधिक इतिहास

हुसन सिंह कोई पहली बार का अपराधी नहीं है। यह शातिर बदमाश पिछले 15 सालों से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में गंभीर अपराधों में लिप्त रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसके खिलाफ हत्या की कोशिश, लूट, डकैती और गैंगस्टर एक्ट जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

हुसन सिंह के खिलाफ दर्ज प्रमुख मामले:

2009 – पहला गंभीर अपराध: अछनेरा, आगरा में हत्या की कोशिश और धमकी का मामला (धारा 307, 452, 504, 506) दर्ज हुआ।

2012 – डकैती का मामला: फिर से अछनेरा थाने में डकैती की धारा 395 के तहत केस दर्ज हुआ।

2013 में तीन बड़े मामले: इस साल हुसन की आपराधिक गतिविधियां चरम पर थीं। अछनेरा में लूट का मामला (धारा 394, 411), गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला (धारा 02/03), और राजस्थान के भरतपुर में हथियार रखने का मामला (धारा 03, 25 आर्म्स एक्ट) दर्ज हुआ।

2015 – दोबारा गैंगस्टर एक्ट: शाहगंज, आगरा में फिर से गैंगस्टर एक्ट (धारा 02/03) के तहत मामला दर्ज।

2020 – मारपीट का मामला: अछनेरा में धारा 323, 341, 506 के तहत केस दर्ज हुआ।

2024 – बुरहानपुर हत्याकांड: वर्तमान मामला जिसमें धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज है।

इन सभी मामलों से साफ है कि हुसन सिंह एक पेशेवर अपराधी बन चुका था, जो तीन राज्यों में अपराध करता रहा।

पुलिस टीम की मेहनत रही कामयाब

इस जटिल मामले को सुलझाने में पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंतर सिंह कनेश और शहर पुलिस अधीक्षक गौरव पाटिल के मार्गदर्शन में टीम ने शानदार काम किया। निरीक्षक अमित सिंह जादौन, उप निरीक्षक जयपाल राठौर, आरक्षक अजय वारुले, भरत देशमुख और साइबर टीम के सदस्यों की भूमिका काबिले तारीफ रही। उत्तर प्रदेश STF के निरीक्षक यतीन्द्र शर्मा और उनकी टीम का भी इस गिरफ्तारी में अहम योगदान रहा।

यह Burhanpur Murder Case दिखाता है कि चाहे अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो और उसका आपराधिक इतिहास कितना भी लंबा क्यों न हो, पुलिस की मेहनत और तकनीक की मदद से सच सामने आ ही जाता है। इस मामले में DNA टेस्ट और साइबर निगरानी ने अहम भूमिका निभाई।

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Sameer Mahajan

समीर महाजन, Fact Finding न्यू एज डिजिटल मीडिया के फाउंडर और संपादक हैं। उन्होंने प्रमुख समाचार चैनलों में संवाददाता के रूप में कार्य किया और वर्तमान में बड़े न्यूज़ नेटवर्क से जुड़े हैं। उनकी विशेषता राजनीति, अपराध, खेल, और सामाजिक मुद्दों में है। Fact Finding की स्थापना का उद्देश्य उन खबरों को उजागर करना है जो मुख्यधारा मीडिया में दब जाती हैं, ताकि सच्चाई और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

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